
राजस्थान में मूसलाधार बारिश के चलते 20 लोगों की मौत के बाद स्थानीय प्रशासन ने स्कूल बंद करने का ऐलान कर दिया है. भारी बारिश से कई लोगों के घरों में पानी भर गया है और आम जीवन अस्त-व्यस्त है.
जयपुर और उसके आसपास ढोलपुर और दौसा इलाके में अब तक लगभग 20,000 लोग विस्थापित हो चुके हैं.
स्शानीय संवाददाता नारायण बारेठ के मुताबित सरकार ने औपचारिक रुप से 14 लोगों के मरने की पुष्टि की है लेकिन अलग-अलग इलाकों में बारिश से हुए हादसों में अबतक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है.
मस्जिदों से अजान
बुधवार को जयपुर की कई मस्जिदों में बारिश रुकने की दुआ की गई. इससे पहले खराब मानसून और सूखे की स्थिति के चलते बारिश की दुआ की जा रही थी.
राजधानी जयपुर में बीती रात 12 बजे से लेकर ढाई बजे तक 17 सेंटीमीटर से भी अधिक बरसात रिकॉर्ड की गई. मौसम विज्ञानियों के मुताबिक ये पिछले तीन दशक में हुई सबसे अधिक वर्षा है. इससे पहले 23 जुलाई 1981 को जयपुर में एक ही दिन में 32.6 सेंटीमीटर बारिश हुई थी.
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में और अधिक बारिश होने के संकेत दिए हैं. इसके चलते स्थानीय प्रशासन ने बचाव कार्य और राहत कार्य तेज़ कर दिए हैं. बारिश के चलते शहर के कई इलाकों में पानी भर गया है और कई घर ढह गए हैं. इलाकों में लोगों ने अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर शरण ले रखी है.
बारिश के चलते सड़क और रेल यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है. बारिश के चलते जयपुर के हवाई अड्डे पर भी पानी भर गया है जहां रात में कुछ घंटे बिजली भी गुल रही.
इस बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्थिती का जायज़ा लेने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बात की. राज्य सरकार ने मरने वालों के परिजनों को डेढ़ लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है.








