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सूखी ब्रेड और टॉयलेट के पानी के सहारे गुज़र कर रहे हैं सूडान में फँसे भारतीय
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
सूडान में सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच लगातार गोलीबारी और बमबारी के बीच 100 से अधिक भारतीयों के फँसे होने का अनुमान है. इन लोगों की एक बड़ी संख्या होटल के कमरों या घरों में खाने-पीने की किल्लत से जूझ रही हैं.
सूडान में फँसे दक्षिणी राज्य कर्नाटक के कुछ भारतीयों से बीबीसी ने बातचीत की, इस बातचीत के दौरान भारी गोलीबारी सुनी जा सकती थी.
गोलीबारी की ये आवाज़ें न केवल सूडान की राजधानी खार्तूम में सुनी जा सकती थी बल्कि वहाँ से काफ़ी दूर-दूर अल-फशीर में भी सुनी जा सकती थी.
- बुधवार को भारतीय समयानुसार रात 9.30 बजे सूडान की सेना और अर्धसैनिक बल 'रैपिड सपोर्ट फ़ोर्स' के बीच 24 घंटे के संघर्ष विराम की घोषणा की गई थी.
- ख़ार्तूम में लड़ाई का ये छठा दिन है और अब तक 200 लोगों की मौत हो चुकी है. लोग शहर छोड़ कर पलायन कर रहे हैं.
- शहर के अधिकांश इलाकों में लोग अपने घरों में क़ैद हैं. इनमें कई विदेशी नागरिक भी हैं.
- भारतीय दूतावास के मुताबिक़ सूडान में 181 भारतीय नागरिक फँसे हुए हैं.
- सूडान में नागरिक सरकार को सत्ता हस्तांतरित करने की माँग को लेकर 2021 से ही संघर्ष चल रहा है.
- मुख्य विवाद सेना और अर्धसैनिक बल 'आरएसएफ' के विलय को लेकर है.
- ताज़ा हिंसा कई दिनों के तनाव के बाद हुई. आरएसएफ के जवानों को ख़तरा मानते हुए सेना ने पिछले सप्ताह इनकी तैनाती के लिए नई व्यवस्था शुरू की.
- अक्तूबर 2021 में नागरिकों और सेना की संयुक्त सरकार के तख्तापलट के बाद से ही सेना और अर्धसैनिक बल आमने-सामने हैं.
- सूडान की वायु सेना ने 60 लाख से अधिक आबादी वाले खार्तूम में हवाई हमले किए हैं, जिसमें नागरिकों के हताहत होने की आशंका है.
टॉयलेट का पानी पीने को मज़बूर
कर्नाटक के मांड्या ज़िले के नागमंगला के मूल निवासी संजू ने बीबीसी से बताया, "हम उस होटल में रह रहे हैं जिसके कर्मचारी संघर्ष शुरू होते ही पाँच दिन पहले यहाँ से जा चुके हैं. हम बचे हुए ब्रेड के टुकड़े और शौचालय के नल के पानी पर जीवित हैं. फिलहाल इस एक कमरे में हम दस लोग रह रहे हैं."
अल-फ़शीर में फँसे प्रभु एस ने कहा "ये बहुत भयानक है. हम फ़िल्मों में दिखने वाली गोलीबारी और बमबारी से कहीं ज़्यादा ख़तरनाक हालत में फँसे हैं. हम यहाँ 31 लोग हैं और कल एक दुकान आधे घंटे के लिए खुली जिससे हमें थोड़ा चावल और पानी मिला."
कर्नाटक के दावणगेरे ज़िले के चन्नागिरी के रहने वाले हैं प्रभु ने बताया, "भारी गोलीबारी ज़्यादातर सुबह और शाम के आस-पास होती है. जो देर रात तक जारी रहती है. तुलनात्मक रूप से दोपहर कुछ हद तक शांत रहता है."
संजू ने क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति की कमी की शिकायत करते हुए कहा, ''आप बैकग्राउंड में फायरिंग सुन सकते हैं. यह घंटों से बिना रुके चल रहा है.''
संजू ने कहते हैं, ''पड़ोस के पाँच मंजिला होटल में 98 लोग हैं. हमारे दूतावास के अधिकारियों ने हमसे संपर्क किया और हमें किसी भी समय बाहर जाने से मना किया है. लेकिन अब और कब तक बिना खाना-पानी के इंतजार करना है."
दरअसल, संजू और उनकी पत्नी को 18 अप्रैल को वापस भारत के लिए उड़ान भरनी थी, लेकिन तीन दिन पहले ही हवाई अड्डे को बंद कर दिया गया था.
कर्नाटक के शिवमोगा में रहने वाले हक्की-पिक्की जनजाति के पहले इंजीनियर कुमुदा ने बीबीसी हिन्दी को बताया, "कुछ जगहों पर सूडानी पड़ोसियों ने हमारे लोगों को भोजन मुहैया कराया है. मैंने दो दिन पहले वहाँ अपनी बेटी और दामाद से बात की थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से उनसे बात नहीं हो पाई है."
