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मणिपुर: कर्नल विप्लव त्रिपाठी से एक हफ़्ते पहले ही मिलकर लौटे थे उनके परिजन - प्रेस रिव्यू
मणिपुर में शनिवार को हुए उग्रवादी हमले में असम राइफल्स के पांच जवानों की मौत हो गई. इनमें से एक थे विप्लव त्रिपाठी, जिनका पूरा परिवार इस हमले में मारा गया.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने विप्लव के परिवार और उनकी पृष्ठभूमि को लेकर एक रिपोर्ट छापी है. जिसके मुताबिक़, कर्नल विप्लव त्रिपाठी के माता-पिता एक हफ्ते पहले उनसे मिलकर मणिपुर से लौटे थे.
80 वर्षीय सुभाष त्रिपाठी और 70 साल की आशा अपने बेटे, बहू और पोते के साथ दिवाली मनाने छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से मणिपुर पहुंचे थे. सात नवंबर को दोनों रायगढ़ वापस लौटे.
उनका परिवार इस इलाके का जाना-माना परिवार है. विप्लव के दादा किशोरी लाल त्रिपाठी भारतीय संविधान के ड्राफ़्ट समिति का हिस्सा थे, जबकि पिता सुभाष एक वरिष्ठ पत्रकार हैं और रायगढ़ स्थित एक क्षेत्रीय साप्ताहिक के संपादक हैं. उनकी मां आशा एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं.
विप्लव के दोस्त बताते हैं कि वह विनम्र स्वभाव के थे.
उनके चाचा राजेश पटनायक के मुताबिक़, विप्लव को दिवाली की छुट्टी नहीं मिल पाई थी. चूंकि उनके छोटे भाई अनय बतौर लेफ्टिनेंट कर्नल असम राइफल्स में ही हैं और मणिपुर में तैनात हैं, इसलिए सुभाष और आशा ने मणिपुर जाने का फ़ैसला किया था.
''शुक्रवार की रात, अनय एक ट्रेनिंग के लिए मणिपुर से महू जाते समय रायगढ़ भी आया था. शनिवार की दोपहर, वह मेरे साथ था, जब उन्हें यूनिट के अपने दोस्तों से मैसेज मिला कि उनके भाई और उनके परिवार की हत्या कर दी गई है."
मौत की ख़बर मिलते ही अनय वापस मणिपुर चले गए और कर्नल, उनकी पत्नी और बेटे के शवों को लेकर रायगढ़ वापस आएंगे.
दरअसल, विप्लव चेक पोस्ट का निरीक्षण करने के लिए गाड़ियों के काफिले के साथ निकले हुए थे. गाड़ी में उनका परिवार भी साथ था. कर्नल विप्लव जब चेक पोस्ट का निरीक्षण कर वापस लौट रहे थे उस वक़्त उन पर हमला किया गया और इस हादसे में उनकी पत्नी और बेटे की भी मौत हो गई.
कासगंज: कई दिनों बाद यूपी पुलिस ने दर्ज की अज्ञात पुलिसकर्मियों के नाम एफ़आईआर
इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कासगंज ज़िले के पुलिस थाने में 22 वर्षीय मुसलमान युवक की मौत के मामले में आख़िरकार शनिवार को यूपी पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की.
बीते कई दिनों से मृतक अल्ताफ़ का परिवार आरोप लगा रहा था कि ये मौत पुलिस हिसारत में हुई है, जहां एक नाबालिग लड़की की गुमशुदगी के मामले में उसे पूछताछ के लिए लाया गया था.
पुलिस ने अल्ताफ़ को एक परिवार की शिकायत पर पूछताछ के लिए थाने बुलाया था, शिकायत में उस पर 16 साल की लड़की के अपहरण का आरोप लगाया गया था.
पुलिस का कहना है कि एक नाबालिग लड़की के लापता होने के मामले में पूछताछ के लिए बुलाए गए युवक अल्ताफ़ ने थाना परिसर में बने शौचालय में आत्महत्या की है. वहीं युवक के परिजनों ने पुलिस पर पीट-पीट कर हत्या करने का आरोप लगाया है.
पुलिस ने अख़बार से कहा कि कासगंज में दर्ज प्राथमिकी में अज्ञात पुलिसकर्मियों का ज़िक्र है और बाद में नई शिकायत को नामों के साथ अपडेट किया जाएगा.
अल्ताफ़ के पिता चांद मियां की शिकायत में कहा गया है, ''मेरे बेटे को थाने में मार दिया गया है. बाथरूम में नल लगभग दो फीट (ऊंचा) है और मेरे बेटे की ऊंचाई 5 फीट से अधिक थी मैंने किसी अधिकारी के साथ कोई समझौता नहीं किया है. मुझे दबाव में पेपर पर अंगूठा लगाने के लिए कहा गया था. मैं अनुरोध करता हूं कि इस मामले में कार्रवाई की जाए.''
अल्ताफ़ घरों में टाइल लगाने का काम करते थे. उनके पिता चांद मियाँ का दावा है कि उन्होंने अपने बेटे को सोमवार शाम पुलिस को सौंपा था.
क्रिप्टो करेंसी को लेकर भ्रामक विज्ञापन बंद हों- केंद्र सरकार
द हिंदू में छपी ख़बर के मुताबिक़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आरबीआई के अधिकारियों, गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के साथ क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करने की संभावनाओं पर चर्चा के लिए एक बैठक की.
इस बैठक में "युवाओं को गुमराह करने के लिए बड़े-बड़े वादे और गैर-पारदर्शी विज्ञापनों" को रोकने के लिए एक सहमति बनी.
वरिष्ठ सरकारी सूत्रों ने अख़बार से कहा कि बैठक में माना गया कि अनियमित क्रिप्टो बाजारों को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फ़ंडिंग का रास्ता नहीं बनने दिया जा सकता है, बैठक में तय हुआ कि इस क्षेत्र की क़रीब से निगरानी करने के लिए सक्रिय कदम आवश्यक हैं.
एक सूत्र ने अख़बार को बताया, "इस बात पर भी सहमति बनी कि सरकार की ओर से इस क्षेत्र में उठाए गए कदम प्रगतिशील और दूरदर्शी होंगे."
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