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राज्यसभा में पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण की दस बड़ी बातें
गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से 'मोदी मोदी' और 'मोदी अडानी भाई भाई' के नारों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर अपना हमलावर रुख़ जारी रखा.
उन्होंने एक ओर अपनी सरकार की योजनाओं और उससे लाभान्वित होने वालों के बारे में आंकड़े पेश किए तो दूसरी तरफ़ विपक्षी दल कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर भी तीखे हमले किए.
उनके पूरे भाषण के दौरान विपक्ष के सांसद लगातार नारे लगाते रहे और जेपीसी की मांग करते रहे. लेकिन इस शोर शराबे के बीच प्रधानमंत्री ने अपना लंबा भाषण पूरा किया.
आइए नज़र डालते हैं प्रधानमंत्री के भाषण की मुख्य दस बातें-
1- नेहरू सरनेम रखने से शर्मिंदगी क्यों?'
अपने भाषण में कांग्रेस पर सबसे तीखा हमला बोलते हुए मोदी ने कहा, "अपनी हर परियोजनाओं का नाम नेहरू पर रखते हैं ये लोग. हमसे कभी कभार छूट भी जाता है. वे देश के प्रथम प्रधानमंत्री थे."
उन्होंने कहा, "मुझे ये समझ नहीं आता कि उनकी पीढ़ी का कोई व्यक्ति नेहरू सरनेम रखने से डरता क्यों है, उन्हें क्या शर्मिंदगी है? इतना महान व्यक्तित्व, अगर आपको मंजूर नहीं है, आपके परिवार को मंजूर नहीं है, और हमारा हिसाब मांगते रहते हो?"
उन्होंने कहा कि यह देश किसी परिवार की जागीर नहीं है.
2-कांग्रेस ने 356 का बेजा इस्तेमाल किया
मोदी ने कहा कि आज जो लोग आज विपक्ष में बैठे हैं उन्होंने राज्यों के अधिकारों की धज्जियां उड़ाई हैं.
उन्होंने कहा, "मैं आज कच्चा चिट्ठा खोलना चाहता हूं. वो कौन पार्टी थी, कौन लोग सत्ता में बैठे थे जिन्होंने आर्टिकिल 356 का सबसे अधिक दुरुपयोग किया. 90 बार चुनी हुई सरकारों को गिरा दिया गया. कौन हैं जिन्होंने ये किया? एक प्रधानमंत्री ने आर्टिकिल 356 का 50 बार इस्तेमाल किया, वो नाम है श्रीमती प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का."
उन्होंने कांग्रेस के साथ एकजुट हुए अन्य विपक्षी दलों से कहा, "जो लोग इनके साथ खड़े हैं, वे ज़रा याद कर लें. केरल में देश की वामपंथी सरकार चुनी गई, जिसे पंडित नेहरू पसंद नहीं करते थे, चुनी हुई पहली सरकार बर्खास्त कर दी गई."
उन्होंने डीएमके पर निशाना साधते हुए कहा, "तमिलनाडु में एमजीआर और करुणानिधि की सरकारों को भी इन्हीं कांग्रेस के लोगों ने गिरा दिया. एमजीआर की आत्मा आज देखती होगी कि आप कहां खड़े हो."
उन्होंने 1980 के दशक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद पवार की महाराष्ट्र सरकार गिराए जाने का भी ज़िक्र किया.
4- ओल्ड पेंशन स्कीम का बिना नाम लिए क्या कहा?
उन्होंने कहा कि जो लोग सिर्फ राजनीतिक खेल खेलना जानते हैं, अर्थनीति को अनर्थ नीति में बदल दिया है, "मैं उन्हें चेतावनी देना चाहता हूं कि वे अपने अपने राज्यों को जाकर समझाएं कि वे गलत रास्ते पर न चले जाएं. हम पड़ोसी देशों का हाल देख रहे हैं कि वहां पर क्या हाल हुआ है."
"अनाप शनाप कर्ज लेकर किस तरह देशों को डुबो दिया गया. आज हमारे देश में भी तत्कालीन लाभ के लिए ये नज़रिया है कि भुगतान करना होगा तो आने वाली पीढ़ी करेगी. कर्ज लेकर घी पियो वाला खेल जिसे आने वाला देखेगा. ये रवैया कुछ राज्यों ने अपनाया है. ये अपने राज्य को तो तबाह करेंगे ही देश को भी बर्बाद कर देंगे."
ओल्ड पेंशन स्कीम का नाम बिना लिए पीएम मोदी ने कहा, "देश की आर्थिक सेहत के लिए राज्यों को आर्थिक अनुशासन का रास्ता चुनना पड़ेगा और तभी ये राज्य भी इस विकास का लाभ ले पाएंगे."
5-संघीय ढांचे पर क्या कहा?
उन्होंने कहा, "हम पर ऐसे आरोप लगाए जाते हैं कि राज्यों को हम परेशान कर रहे हैं. लेकिन मैं लंबे अरसे तक एक राज्य का मुख्यमंत्री रह कर आया हूं, फेडरलिज्म का क्या महत्व होता, उसे भलीभांति समझता हूं, उसे जी करके आया हूं. और इसलिए हमने कोआपरेटिव कंपटीटिव फ़ेडरलिज्म पर बल दिया है. हम सहयोग करें, हम आगे बढ़ें."
"हमने अपनी नीतियों में नेशनल प्रोग्रेस को भी ध्यान में रखा है और रीजनल एस्पीरेशंस (इलाकाई आकांक्षाओं) का भी ध्यान रखा है. क्योंकि हम सब मिलकर 2047 तक एक विकसित भारत का सापना साकार करेंगे.
