राजनाथ सिंह की चीन के रक्षा मंत्री से मुलाक़ात, तनाव कम करने पर क्या हुई बात

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मॉस्को में चार सितंबर को चीन के रक्षा मंत्री वेई फ़ेंघे से मुलाक़ात की.

दोनों देशों के बीच सीमा पर मौजूदा तनाव के मद्देनज़र भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीनी नेता से कहा है कि सीमा पर स्थिति को सामान्य रखने के लिए भारतीय सैनिकों का रवैया ज़िम्मेदारी भरा रहा है.

साथ ही राजनाथ सिंह ने यह भी कहा है कि, 'अपनी संप्रभुता और सीमा की रक्षा के लिए हमारी प्रतिबद्धता पर भी किसी को संदेह नहीं होना चाहिए.'

इतना ही नहीं राजनाथ सिंह ने यह भी कहा, "लाइन ऑफ़ कंट्रोल के नज़दीक बड़ी संख्या में चीन के सैनिकों की तैनाती और उनकी गतिविधियां और उनका आक्रामक तौर-तरीक़ा, दोनों देशों के बीच बनी सहमति का उल्लंघन है."

भारतीय रक्षा मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने इलाक़े में शांति स्थापित करने पर सहमति जताई है और यह दोनों देशों के आपसी संबंधों को बढ़ाने के लिए यह ज़रूरी है और इसके लिए किसी मतभेद को विवाद तक नहीं बढ़ाना है.

राजनाथ सिंह ने चीनी रक्षा मंत्री से यह भी कहा है कि चीन को भारत के साथ मिलकर तनाव वाली स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य बनाना होगा और इसके लिए पैंगोंग त्सो लेक के अलावा सीमा पर सैन्य मौजूदगी को कम करना होगा.

भारतीय रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति को समझदारी से संभाला जाना चाहिए और किसी भी पक्ष को आगे ऐसी कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए जो स्थिति को जटिल बनाए.

चीन के रक्षा मंत्री ने क्या कहा

वहीं चीन के अख़बार साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की ख़बर के हवाले से लिखा है कि पिछले महीनों सीमा पर हुए तनाव के लिए चीन ने भारत को ज़िम्मेदार ठहराया है और चीन के रक्षा मंत्री ने भारतीय रक्षा मंत्री से तनाव कम करने की अपील की है.

दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच ये बातचीत क़रीब दो घंटे तक चली. इस बातचीत में चीन के रक्षा मंत्री वेई फ़ेंघे ने कथित तौर पर कहा है, "सीमा पर मौजूदा तनाव की वजह और सच्चाई स्पष्ट है. इसकी पूरी ज़िम्मेदारी भारत की है."

वेई फ़ेंघे ने यह भी कहा, "चीन अपने क्षेत्र की एक इंच ज़मीन नहीं छोड़ सकता. राष्ट्रीय संप्रभुता और अपनी सीमा की रक्षा के लिए चीन की सेना पूरी तरह से प्रतिबद्ध, सक्षम और निश्चिंत है."

उन्होंने यह भी उम्मीद जताई है कि इलाक़े में शांति स्थापित रखने के लिए भारत तनाव को बढ़ावा नहीं देगा. उन्होंने कहा है कि दोनों देशों में शीर्ष स्तर पर इसके लिए सहमति बनी है और भारत को ना तो तनाव को बढ़ावा देना चाहिए और न ही ग़लत तथ्यों का प्रचार करना चाहिए.

भारत और चीनी सैनिकों के बीच गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद यह पहला मौक़ा है जब चीन और भारत के रानजीतिक नेतृत्व स्तर पर आमने-सामने कोई बातचीत हुई है.

14-15 जून को हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिकों की मौत हुई थी.

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