रायपुर 'धर्म संसद' पर क्या बोले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल?-बीबीसी एक्सक्लूसिव

    • Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, झांसी

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हुई 'धर्म संसद' के मंच से महात्मा गांधी के ख़िलाफ दिए गए आपत्तिजनक बयान और भड़काऊ भाषण पर काफी विवाद हुआ.

इस कार्यक्रम का कथित वीडियो वायरल होने के बाद रायपुर पुलिस ने कार्रवाई की और कालीचरण महाराज को गिरफ्तार किया. इस घटना के करीब डेढ़ महीने बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से बीबीसी ने विस्तार से बात की.

बीबीसी के साथ बातचीत में बघेल ने कहा कि इस मामले में जिसने 'ग़लत किया है, वो जेल जाएगा.' हालांकि, 'धर्म संसद' में कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी और ख़ुद को आमंत्रित किए जाने के सवाल पर वो बचाव करते दिखे. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से हुई बातचीत के प्रमुख अंश, पढ़िए

सवाल: कुछ लोग कह रहे हैं कि हिजाब पर्सनल च्वाइस (निजी पसंद) का मामला है, संस्कृति से जुड़ा, मौलिक अधिकारों से जुड़ा मामला है. क्या आप हिजाब का समर्थन करते हैं?

जवाब: कौन क्या पहनेगा, क्या खाएगा यह व्यक्तिगत रुचि है. उतनी स्वतंत्रता तो मिलनी ही चाहिए. आप काले कपड़े पहन लें तो आपसे मैं घृणा करने लगूं. मैंने सफेद कुर्ता पहना है तो आप मुझसे नफरत करने लगें, ये कोई बात हुई. चाहे धर्मांतरण का मामला हो या सांप्रदायिकता का मामला, उसे कैसे ट्विस्ट करना है, उसे क्या रंग देना है. इसमें उन्हें (बीजेपी को) मास्टरी हासिल है.

सवाल: यही तो आजकल आपके राज्य में भी आजमाने की कोशिश की जा रही है?

जवाब: हमारे यहां कवर्धा में उन्होंने धर्मांतरण का मुद्दा खूब उठाया. सांप्रदायिकता का मामला खूब उठाया है. 'धर्म संसद' के माध्यम से गांधी जी के बारे में भी कई चीजें कहीं, लेकिन हमने सख्ती से उसको दबाया भी. जिसने गलत किया है जेल जाएगा, ये कानून कहता है.

सवाल: रायपुर में हुई 'धर्म संसद' के बाद आज या कल में एक हिंदू संगोष्ठी फिर से होने वाली है. इसमें तो आपके कांग्रेस के एक विधायक भी शामिल होने वाले हैं?

जवाब: पुरी के शंकराचार्य जी के कार्यक्रम में हमलोग भी गए हैं. उनसे आशीर्वाद लेने हम सब जाते हैं. इसका अर्थ ये नहीं है कि हम उनके सारे विचारों से सहमत हों.

सवाल: उसी 'धर्म संसद' में जहां भड़काऊ भाषण दिया गया, वहां आपके जाने की घोषणा भी हुई थी?

जवाब: हां, मैं वहां जाता और अपनी बात रखता. मुझे पहले से कैसे पता चलता कि यहां भड़काऊ भाषण दिया जाने वाला है? मुझे बुलाया गया था. सभी लोग वहां पर थे. मैं जरूर वहां जाता. इत्तेफ़ाक़ से मेरे वहां पहुंचने के पहले कार्यक्रम समाप्त हो गया था. यदि वो वहां अपनी बात रखते तो क्या मैं अपनी बात नहीं रख सकता? क्या हम अलग-अलग विचार के लोग एकसाथ बैठ नहीं सकते? अगर मैं अपनी बात नहीं रखूंगा तो आपको सहमत कैसे कराऊंगा?

सवाल: आप व्यक्तिगत तौर पर 'धर्म संसद' जैसे कार्यक्रमों में बैठ सकते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के तौर पर ऐसे कार्यक्रमों में जाने पर सवालिया निशान है. आपकी ही पार्टी एक बहुत बड़े नेता रहे जवाहर लाल नेहरू ने सार्वजनिक तौर पर धार्मिकता के प्रदर्शन से बचने की सलाह दी थी. राजेंद्र प्रसाद तक को उन्होंने ऐसे कार्यक्रमों में नहीं जाने को कहा था?

जवाब: एक बार किसी नेता ने दूसरे नेता से ऐसा कहा है तो वह कोई स्थायी लकीर नहीं है. हम अलग-अलग मंचों पर जाते हैं. धार्मिक मंचों में भी जाते हैं और सामाजिक मंचों में भी जाते रहते हैं. हम छोटे-छोटे आयोजनों में हमेशा आते -जाते हैं.

सवाल: आपकी पुलिस ने 'धर्म संसद' में केवल एक शख्स (कालीचरण महाराज) पर महात्मा गांधी के ख़िलाफ बयान को लेकर कार्रवाई की है. वैमनस्य फैलाने, सांप्रदायिक बातों और हिंदू राष्ट्र बनाने की बात पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

जवाब: चूंकि इस प्रकार की घटनाएं और आयोजन अलग-अलग राज्यों में हो रहे हैं. ऐसे आयोजन राज्यों तक ही सीमित नहीं, यह तो भारत सरकार की जिम्मेदारी बनती है. इसे लेकर भारत सरकार से सवाल पूछा जाना चाहिए. चाहे गृह मंत्री हों या प्रधानमंत्री, उनसे सवाल पूछा जाना चाहिए. उत्तराखंड में ऐसी घटना घटी, उसमें सुप्रीम कोर्ट को भी हस्तक्षेप करना पड़ा, उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसी नौबत नहीं आई.

सवाल: लेकिन कांग्रेस को तो एक मॉडल पेश करना है ना? राहुल गांधी देश के बंटवारे के खिलाफ बोल रहे हैं, लेकिन उनकी अपनी सरकारें कार्रवाई नहीं कर रही हैं तो लोग सवाल पूछेंगे ही. आपकी पुलिस ने इस मामले में स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लिया?

जवाब: देखिए, जिसके खिलाफ शिकायत हुई, उसकी विवेचना की गई. विवेचना में तथ्यों के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है. ऐसा नहीं हो सकता कि हर आयोजन का हम वीडियो रखें और देखते रहें कि उसमें क्या-क्या बोला जा रहा है. शिकायत हुई है, उस पर कार्रवाई की गई है. धार्मिक आयोजन तो हर शहर और गांव में होते हैं.

सवाल: ...पर गांधी जी के खिलाफ बयान देने के लिए कालीचरण महाराज के खिलाफ जरूर कार्रवाई हुई है, लेकिन बाकी लोगों के भड़काऊ भाषण पर तो कार्रवाई नहीं हुई?

जवाब: आप पूरा प्रकरण देख लीजिए ऐसा नहीं है. उसी अकेले आदमी ने सारी बातें की हैं. अगर आपको ऐसा लगता है तो छत्तीसगढ़ पुलिस की शिकायत कर दीजिए. ऐसा तो हो नहीं सकता कि मैं हर प्रकरण की जांच करता रहूं. हर थाने में 10 एफआईआर हो रही है तो मैं हर प्रकरण को देखता रहूं. ऐसा हो तो मुझे खाने और सोने का मौका भी नहीं मिलेगा. ऐसा कोई मुख्यमंत्री या गृहमंत्री नहीं कर सकता है.

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