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एलेक्सी नवालनी: रूस पश्चिमी देशों से हुआ नाराज़, नवालनी को लेकर हो रहे हैं बड़े प्रदर्शन
रूस ने पश्चिमी देशों पर विपक्षी नेता एलेक्सी नवालनी के समर्थन में रैली करने के लिए उकसाने का आरोप लगाया है.
भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद शनिवार को हज़ारों की संख्या में लोग इन रैलियों में शामिल हुए. इन प्रदर्शनों पर नज़र रखने वालों का मानना है कि 3500 से ज़्यादा लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.
जबकि ब्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता ने दावा किया कि इन रैलियों में 'बेहद कम' लोगों ने हिस्सा लिया.
यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री प्रतिबंधों को बढ़ाने की माँग को लेकर सोमवार को मुलाक़ात करेंगे.
एस्तोनिया, लातविया और लिथुआनिया के विदेश मंत्रियों ' नवालनी की गिरफ़्तारी के लिए ज़िम्मेदार रूसी अधिकारियों के ख़िलाफ़ कड़े प्रतिबंधों की माँग कर रहे हैं.'
पोलैंड के राष्ट्रपति एंद्रेज़ डूडा ने भी नवालनी की गिरफ़्तारी के बाद यूरोपीयन यूनियन से अपील की है कि वह रूस पर प्रतिबंध बढ़ाए.
पुतिन के धुर विरोधी और आलोचक एलेक्सी नवालनी को एक सप्ताह पहले रूस लौटने पर गिरफ़्तार कर लिया गया था, इसके बाद उन्होंने विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया था.
उनके समर्थन में शनिवार को रूस के साइबेरिया, मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे 100 शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए.
'विशाल प्रदर्शन'
मॉस्को में दंगा पुलिस प्रदर्शनकारियों को पीटती और घसीटती दिखी. इन प्रदर्शनों पर नज़र रखने वालों के मुताबिक़ देशभर में विरोध प्रदर्शन का स्तर अप्रत्याशित था.
ख़ासकर राजधानी मॉस्को में क़रीब एक दशक का ये सबसे बड़ा प्रदर्शन था.
सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों को बसों पर सवार लोगों ने हाथ हिला कर अपना समर्थन दिया, तो वहीं कारों में बैठे लोगों ने हॉर्न बजाकर प्रदर्शन के प्रति अपना समर्थन प्रकट किया.
बढ़ते दबाव के बीच पुतिन के प्रवक्ता दीमित्रि पेसकोव ने अमेरीकी दूतावास के उस संदेश की आलोचना की है, जिसमें दूतावास ने मॉस्को स्थित अमेरिकियों को प्रदर्शन में दूर रहने की चेतावनी दी थी. रूस ने इसे 'घरेलू मामले में हस्तक्षेप' बताया है.
हालांकि समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ दूतावास का कहना है कि यह एक 'सामान्य और नियमित चेतावनी' है. नए बाइडन प्रशासन ने इससे पहले कहा था कि रूस को हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ देना चाहिए.
आरोप
इस बीच ब्रिटेन स्थित रूसी दूतावास ने भी पश्चिमी देशों पर प्रदर्शनों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है.
फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां येव ले द्रियन ने प्रदर्शन कर रहे लोगों की गिरफ़्तारी को 'अधिनायकवाद की ओर बढ़ने' जैसा बताया है और रूस पर प्रतिबंध बढ़ाने को कहा है.
बर्लिन से मॉस्को पहुँचते ही नवालनी को गिरफ़्तार कर लिया गया था. पिछले साल अगस्त में उन पर नर्व एजेंट से जानलेवा हमला किया गया था, जिसके बाद से ही जर्मनी में उनका इलाज चल रहा था.
जैसे ही वह अपने देश वापस आए, उन्हें हिरासत में ले लिया गया और इसके बाद उन्हें परोल के नियमों के उल्लंघन के मामले में दोषी क़रार दे दिया गया.
नवालनी का कहना है कि उनकी आवाज़ बंद करने के लिए ये सब किया जा रहा है.
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