उन्होंने कहा कि रिटेल से लेकर टूरिज़्म तक के क्षेत्रों का विस्तार किया गया है. खादी और ग्रामोद्योग, जिसे इन्होंने डूबो दिया था. हमारे कार्यकाल में इसे विकसित किया गया.
6- सेकुलरिज़्म की नई परिभाषा
उन्होंने कहा, "कांग्रेस को बार-बार देश नकार रहा है लेकिन कांग्रेस और उसके साथी अपनी साज़िशों से बाज़ नहीं आ रहे हैं लेकिन जनता इसे देख रही है और उनको हर मौके पर सज़ा भी दे रही है."
विपक्ष के धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर उन्होंने कहा, "हमने आज़ादी के अमृतकाल में 'सेचुरेशन' का लक्ष्य तय किया है."
इसका मतलब समझाते हुए उन्होंने कहा कि हर योजना के शत प्रतिशत लाभार्थियों तक इसके लाभ पहुंचाए जाए.
"योजनाओं का सेचुरेशन ही सच्चा 'सेकुलरिज़्म' है. इसका मतलब भेदभाव की हर गुंज़ाइश को ख़त्म करना है. यह भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की सारी आशंकाओं को ख़त्म करता है. इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति को भी मिलता है."
7- 'जितना कीचड़ उछालोगे कमल उतना ज़्यादा खिलेगा...'
प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान विपक्षी सांसद लगातार 'मोदी-अदानी भाई-भाई' के नारे लगाते रहे.
हालांकि बुधवार को लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी उन्होंने अदानी मामले का ज़िक्र नहीं किया है.
पीएम मोदी ने इंदिरा गांधी के शासनकाल में बैंकों के राष्ट्रीयकरण की आलोचना करते हुए अपनी सरकार द्वारा आम आदमी के लिए किए गए कामों को गिनाया.
विपक्षी सांसदों की राज्यसभा में नारेबाज़ी पर तंज़ कसते हुए उन्होंने कई बातें कहीं.
मोदी ने कहा, "दूर्भाग्यपूर्ण है कि सदन में कुछ लोगों का व्यवहार और वाणी न सिर्फ सदन को बल्कि देश को निराश करने वाली है."
उन्होंने कहा, "माननीय सदस्यों को मैं कहूंगा कि 'कीचड़ उसके पास था मेरे पास गुलाब, जो भी जिसके पास था उसने दिया उछाल. आप जितना कीचड़ उछालेंगे, कमल उतना ज़्यादा खिलेगा."
8- गिनाए सरकार की सफलता के आंकड़े
पीए मोदी ने अपनी सरकार द्वारा जनधन खाते खुलवाने की मुहिम का ज़िक्र किया. इसके लिए अपनी सरकार को मिली चुनौतियों को उन्होंने बताया.
उन्होंने अपनी सरकार आने से पहले देश में केवल 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे, लेकिन हमारी सरकार ने हर घर को इसका कनेक्शन दिया. आज देश में 32 करोड़ से ज़्यादा घरों में यह सुविधा पहुंच गई है.
उन्होंने हर गांव तक बिजली पहुंचाने के प्रयासों को भी बताया. पीएम मोदी ने पिछली सरकारों को इस दिशा में नाकाम क़रार दिया. पीएम मोदी ने कहा कि इन सुविधाओं का एक फ़ायदा ये होता है कि इससे लोगों का विश्वास बढ़ता है.
9- भाषण में अदानी का ज़िक्र नहीं
मोदी ने अपने भाषण में अडानी समूह पर अमेरिकी शार्ट सेलर रिसर्च हिंडनबर्ग की ओर से लगाए गए आरोपों पर कुछ नहीं कहा.
शेयर मार्केट में अकाउंटिंग हेरफेर और फ्रॉड के आरोपों के कारण पिछले कुछ समय से अदानी ग्रुप के शेयर गिरते जा रहे हैं. हालांकि ग्रुप ने इन आरोपों का ज़ोरदार खंडन किया है.
उनके पूरे भाषण के दौरान 'मोदी अदानी भाई भाई' और 'वी वांट जेपीसी' के नारे विपक्षी सदस्य लगाते रहे.
बीच बीच में सत्ता पक्ष की ओर से भी 'मोदी मोदी' के नारे लगाए गए.
10-जब एक पल के लिए मोदी भावुक हुए
भाषण में महिलाओं के उत्थान के लिए किए जा रहे सरकारी प्रयासों के आंकड़े देते समय एक पल ऐसा आया जब वो भावुक दिखे लेकिन दूसरे ही पल उन्होंने अपना भाषण अपने सधे अंदाज़ में जारी रखा.
उन्होंने कहा, "हमारी प्राथमिकता हमारे देश के नागरिक थे इसलिए हमने 25 करोड़ से ज़्यादा परिवारों तक गैस कनेक्शन पहुंचाया. इसमें हमें नए इंफ्रास्ट्रक्चर और धन खर्च करना पड़ा. 18,000 से ज़्यादा गांव ऐसे थे जहां बिजली नहीं पहुंची थी. समय सीमा के साथ हमने 18,000 गांवों में बिजली पहुंचाई."
अपना भाषण समाप्त करते हुए उन्होंने कहा, " देश देख रहा है कि एक अकेला कितनों को भारी पड़ रहा है. मैं देश के लिए जीता हूं, देश के लिए कुछ करने के लिए निकला हूं, इसलिए ये राजनीति खेल खेलने वाले लोग, इनके अंदर ये हौसला नहीं है, वे बचने का रास्ता खोज रहे हैं."
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