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पश्चिमी देशों की किन बातों से आया जयशंकर को गुस्सा, सुना डाली खरी-खरी- प्रेस रिव्यू
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूक्रेन और जी-20 सम्मेलन में भारत के रुख़ पर सवाल उठाने वाले पश्चिमी देशों को खरी-खरी सुनाई है.
'टाइम्स ऑफ इंडिया' ने 'टाइम्स समिट' में जयशंकर के उस बयान को प्रमुखता से छापा है, जिसमें उन्होंने तमाम मुद्दों पर भारत के रुख़ की आलोचना करने वाले पश्चिमी देशों को जवाब दिया है.
'टाइम्स समिट' में जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान पर भारत और कुछ पश्चिमी देशों के विचार नहीं मिलते, उसी तरह पश्चिमी देशों को भी तमाम मुद्दों पर अलग राय रखने वाले भारत के साथ रहना सीखना होगा.
उन्होंने कहा, ''कई मुद्दों पर हमारा रुख़ अलग है. पश्चिमी देश इसकी शिकायत कर रहे हैं. जयशंकर ने तंज करते हुए कहा, हमें उनसे सहानुभूति है. ''
चीन के ख़िलाफ़ मोदी की ओर से सख़्त रुख़ न अपनाए जाने से जुड़े सवाल पर जयशंकर ने कहा, '' प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर अपने कदमों को लेकर काफ़ी स्पष्ट हैं. उन्होंने इसके समर्थन में चीन की आक्रामकता के ख़िलाफ़ सीमा पर भारतीय सैनिकों की मौजूदगी और वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने का उदाहरण दिया.''
जयशंकर से पूछा गया कि क्या भारत और क्वाड देशों के नज़रिये में अंतर है. इस पर उन्होंने कहा, '' क्वाड देशों का एक दूसरे के नज़रिये से सहमत होना जरूरी नहीं है. अगर क्वाड देश भारत से कुछ अपेक्षा रखते हैं तो भारत की भी उनसे अपेक्षाएं हैं.''
उन्होंने कहा कि भारत का एक पड़ोसी देश रात-दिन चरमपंथ का इस्तेमाल करता है. भारत इस मसले पर जो कहता है उस पर सारे क्वाड देश दस्तख़त क्यों नहीं कर देते.
' चीन के साथ टकराव की जड़ में 1962 की हार'
जी-20 देशों के बाली सम्मेलन में भारत को सहमति बनाने वाले देश के तौर पर देखे जाने के सवाल पर जयशंकर ने कहा, '' जब आप एक ईमानदार मध्यस्थ की बात करते हैं तो इसमें अहम चीज है 'ईमानदारी'. आपकी ईमानदारी और प्रतिबद्धता दिखनी चाहिए. ''
जयशंकर ने कहा, '' भारत ने बाली में जो किया, वो नहीं कर पाता अगर यूक्रेन पर उसका रुख़ दूसरे देशों से अलग होता. ''
चीन से मिल रही चुनौती से निपटने के लंबी अवधि की रणनीति न बनाने के विपक्ष के आरोपों को जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा, '' पीएम नरेंद्र मोदी ऐसे व्यक्ति हैं, जो काम करने में विश्वास रखते हैं, उंगुली उठाने में नहीं. आज सीमा में भारत चीन को लेकर जिस समस्या का सामना कर रहा है, उसकी जड़ें 1962 की लड़ाई में हमारे देश को मिली हार है. ''
उन्होंने कहा,'' ये दिक्कत इसलिए आई कि हमने सीमा पर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में देरी की. हमने इस मामले में सुधारों को लागू करने में 15 साल की देरी कर दी.''
चीन में आईफोन प्लांट से 20 हजार कामगारों ने काम छोड़ा
चीन में कोरोना पर काबू पाने के लिए कई शहरों में लगाए गए लॉकडाउन के ख़िलाफ़ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. कई शहरों में लॉकडाउन तोड़ कर घरों से बाहर आए लोगों और पुलिस के बीच टकराव की घटनाएं सामने आई हैं.
'द हिंदू' ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चीन में शुक्रवार को कोरोना केस की संख्या बढ़ कर 32,965 हो गई. अप्रैल के बाद ये सबसे बड़ा आंकड़ा है. इसकी वजह से देश के कई शहरों में आंशिक लॉकडाउन लगाना पड़ रहा है.
कोरोना संक्रमण को काबू रखने के लिए देश के कई शहरों में लंबे वक़्त से लॉकडाउन चल रहा है. लेकिन लॉकडाउन की सख़्ती के ख़िलाफ़ लोगों का गुस्सा फूटने लगा है. कई जगह पुलिस और घरों से बाहर आए लोगों में टकराव की घटनाएं हुई हैं.
जिन प्रमुख शहरों में टकराव की घटनाएं सामने आई हैं उनमें 'आईफोन हब' झेंगज़ो से लेकर दक्षिण के मैन्यूफैक्चरिंग हब गुआंगज़ो शामिल हैं.
'द हिंदू' के मुताबिक लॉकडाउन को लेकर शुक्रवार को सोशल मीडिया पर सबसे बड़ी ख़बर एक अपार्टमेंट्स में आग लगने की वजह से दस लोगों की मौत की थी.
