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बिहार विधानसभा चुनाव: पहली वर्चुअल रैली में लालू-राबड़ी पर हमलावर नीतीश, तेजस्वी ने कहा निश्चय संवाद बनेगा निश्चित हार का कारण
- Author, नीरज प्रियदर्शी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए
"नई पीढ़ी के लोगों को पुरानी बातें बताइए, नहीं तो गड़बड़ लोगों के चक्कर में पड़ जाएगा तो जितना काम हुआ है सब बर्बाद हो जाएगा."
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को वर्चुअल रैली में बोल रहे थे. उनका इशारा 15 वर्षों के लालू-राबड़ी शासन की तरफ था.
निश्चय संवाद नाम से हुई इस वर्चुअल रैली के जरिए सत्ताधारी पार्टी जदयू ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपने चुनाव प्रचार अभियान की औपचारिक शुरुआत की.
पार्टी ने दावा कि कि उनकी वर्चुअल रैली से सोशल मीडिया और गांव-देहात, और कस्बों में एलईडी स्क्रीन और प्रोजेक्टर्स के ज़रिए क़रीब 30 लाख लोग जुड़े.
नीतीश कुमार ने अपने भाषण में बाढ़ पीड़ितों और कोरोना महामारी से निपटने में सरकार के कदमों के बारे में बढ़-चढ़ कर बात की.
लेकिन बीच बीच में विपक्ष पर वार करने से नहीं चूक रहे थे, "पति-पत्नी (लालू-राबड़ी) के राज में क्या-क्या हुआ, ये कौन नहीं जानता."
बिहार के मुख्यमंत्री ने राज्य में कोरोना की टेस्टिंग को बढ़ाकर डेढ़ लाख करने से लेकर बाढ़ पीड़ितों के लिए किए गए कामों की गिनाया.
नीतिश ने कहा- कोरोना के समय बाहर फँसे लोगों से हमने बात की और उनका ख्याल रखा. लेकिन हमें प्रचार करने की आदत नहीं है.
लेकिन वो टीवी चैनलों और अख़बारों के पहले पन्ने पर छाई सुशांत सिंह राजपूत की मौत का ज़िक्र करना बिल्कुल नहीं भूले. उन्होंने कहा, "सुशांत सिंह राजपूत के परिवार को न्याय ज़रूर मिलेगा, इसका हमें भरोसा है."
राज्य में उनकी सहयोगी भाजपा ने भी सुशांत सिंह राजपूत को अपनी पार्टी की प्रचार सामग्री पर जगह दी है.
भाषण के बीच में तेजस्वी की चुटकी
रैली की शुरुआत से पहले ही विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने फ़ेसबुक पर पोस्ट करके मुख्यमंत्री से 10 सवाल किए और लिखा, "आशा और उम्मीद करता हूँ कि माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथ्यों के आधार पर पूछे गए मेरे सभी तार्किक सवालों का जवाब अवश्य देंगे. अगर जवाब नहीं देते हैं तो उनकी सारी बातें ढकोसला व कोरी बकवास होंगी और उन्हें अपनी विफलताएँ स्वीकार करनी होंगी."
नीतीश की वर्चुअल रैली के बाद हमने तेजस्वी यादव से बात की और पूछा कि क्या उन्हें अपने सारे सवालों के जवाब मिल गए?
तेजस्वी ने बीबीसी से कहा, "आज जेडीयू का निश्चय संवाद, निश्चित हार का संवाद बन गया. इस वर्चुअल रैली को लेकर जितना शोरगुल था, ये उतनी ही फ़्लॉप रही. 26 लाख लिंक भेजने के दावे थे लेकिन 10 हज़ार लोगों ने भी नहीं देखा. मुख्यमंत्री के भाषण में निराशा का भाव था."
तेजस्वी ने सीएम पर हमला करते हुए कहा कि उन्होंने 15 वर्षों में युवाओं को काल्पनिक और बनावटी इतिहास का झुनझुना पकड़वाया है लेकिन अब युवा वर्ग उनके खोखले दावों से परिचित हो चुका है और इस चुनाव में उनके विरुद्ध वोट करेगा.
