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नौदीप कौर कौन हैं जिनका मुद्दा विदेशी नेता भी सोशल मीडिया पर उठा रहे हैं?
- Author, सरबजीत सिंह धालीवाल
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी पंजाबी सेवा
"हमने अपने अधिकारों को हासिल करने के लिए लड़ना सीखा है. संघर्ष हमारे जीवन का हिस्सा रहा है. बचपन से हमें अपने जीवन के हर क़दम पर संघर्ष करना पड़ा है." ये कहना है हरियाणा पुलिस द्वारा गिरफ़्तार की गईं नौदीप कौर की बहन राजवीर कौर का.
हरियाणा के सोनीपत ज़िले की नौदीप कौर पिछले कई दिनों से जेल में हैं.
सामाजिक कार्यकर्ता नौदीप कौर पिछले कुछ समय से कुंडली इंडस्ट्रियल एरिया (केआईए) में काम करने वाले प्रवासी मज़दूरों के बकाये के भुगतान की माँग कर रही थीं.
हरियाणा पुलिस ने 12 जनवरी को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया.
नौदीप पर कथित तौर पर धमकाकर पैसे वसूलने का आरोप लगाया गया है और उन्हें ऐसा करने से रोक रहे पुलिसकर्मियों पर हमले करने का भी आरोप है.
वहीं दूसरी ओर नौदीप के परिवार वाले इन आरोपों को ग़लत बता रहे हैं.
इसके अलावा नौदीप की गिरफ़्तारी के विरोध में दुनिया भर में आवाज़ें उठ रही हैं.
भारत ही नहीं विदेशों में भी नौदीप कौर की गिरफ़्तारी पर लोग सवाल उठा रहे हैं.
अमेरिकी उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस की भतीजी मीना हैरिस ने सोशल मीडिया पर नौदीप की गिरफ़्तारी को लेकर सवाल उठाया है. मीना हैरिस ने पुलिस हिरासत में नौदीप कौर के साथ शारीरिक और यौन दुर्व्यवहार को लेकर ट्वीट किया है.
वहीं ब्रिटेन के सांसद तनमनजीत सिंह ने भी नौदीप के बारे में ट्वीट करते हुए उनकी गिरफ़्तारी की निंदा की है.
पारिवारिक पृष्ठभूमि
नौदीप पंजाब के मुक्तसर साहिब ज़िले के गंधार गाँव की हैं.
एक दलित परिवार में जन्मीं नौदीप ने 12वीं तक पढ़ाई की है जिसके बाद वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करना चाहती हैं.
वहीं उनकी बहन राजवीर कौर दिल्ली यूनिवर्सिटी से पाकिस्तानी-पंजाबी कविता साहित्य पर पीएचडी कर रही हैं.
पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे मे बात करते हुए राजवीर कौर ने बताया, "हम लोग ऐसे परिवार से हैं जहाँ गिने चुने बच्चे ही उच्च शिक्षा हासिल कर पाते हैं, क्योंकि उन्हें रोटी की चिंता ज़्यादा होती है. इसके बाद भी हम लोगों ने रोटी कमाने के संघर्ष के साथ पढ़ाई जारी रखी. संघर्ष अभी भी जारी है."
राजवीर कौर ने बताया कि उनकी चार बहनें और दो भाई हैं. उनके पिता तेलंगाना की एक फैक्ट्री में काम करते हैं, जबकि माँ गाँव में खेतों में मज़दूरी करती हैं.
राजवीर कौर के मुताबिक़, दोनों बहनें लंबे समय से दिल्ली में रह रही हैं.
नौदीप एक फैक्ट्री में काम करने के साथ-साथ मज़दूरों के कल्याण के लिए काम करने वाली एक संस्था से भी जुड़ी हुई हैं.
दिल्ली आने से पहले नौदीप पंजाब में खेतिहर मज़दूरों के लिए काम करने संस्था से जुड़ी हुई थीं.
राजवीर बताती हैं कि उनके माता पिता ने मज़दूरी करके भाई बहनों को पाला है. वहीं नौदीप ने काम करके अपनी शिक्षा के लिए पैसे दिए हैं.
राजवीर कौर के मुताबिक़, खेतों में मेहनत मज़दूरी करके कुछ पैसे बचाकर दोनों बहनों ने 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद प्राइवेट नौकरी करने के लिए दिल्ली आ गईं.
