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सचिन पायलट से अब भी बातचीत को तैयार कांग्रेस पार्टी - प्रेस रिव्यू
द हिंदू अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि कांग्रेस पार्टी सचिन पायलट के साथ 'बातचीत के सभी रास्ते' खुले रखना चाहती है और पार्टी ने सचिन पायलट से कहा है कि अगर वे पार्टी में वापिस लौटते हैं तो उनकी बग़ावत की बात को भूला दिया जाएगा.
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि भले ही बाग़ी नेता सचिन पायलट राजनीतिक संकट को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट पहुँच गए हैं, लेकिन उन्हें पार्टी में रखने को लेकर कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के विचार खुले हैं.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम फ़ोन के ज़रिये सचिन पायलट के संपर्क में रहे हैं, दोनों नेताओं की बात हुई है और पी चिदंबरम ने पायलट से कहा है कि "वे पार्टी में बातचीत के इस अवसर को हाथ से ना जाने दें."
अख़बार ने कांग्रेस नेता के हवाले से अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि "राजस्थान हाई कोर्ट में जिन वकीलों को सचिन पायलट ने खड़ा किया है, उनका चुनाव यह साफ़ बताता है कि वे किन लोगों के संपर्क में हैं."
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के मौजूदा सीमा विवाद पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसके अनुसार "भारतीय सेना अगले 10 दिनों तक चीनी सैनिकों पर नज़र रखेगी और इस बात की पुष्टि करेगी कि वो वाक़ई पीछे हट रही है."
अख़बार के अनुसार, इसके बाद ही इस क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए होने वाली अगली सैन्य स्तर की बातचीत की जाएगी.
अब तक चार चरण की बातचीत हो चुकी है. पाँचवें चरण की बातचीत जो इस महीने के पहले हफ़्ते में शुरू हुई, उसमें सफ़लता मिलने की उम्मीद जताई गई है.
अख़बार ने लिखा है कि बातचीत के ज़रिये सिर्फ़ गलवान घाटी के पट्रोलिंग पोस्ट पीपी-14 में ही पूर्ण रूप से सेनाएं पीछे हट पाई हैं और वहाँ अब टकराव की स्थिति नहीं है.
वहीं आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवाणे लेह हवाई अड्डे पर पहुंचे.
रक्षा मंत्री दो दिवसीय के लद्दाख और जम्मू और कश्मीर के दौरे पर हैं और सीमा के फॉर्वर्ड इलाक़ों का दौरा करने वाले हैं. इस दौरान वो सेना के अधिकारियों से मुलाक़ात भी करेंगे.
1 सितंबर तक भारत में हो सकते हैं कोरोना के 35 लाख मामले: आईआईएस
भारत दुनिया में ऐसा तीसरा देश बन गया है जहाँ कोरोना संक्रमण के कुल मामलों की संख्या दस लाख से अधिक हो गई है. हालांकि, राहत की बात ये है कि मृत्युदर में लगातार कमी आ रही है.
पिछले पाँच दिनों से, कोरोना संक्रमण के हर रोज़ औसतन 25 हज़ार से अधिक मामले आ रहे हैं.
इस बीच बेंगलुरु स्थित, देश के प्रतिष्ठित संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस ने कोरोना संक्रमण को लेकर हैरान कर देने वाले अनुमान जताये हैं.
द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान ने अपने अध्ययन में पाया है कि "भारत में 1 सितंबर तक कोरोना के 35 लाख केस हो सकते हैं. इस हिसाब से अगले डेढ़ महीने के दौरान भारत में कोरोना के 26 लाख नए मामले सामने आ सकते हैं और 1 सितंबर तक भारत में कोरोना संक्रमण के एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर क़रीब 10 लाख हो सकती है."
आईआईएस के मुताबिक़, "1 नवंबर तक भारत में 1.2 करोड़ लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकते हैं. अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा तो अगले साल की पहली जनवरी तक भारत में ख़तरनाक कोरोना वायरस से 10 लाख लोगों की जान जा सकती है."
बिहार चुनाव: 65 साल से अधिक आयु के मतदाताओं को डाक मत की सुविधा नहीं
निर्वाचन आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव और निकट भविष्य में होने वाले उप-चुनावों के दौरान 65 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं को डाक मत (पोस्टल बैलट) की सुविधा नहीं देने का निर्णय लिया है.
लगभग सभी बड़े अख़बारों ने इस ख़बर को प्रकाशित किया है.
हिन्दुस्तान टाइम्स अख़बार के अनुसार, आयोग ने कर्मचारियों, साजो-सामान संबंधी बाधाओं और कोविड-19 के सुरक्षा नियमों के मद्देनजर यह निर्णय लिया है. हालांकि, आयोग ने एक बयान में कहा कि 80 वर्ष से अधिक आयु वाले मतदाताओं, दिव्यांग मतदाताओं और आवश्यक सेवाओं में कार्यरत मतदाताओं के साथ ही कोविड-19 संक्रमित अथवा पृथक-वास में रहने वाले मतदाताओं को चुनाव में वैकल्पिक पोस्टल बैलट की सुविधा प्रदान की जाएगी.
पिछले साल अक्तूबर में क़ानून मंत्रालय ने नियमों में संशोधन कर लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान 80 वर्ष और इससे अधिक उम्र वाले मतदाताओं और दिव्यांग मतदाताओं को पोस्टल बैलट की सुविधा का विकल्प चुनने की अनुमति प्रदान की थी.
हालांकि, निर्वाचन आयोग के अनुरोध पर इस साल जून में मंत्रालय ने नियमों में बदलाव किया था और 65 वर्ष अथवा इससे अधिक आयु वाले मतदाताओं को भी पोस्टल बैलट की सुविधा का विकल्प चुनने की अनुमति दी गई थी.
हाल ही में कांग्रेस, माकपा और राजद समेत कुछ विपक्षी दलों ने 65 वर्ष और इससे अधिक आयु वाले मतदाताओं को डाक मत की सुविधा प्रदान किये जाने पर सवाल खड़ा किया था और दावा किया था कि ऐसा करने से पहले उनसे सलाह-मशविरा नहीं किया गया.
उन्होंने ये आरोप भी लगाया था कि इससे ऐसे वोटों में हेरा-फेरी हो सकती है और मतदान प्रक्रिया को बाधित किया जा सकता है.
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