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लखीमपुर हिंसा: बीजेपी में हलचल, 'साज़िश' या 'फैल चुका रायता' - प्रेस रिव्यू
लखीमपुर खीरी में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्रा के काफ़िले से कथित तौर पर हुई चार किसानों की मौत सहित आठ लोगों के मारे जाने के मामले को लेकर बीजेपी में बेचैनी बढ़ती जा रही है. पार्टी का एक धड़ा मानता है कि ये घटना 'सोची समझी साज़िश' है और इसके पीछे 'ख़ालिस्तानी लिंक' है.
विधानसभा चुनाव से पहले इस घटना ने पार्टी के भीतर हलचल पैदा कर दी है.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक लखीमपुर खीरी की घटना ने यूपी बीजेपी के प्रमुख नेताओं को बैकफ़ुट पर धकेल दिया है. वे चाहते हैं कि ये मामला जैसे तैसे ख़त्म हो.
अख़बार से योगी सरकार के एक कैबिनेट मंत्री ने बात करते हुए कहा कि 'रायता फैल गया है.'
वहीं एक दूसरे मंत्री ने शीर्ष नेतृत्व के इस मामले से निपटने के तरीके पर नाराज़गी जतायी और कहा, ''हमारा दोनों तरफ़ से नुकसान है. कार्यकर्ता भी मरा और सरकार भी कटघरे में है.''
'' राजनीतिक फ़ीडबैक को कभी तवज्जो नहीं दी गई, इस पर चर्चा ही नहीं होती. जब आप केवल नौकरशाहों से ही फ़ीडबैक लेते हैं तो यही होता है. ब्यूरोक्रेसी को इसका ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि ये मामला ज़िले में इतना बढ़ा हो जाएगा. ''
वर्तमान नेतृत्व में प्रतिकूल रवैये की राजनीतिक संस्कृति को प्रोत्साहित करने की शिकायत करते हुए उन्होंने कहा, ''ऐसी परिस्थितियों में फ़ालतू की बयानबाज़ी से बचा जाता है और संयम रखा जाता है, लेकिन क्या कहें?''
वह मिश्रा के उस भाषण के वीडियो की ओर इशारा करते हैं जिसे 25 सितंबर का बताया जा रहा है और माना जा रहा है कि इसने किसानों की नाराज़गी बढ़ाई.
वीडियो में मिश्रा कह रहे हैं- ''आप भी किसान हैं आप क्यों नहीं उतर गए आंदोलन में...अगर मैं उतर जाता तो उनको भागने का रास्ता नहीं मिलता. पीठ पीछे काम करने वाले 10-15 लोग यहां पर शोर मचाते हैं. क़ानून ग़लत होता तो फिर तो पूरे देश में आंदोलन फैल जाना चाहिए था. क्यों नहीं फैला 10-11 महीने हो गए. मैं ऐसे लोगों को कहना चाहता हूं कि सुधर जाओ नहीं तो सामना करो. आकर हम आपको सुधार देंगे दो मिनट लगेगा.''
लेकिन एक अन्य मंत्री ने कहा, '' मुझे नहीं लगता कि विरोध अन्य इलाकों में भी फैल रहा है, हमें थोड़ा संयम के साथ परिस्थिति को देखता चाहिए.''
इसके बीच बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने आगाह किया है कि 'संघर्ष करने वाले किसानों' के खिलाफ़ 'अपमानजनक' भाषा का उपयोग करना 'अनुचित और क्रूर' है और इससे 'उनकी प्रतिक्रिया और बढ़ सकती है जो इस समय बहुत शांतिपूर्ण है.'
कुछ घंटों में ज़करबर्ग को हुआ 6 बिलियन डॉलर क नुक़सान
मार्क ज़करबर्ग की व्यक्तिगत संपत्ति को महज़ कुछ घंटों के भीतर ही 6 बिलियन डॉलर का नुक़सान हुआ है और वह दुनिया के अमीरों की फ़ेहरिस्त में नीचे की ओर लुढ़क गए हैं.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस वित्तीय नुकसान के पीछे दो वजहें हैं. व्हिसिल ब्लोअर का फ़ेसबुक पर निशाना और इसके तमाम प्लेटफ़ॉर्म का सोमवार देर रात लगभग छह घंटों के लिए काम ना करना. इससे उन्हें ये नुक़सान हुआ है.
इसे फ़ेसबुक की सेवा में अब तक का सबसे लंबा आउटेज माना जा रहा है.
सोमवार को सोशल मीडिया दिग्गज के स्टॉक में 4.9% की गिरावट दर्ज की गई. और इसके सथ ही वह ब्लूमबर्ग बिलियनेर इंडेक्स में बिलगेट्स से नीचे पांचवें स्थान पर पहुंच गए.
सोमवार को ज़करबर्ग ने अपने करोड़ों यूज़र्स से फ़ेसबुक की सेवा में घंटों बाधा आने के कारण माफ़ी मांगते हुए ख़ेद प्रकट किया.
सोमवार देर रात से फ़ेसबुक और उसके स्वामित्व वाले व्हाटसएप और इंस्टाग्राम लगभग 6 घंटे तक ठप रहे. अभी सभी एप काम कर रहे हैं.
बच्चों की कोरोना वैक्सीनज़ाइकोव-डी पर क्यों अड़ी है बात?
कोरोना वैक्सीन ज़ाइकोव-डी को लेकर केंद्र सरकार और वैक्सीन निर्माता कंपनी के बीच बात बनती नज़र नहीं आ रही है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अहमदाबाद की कंपनी ज़ाइडस कैडिला ने इस वैक्सीन की क़ीमत 1900 रुपये कोट की है जिसे सरकार काफ़ी मंहगा मान रही है.
नाम ना छापने की शर्त पर इस मामले को क़रीब से समझने वाले एक शख़्स ने बताया है, ''हमें लगता है कि एक या दो सप्ताह में इस मामले पर कोई निष्कर्ष निकलेगा. अभी सारी बात क़ीमत पर आकर अटकी हुई है जिसे केंद्र सरकार के टीकाकरण योजना के लिहाज़ से काफ़ी मंहगा माना जा रहा है.''
ज़ाइकोव-डी पहली भारतीय वैक्सीन है जिसका इस्तेमाल बच्चों पर सुरक्षित और असरदार माना गया है. साथ ही ये एक डीएनए वेक्टर वैक्सीन है.
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