हक्की-पिक्की जनजाति
कर्नाटक में हक्की-पिक्की जनजाति के अधिकांश लोग अपने हर्बल और आयुर्वेदिक अर्क को स्थानीय लोगों को बेचने के लिए सूडान जाते हैं. इनमें से ज़्यादातर पाउडर को गैस्ट्रिक समस्याओं या सिरदर्द ठीक करने के लिए उपयोग में लाया जाता है. वे बालों के लिए तेल भी बेचते हैं जो बालों को झड़ने से रोकता है.
प्रभु ने बताया, "हम इन तेलों और अर्क का इस्तेमाल मालिश के लिए भी करते हैं."
प्रभु ने अपने उत्पादों को बेचने के लिए भारत के अलग-अलग राज्यों का दौरा किया है. उनके उत्पाद बड़े पैमाने पर जड़ी-बूटियों पर आधारित हैं.
शिवमोगा के पास हक्की पिक्की शिविर में एक 33 वर्षीय स्कूल शिक्षक रघुवीर कहते हैं, "वो वहाँ करीब पाँच से छह महीने रहते हैं और कुछ पैसे कमाकर वापस लौट जाते हैं."
उन्होंने आगे कहा, "उनकी बहन और जीजा पांच महीने पहले करीब पांच लाख रुपये का कर्ज़ लेकर पांच रिश्तेदारों के साथ चले गए. वह अपने बच्चों को अपनी सास के पास छोड़ गई है. मैंने उससे क़रीब 10 दिन पहले बात की थी जब उसका पैर टूट गया था. उसके बाद उनसे बात करना नामुमकिन हो गया है.''
मैसूर विश्वविद्यालय के सेंटर फ़ॉर स्टडी ऑफ़ सोशल एक्सक्लूजन एंड इनक्लूसिव पॉलिसी के उप-निदेशक डॉ डीसी ननजुंदा ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "महिलाएँ भी अपने पतियों की मदद तेल बनाने में करती हैं. वे उन लोगों की मालिश करने में भी मदद करती हैं जो किसी बीमारी से पीड़ित हैं जिनके लिए इन तेलों का उपयोग किया जाता है.''
हक्की-पिक्की एक खानाबदोश जनजाति है, जिसकी जनसंख्या 2011 की जनगणना रिपोर्ट में 11,892 है. ये कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों के कुछ ज़िलों में फैले हुए हैं.
हक्की-पिक्की का शाब्दिक अर्थ है पक्षी-शिकारी या चिड़ीमार.
लेकिन 1970 के दशक में पक्षी-शिकार के उनके व्यापार पर प्रतिबंध लगने के बाद उनकी जनजाति के सदस्य पौधों से हर्बल उत्पाद बनाते हैं जिसे वे भारत और विदेशों में बेचते हैं.
'बस इंतजार कर रहे हैं'
डॉ. ननजुंदा कहते हैं, "वे अपने उत्पादों के साथ ज़्यादातर सिंगापुर और मलेशिया जाते हैं. आपको आश्चर्य होगा कि हमारे अध्ययन के दौरान हमने पाया कि समुदाय के सभी सदस्यों के पास पासपोर्ट है और वे अधिकतर अपने परिवार के साथ यात्रा करते हैं. वे 'बागड़ी' नाम की एक भाषा बोलते हैं जिसमें आपको गुजराती के कुछ अंश मिलेंगे."
संजू ने कहते हैं, "भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने हमसे संपर्क किया और हमें किसी भी समय इमारत से बाहर निकलने के लिए मना किया है. हम बस इंतजार कर रहे हैं."
हालांकि, प्रभु ने कहा कि कर्नाटक राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) ने भी उन्हें घर के अंदर रहने के लिए कहा है. दूतावास के किसी भी अधिकारी ने अब तक अल-फशीर में रहने वालों से संपर्क नहीं किया है.
कांग्रेस नेता सिद्धरमैया ने प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्री, विदेश मंत्रालय और मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को " मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने" का आग्रह करते हुए ट्वीट किया है.
ट्वीट पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'आपके ट्वीट से स्तब्ध हूं! जीवन दांव पर हैं; राजनीति ना करें. 14 अप्रैल को लड़ाई शुरू होने के बाद से खार्तूम में भारतीय दूतावास सूडान में अधिकांश भारतीय नागरिकों और पीआईओ के साथ लगातार संपर्क में है.''
इस पर सिद्धारमैया ने पलटवार करते हुए कहा: ''चूंकि आप विदेश मंत्री हैं, इसलिए मैंने आपसे मदद की अपील की है. यदि आप भयभीत होने में व्यस्त हैं तो कृपया हमें उस व्यक्ति की ओर संकेत करें जो हमारे लोगों को वापस लाने में हमारी मदद कर सकता है.''
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