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सचिन पायलट की नाराज़गी ख़त्म, शिकायतों की जाँच के लिए बनी कमेटी: आज की बड़ी ख़बरें
राजस्थान में कांग्रेस सरकार पर मंडराया संकट फ़िलहाल थम गया है.
सचिन पायलट की नाराज़गी ख़त्म हो गई है और उन्होंने पार्टी और सरकार के हित में काम करने के लिए कहा है.
मीडिया से बातचीत करते हुए सचिन पायलट ने कहा, "मुझे किसी पद की कोई लालच नहीं है, और पार्टी पद देती है तो पार्टी पद वापस भी ले सकती है. मैं अपने स्वाभिमान को बचाए रखना चाहता था. मैंने 18-20 साल तक पार्टी में योगदान दिया है. हमने हमेशा कोशिश की है कि उनकी भागीदारी भी सुनिश्चित करुँ, जिन्होंने सरकार बनाने में काफ़ी मेहनत की थी."
सचिन ने कहा कि उन्हें हमेशा लगता था कि पार्टी के हित में कुछ चीज़ों का उठाया जाना बहुत ज़रूरी था और वे सभी पूरी तरह कुछ सिद्धांतों पर आधारित थे.
अशोक गहलोत सरकार के ख़िलाफ़ बग़ावत पर उतरे सचिन पायलट की नाराज़गी ख़त्म होने का सिलसिला शुरू हुआ जब उन्होंने सोमवार को राहुल गांधी से मुलाक़ात की.
कहा जा रहा है कि इस मुलाक़ात में उनके साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं.
इस मुलाक़ात के बाद सचिन पायलट ने अपने समर्थक विधायकों के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, केसी वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी से मुलाक़ात की.
इन मुलाक़ातों के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी पार्टी के एक बयान में कहा गया कि सचिन पायलट ने इस मुलाक़ात में खुलकर अपनी चिंताओं और शिकायतों के बारे में बताया.
पायलट ने साथ ही कांग्रेस और राजस्थान में कांग्रेस सरकार के हित में काम करने का संकल्प जताया.
लेकिन सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों की शिकायतों को सुनने और उनका हल निकालने के लिए सोनिया गांधी ने तीन सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया है.
इस कमेटी में अहमद पटेल, केसी वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी को रखा गया है.
आख़िरकार कांग्रेस सचिन पायलट को मनाने में कामयाब हो गई है और 14 अगस्त को शुरू होने वाले राजस्थान विधानसभा सत्र से पहले सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायक, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ मिलकर काम करेंगे.
अशोक गहलोत के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाले सचिन पायलट के साथ क़रीब 18 विधायक थे.
राज्य सरकार ने उनपर सरकार गिराने की साज़िश रचने का आरोप लगाया था जिससे सचिन पायलट ख़ासे नाराज़ हुए थे और उन्होंने अपने समर्थकों के साथ बग़ावत कर दी थी, जिसके बाद कांग्रेस ने सचिन पायलट से राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष का पद छीन लिया था.
रिया चक्रवर्ती ने फिर लगाई सुप्रीम कोर्ट में याचिका, मीडिया ट्रायल का आरोप
सुशांत सिंह राजपूत मामले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती ने नयी याचिका लगाई है जिसमें उन्होंने इस मामले में मीडिया ट्रॉयल किए जाने की शिकायत दर्ज कराई है.
रिया चक्रवर्ती की याचिका के मुताबिक मीडिया ट्रायल में उन्हें सुशांत सिंह राजपूत की मौत के लिए दोषी तक ठहराया जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल अपनी याचिका में रिया चक्रवर्ती ने यह भी कहा है कि इस मामले को जिस तरह से सनसनीखेज़ बनाया जा रहा है उससे उनकी निजता का हनन तो हो ही रहा है साथ में वह काफ़ी ज़्यादा तनाव भी महसूस कर रही हैं.
रिया चक्रवर्ती ने अपनी याचिका में 2जी घोटाले और आरुषी तलवार हत्याकांड में इसी तरह के मीडिया ट्रायल होने का जिक्र करते हुए कहा है कि मीडिया में जिन लोगों को दोषी ठहराया गया वो जांच के बाद निर्दोष साबित हुए.
प्रशांत भूषण के खेद को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराया, जारी रहेगी जाँच
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2009 के एक मामले में वकील प्रशांत भूषण के ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना की कार्यवाही जारी रखने का फ़ैसला किया है. प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट को एक लिखित बयान में खेद जताने की बात कही थी. लेकिन अदालत ने इसे ठुकरा दिया.
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख़ 17 अगस्त तय की है. इस खंडपीठ की अगुआई जस्टिस अरुण मिश्रा कर रहे हैं.
प्रशांत भूषण ने वर्ष 2009 में तहलका पत्रिका को दिए इंटरव्यू में आरोप लगाया था कि भारत के पिछले 16 मुख्य न्यायाधीशों में आधे भ्रष्ट थे.
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा- जजों को भ्रष्ट कहना अवमानना है या नहीं, इस पर सुनवाई की आवश्यकता है.
चार अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की थी और अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था. सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण और तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल ने भी बयान दिया था.
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अवमानना के बीच एक पतली रेखा है. जजों ने कहा है कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार और एक संस्था के रूप में जजों की गरिमा की रक्षा की ज़रूरत को संतुलित करना चाहते हैं.
दूसरी ओर वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि भ्रष्टाचार के उनके आरोप में किसी वित्तीय भ्रष्टाचार की बात नहीं थी बल्कि उचित व्यवहार के अभाव की बात थी. उन्होंने कहा कि अगर उनके बयान से जजों और उनके परिजनों को चोट पहुँची है, तो वे अपने बयान पर खेद व्यक्त करते हैं.
तरुण तेजपाल ने भी इस पर माफ़ी मांगी थी. सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण और तरुण तेजपाल के ख़िलाफ़ वर्ष 2009 में अवमानना का नोटिस जारी किया था.
इस साल 22 जुलाई को भी इसी बेंच ने प्रशांत भूषण के दो विवादित ट्वीट्स पर ख़ुद से संज्ञान लेते हुए उन्हें नोटिस जारी किया था. अदालत का कहना था कि शुरुआती तौर पर प्रशांत भूषण के इन ट्वीट्स से न्याय व्यवस्था का अपमान होता है.
इसके जवाब में प्रशांत भूषण ने कहा था कि विचारों की स्वतंत्रता अदालत की अवमानना नहीं हो सकती.
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