जदयू से आर-पार के मूड में लोजपा
नीतीश को सिर्फ़ विपक्ष से ही नहीं निपटना है. जब वे रैली में बोल रहे थे उसी समय एनडीए में उनकी सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी उन्हीं के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने की रणनीति बनाती लग रही थी.
राम विलास पासवान की पार्टी ने सोमवार को दिल्ली में लोजपा के संसदीय बोर्ड की बैठक, इसी मुद्दे पर बुलाई गई थी कि जदयू के साथ मिलकर चुनाव लड़ा जाए या ख़िलाफ़!
राज्य में कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा इसपर अब तक बात साफ़ नहीं हुई है. एलजेपी के भीतर इस बात को लेकर नाराज़गी है और पिछले कुछ दिनों से लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान, नीतीश सरकार पर हमलावर हैं.
लोजपा के संसदीय बोर्ड की बैठक ख़त्म होने के बाद पार्टी प्रवक्ता अशरफ अंसारी ने बीबीसी को बताया, "संसदीय बोर्ड के सभी सदस्यों ने इस बात पर सहमति जताई है कि पार्टी 143 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़े. इसके लिए उम्मीदवारों की सूची तैयार कर शीघ्र ही संसदीय बोर्ड को सौंपना है. हमारी पूरी तैयारी है. अंतिम निर्णय के लिए अध्यक्ष महोदय को अधिकृत किया गया है. वे अपना निर्णय जल्द ही बता देंगे."
लोजपा और जदयू के बीच यह खींचतान पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के एनडीए में शामिल होने के बाद से ज़्यादा बढ़ गई है.
पार्टी के नेता पहले ही यह बयान दे चुके हैं कि वे भाजपा से जुड़कर एनडीए में तो बने रहेंगे मगर जदयू और मांझी की पार्टी जहां-जहां से चुनाव लड़ेगी वे उनके ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगे.
कांग्रेस अभी चुनाव नहीं चाहती लेकिन प्रचार शुरू
जदयू की ही तरह कांग्रेस ने भी सोमवार से अपने चुनावी प्रचार अभियान की शुरुआत चंपारण में बिहार क्रांति महासम्मेलन नाम की वर्चुअल रैली से की. पार्टी ने हर ज़िले में इस तरह की रैलियाँ करने की योजना बनाई है. जिसमें न केवल ज़िलों के प्रतिनिधि बल्कि राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर के नेता भी भाग लेंगे.
बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा कहते हैं, "चंपारण की रैली से एक लाख से अधिक लोग जुड़े. फिलहाल हमने 19 ज़िलों के लिए वर्चुअल रैली की योजना बनाई है. उसी दौरान बचे 19 ज़िलों का शेड्यूल भी तय कर लिया जाए. आखिर में राहुल गांधी हमारे साथ जुड़ेंगे और बिहार के सभी लोगों से बात करेंगे.
मदन मोहन झा के मुताबिक, "कोरोना और बाढ़ के कारण जिस तरह की परिस्थितियां इस वक्त बिहार में बनी हैं, उसे देखते हुए हमारी पहली मांग है कि चुनाव को टाल दिया जाए. लेकिन ऐसा लगता है कि आयोग और सरकार को इस बात का कोई फ़र्क नहीं पड़ता इसलिए वे येन-केन-प्रकारेण चुनाव करा लेना चाहते हैं. अब जबकि उन्होंने तय ही कर लिया है कि चुनाव हो तो हम भी पीछे कैसे हट सकते हैं."
मुख्यमंत्री की वर्चुअल रैली मदन मोहन झा कहते हैं, "नीतीश कुमार झूठ का पुलिंदा हैं. वे 15 सालों से राज कर रहे हैं और जब काम करने की बात आ रही है तो कहते हैं जनवरी से होगा, अप्रैल से होगा. अभी तो चुनाव भी नहीं हुआ, फिर वे किस आधार पर यह सब कह रहे हैं."
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर चल रही सियासी गतिविधियों में सबसे महत्वपूर्ण है भाजपा का चुप्पी. एनडीए में उनकी सहयोगी जदयू और लोजपा आपस में लड़ रहे हैं लेकिन भाजपा किसी के बारे में कुछ नहीं कह रही.
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