राजवीर कौर ने कहा, "जातिगत भेदभाव और सामाजिक उपेक्षा हम लोग बचपन से ही झेलते आये हैं. इस वजह से हम लोग घबराए नहीं हैं. गाँव में अभी भी हमारा कच्चा घर है. माँ अभी भी खेतों में काम करती हैं."
राजवीर ने यह भी बताया है कि पूरा परिवार नौदीप के साथ है.
नौदीप कौर जेल में क्यों हैं?
राजवीर कौर के दावे के अनुसार, उनकी बहन नौदीप कौर कुंडली इंडस्ट्रियल एरिया (केआईए) में मज़दूर के तौर पर काम करने के साथ-साथ प्रवासी मज़दूरों के हितों की आवाज़ उठाती आयी हैं.
नौदीप मज़दूर अधिकार संगठन की सदस्य हैं और बकाया भुगतान करने से इनकार करने वाली इंडस्ट्रियल यूनिटों के सामने धरना प्रदर्शन के आयोजन में भी सक्रिय रही हैं.
राजवीर ने बताया कि जब कृषि क़ानूनों के विरोध में किसानों के सिंघु बॉर्डर पर धरना प्रदर्शन की शुरुआत हुई, तो इंडस्ट्रियल यूनिट के मज़दूरों ने भी किसानों का साथ दिया.
राजवीर कौर ने बताया, "मेरी बहन को किसान आंदोलन के समर्थन के चलते नौकरी से निकाल दिया गया."
नौदीप पर पुलिस कार्रवाई के बारे में राजवीर कौर ने बताया कि "स्थानीय पुलिस ने कुंडली इंडस्ट्रियल एरिया में बकाए के भुगतान को लेकर किसी भी धरना प्रदर्शन को रोकने के लिए एक क्विक रिस्पांस टीम बनाई. 28 दिसंबर को मज़दूर अधिकार संगठन जब अपने बकाये की माँग कर धरना प्रदर्शन का आयोजन कर रही थी, तब क्विक रिस्पांस टीम ने धरना दे रहे लोगों पर हमला कर दिया और प्रदर्शनकारियों को हटा दिया. क्विक रिस्पांस टीम के सदस्यों पर कार्रवाई के लिए इसकी शिकायत सोनीपत के एसपी से की गई लेकिन हमें जवाब नहीं मिला."
राजवीर कौर के मुताबिक़, 12 जनवरी को नौदीप कुंडली इंडस्ट्रियल एरिया में मज़दूर अधिकार संगठन के अन्य सदस्यों के साथ धरना दे रही थीं, तब पुलिस ने आकर प्रोटेस्ट की जगह से गिरफ़्तार कर लिया.
राजवीर ने आरोप लगाया, "नौदीप को केवल पुरुष पुलिस अधिकारी उठाकर ले गए. हिरासत में लेने के बाद भी उसे पुरुष पुलिसकर्मी ने मारा पीटा है."
राजवीर कौर ने यह भी बताया कि नौदीप फ़िलहाल करनाल जेल में बंद है.
राजवीर के मुताबिक़, उनकी बहन के लिए दुनियाभर के लोगों ने आवाज़ उठायी है, ये एक अच्छी बात है क्योंकि अभी भी जेल में ढेरों लोग बंद हैं जिनके लिए आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं है.
राजवीर के मुताबिक़, नौदीप ने बताया कि जेल में उनके साथ कई महिलाएं हैं जिनके लिए क़ानूनी मदद करने वाला कोई नहीं है.
उन्होंने बताया कि उन्हें अभी तक नौदीप के ख़िलाफ़ हुई एफ़आईआर की कॉपी और उनकी मेडिकल रिपोर्ट नहीं मिली है.
वहीं दूसरी ओर सोनीपत पुलिस ने नौदीप कौर के मामले में अपना पक्ष रखा है.
सोनीपत के एसपी जश्नदीप सिंह रंधावा के मुताबिक़, नौदीप को तब गिरफ़्तार किया गया जब उन्होंने अपने साथियों के साथ एक फैक्टरी को घेर लिया था और पुलिस के वहाँ पहुँचने पर उन पर हमला कर दिया था, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे.
उन्होंने कहा, "नौदीप कौर को उसी वक़्त गिरफ़्तार किया गया था. उन्हें उसी दिन स्थानीय अदालत में पेश कर दिया गया था. उनके साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार और मारपीट नहीं हुई थी."
इस मामले की मीडिया कवरेज के बाद पंजाब राज अनुसूचित जाति आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव से मामले में दख़ल देने की अपील की है ताकि पीड़िता को जल्द से जल्द मदद मिल सके.
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