लोग सरकारी मीडिया की उन रिपोर्टों पर सवाल उठा रहे हैं, जिनमें कहा गया है कि अपार्टमेंट के कंपाउंड को लॉकडाउन नहीं किया गया था. लोग कह रहे हैं कि आख़िर फायरब्रिगेड की गाड़ियां वहां क्यों नहीं पहुंच पाईं. लोगों ने इस हादसे के लिए सख़्त लॉकडाउन को जिम्मेदार ठहराया है.
कोविड की सख़्ती बड़ी मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों पर भारी पड़ रही है. 'बिजनेस स्टैंडर्ड' और 'टाइम्स ऑफ इंडिया' में कोविड की सख़्ती और वेतन के सवाल पर मचे बवाल के बाद फॉक्सकॉन के आईफ़ोन प्लांट से 20 हज़ार लोगों के गुआंगज़ो छोड़ कर जाने की ख़बरें हैं.
'बिजनेस स्टैंडर्ड' ने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से बताया है कि इससे आईफ़ोन की ग्लोबल सप्लाई को झटका लग सकता है.
'द हिंदू' की रिपोर्ट में भी कोविड लॉकडाउन की सख़्ती की वजह से अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर का जिक्र किया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल चीन की जीडीपी का 20 फीसदी से भी ज़्यादा हिस्सा लॉकडाउन का शिकार है. इससे पिछली तिमाही की तुलना में अर्थव्यवस्था में गिरावट की आशंकाएं बढ़ गई हैं.
इससे चीनी केंद्रीय बैंक की चिंताएं भी बढ़ गई हैं. लिहाजा शुक्रवार को इसने रिजर्व रेश्यो में दूसरी बार कटौती का ऐलान किया.
इससे चीनी अर्थव्यवस्था में 70 अरब डॉलर रुपये का पूंजी प्रवाह होगा.
केरल में फुटबॉल फीवर पर क्यों खफा हो रहे मौलवी
क़तर में चल रहे फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप का बुख़ार सबसे ज़्यादा भारत में केरल और पश्चिम बंगाल को देखने को मिल रहा है.
लेकिन केरल में असरदार मुस्लिम संगठनों ने वर्ल्ड फुटबॉल मैचों में नामी-गिरामी खिलाड़ियों की तारीफ़ पर नाराज़गी जताई है. इन संगठनों का कहना है कि खिलाड़ियों को नायक बना कर पूजा करना इस्लाम के ख़िलाफ़ है.
इस्लाम के मानने वालों के बीच इस तरह के 'पागलपन' पर लगाम की जरूरत है.
' इंडियन एक्सप्रेस' में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक केरल में मौलवियों के एक संगठन समस्त केरला जमलयाथिल ख़ातिब कमेटी ने शुक्रवार की नमाज़ के बाद की तक़रीर में कहा कि लोग फुटबॉल के नाम पर पैसा बर्बाद न करें.
समस्त केरला जमलयाथिल ख़ातिब कमेटी इंडियन यूनियन मुस्लिग लीग से जुड़ी है, जो केरल में कांग्रेस की अगुआई वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की सहयोगी है.
कमेटी के जनरल सेक्रेट्री नसर फैज़ी कुड्डथई का कहना है, '' फुटबॉल का पागलपन केरल में बुरी तरह हावी है. ऐसा केरल में पहले कभी नहीं दिखा था. हम फुटबॉल और इस खेल प्रति प्रेम के ख़िलाफ़ नहीं हैं. लेकिन यहां युवा फुटबॉल खिलाड़ियों के बड़े-बड़े कटआउट लगवाने पर पैसा खर्च कर रहे हैं. उन्हें ये पैसे चैरिटी पर खर्च करना चाहिए.''
केरल के कोझिकोड और मल्लपुरम में मुस्लिमों की ख़ाासी आबादी है और उनके बीच फुटबॉल काफी लोकप्रिय है. लोग इस बात को लेकर बहस करते दिखते हैं कि अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी का का समर्थन किया जाए या फिर पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो का.
लोग अर्जेंटीना, ब्राजील, फ्रांस जैसी दिग्गज टीमों की जर्सी पहन कर दिख जाते हैं.
फुटबॉल पर पैसा ख़र्च न करने की मौलवियों की अपील की प्रतिक्रिया भी हुई है. आईयूएमएल के नेता के एन के क़ादिर ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, '' खेल देख कर इसका आनंद भी लिया जाना चाहिए. ये सिर्फ मनोरंजन के लिए है. मेरी कोई टीम नहीं है. सारी टीमें मेरी हैं इसलिए सभी खिलाड़ी भी मेरे हैं. ''
माकपा नेता और शिक्षा मंत्री वी सिवनकुट्टी ने कहा कि केरला जमलयाथिल ख़ातिब कमेटी को लोगों को फुटबॉल के प्रति हतोत्साहित करने का पूरा अधिकार है लेकिन उसके साथ ही लोगों को अपने प्रिय खिलाड़ियों को पूजने का भी अधिकार है. ''
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