कोरोना वायरस: 9 अस्पतालों के धक्के खाए, आख़िर में हुई मौत
इमेज कैप्शन, पी. रोहिता....में
Author, दीप्ति बथिनी
पदनाम, बीबीसी तेलुगू
"वो सांस लेने की कोशिशें कर रही थी. वो रो रही थी. वो जानती थी कि सब ख़त्म हो चुका है. वो मर गई और हमारी कोई मदद करने नहीं आया. हम 9 अस्पतालों में गए और कोई भी हमारी मदद करने नहीं आया."
पी. श्रीकांत 17 जून की उस मनहूस सुबह को याद करते हैं जब उन्होंने अपनी 41 वर्षीया पी. रोहिता को खो दिया था.
रोहिता और श्रीकांत हैदराबाद में अपनी 17 वर्षीया बेटी और 14 साल की बेटी के साथ रहते थे. श्रीकांत ने बताया कि उनकी पत्नी को तीन दिनों से बुख़ार था.
वो कहते हैं,"हम एक नज़दीकी अस्पताल गए, उन्होंने दवाई दी और कहा कि यह एक वायरल बुख़ार है. उनका बुख़ार कम हुआ लेकिन उन्हें खांसी थी. उन्हें एक कफ़ सिरप दी गई लेकिन 16 तारीख़ की आधी रात को उन्हें बेचैनी होने लगी. उन्हें सांस लेने में समस्या हो रही थी. उन्होंने मुझे अस्पताल ले जाने के लिए कहा."
श्रीकांत ने कहा कि यह एक दुख भरी रात की शुरुआत थी जिसके बारे में पता नहीं था कि क्या होने जा रहा है.
वो अपनी पत्नी रोहिता को कार से सनशाइन अस्पताल लेकर गए.
इमेज कैप्शन, श्रीकांत अपनी पत्नी को 9 अस्पतालों में लेकर गए
कुर्सी पर बैठाकर दी गई ऑक्सीजन
श्रीकांत ने बताया, "जैसे ही हम अस्पताल के दरवाज़े पर पहुंचे तो वहां खड़े चपरासी ने हमें चले जाने के लिए कहा. मैंने उनसे कहा कि यह इमर्जेंसी है. हम अंदर गए, इसके बाद मेरी पत्नी को सांस लेने में दिक़्क़त होनी शुरू हो गई. मेरी पत्नी को डॉक्टर ने देखने के बाद कहा कि उनके पास बेड नहीं हैं. मैंने उनसे प्रार्थना की कि वो उनकी सांस की समस्या के लिए कम से कम शुरुआती इलाज दें. उन्होंने कुछ मिनट ऑक्सीजन देने की बात कही लेकिन यह भी शर्त रखी कि हम जल्द ही चले जाएं."
उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी को एक गंदे कमरे में ऑक्सीजन दी गई जहां उन्हें कुर्सी पर बैठाया गया.
कोई और विकल्प न होने पर श्रीकांत अपनी पत्नी को अपोलो अस्पताल लेकर गए. इस अस्पताल में भी श्रीकांत को ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने कहा कि उनकी पत्नी में कोविड-19 के लक्षण हैं और उनके पास कोई बेड नहीं है.
उन्होंने कहा, "वे लगातार कहते रहे कि मेरी पत्नी की हालत ख़राब हो रही है और वो उन्हें ले जाएँ. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. मैं एक बड़े निजी अस्पताल के इमर्जेंसी वॉर्ड के पास खड़ा था और बिना किसी कोविड टेस्ट के वे कैसे कह सकते हैं कि मेरी पत्नी को कोरोना है? बहुत प्रार्थना के बाद उन्होंने कुछ देर के लिए ऑक्सीजन देने के लिए कहा और कहा कि इसके बाद हमें जाना होगा."
वीडियो कैप्शन, कोरोना से बढ़ी चिंता के बीच एक अच्छी ख़बर भी आई है.
इसके बाद वो अपनी पत्नी को एक अन्य निजी अस्पताल विरिंची लेकर गए. वहां पर भी सुरक्षा गार्ड ने उन्हें अंदर आने की अनुमति नहीं दी थी और कहा कि उनके पास स्टाफ़ या बेड नहीं है.
इसके बाद उन्हें केयर अस्पताल ले जाया गया जहां पर उन्हें प्राथमिक उपचार देने के बाद अगले अस्पताल जाने के लिए कहा गया.
इसके बाद श्रीकांत की कार का पेट्रोल ख़त्म हो गया और उन्होंने 108 एंबुलेंस को फ़ोन किया.
उन्होंने बताया, "कॉल सेंटर में मौजूद व्यक्ति ने कहा कि वो निजी अस्पताल में हमें लेने नहीं आ सकते. इसके बाद मैंने एक निजी एंबुलेंस बुलाई जो मेरी पत्नी को सरकारी अस्पताल लेकर गई."
जिस तरह से निजी अस्पताल कोविड के डर के कारण श्रीकांत की पत्नी को भर्ती करने से मना कर रहे थे तो उन्हें लगा कि उनकी पत्नी को सरकारी अस्पताल में इलाज मिल पाएगा. वो उन्हें किंग कोटी अस्पताल लेकर गए जो कोविड सैंपल कलेक्शन के लिए बनाया गया अस्पताल है.
उन्होंने कहा कि उन्हें वहां पर भी सुरक्षा गार्ड ने रोक लिया था.
श्रीकांत ने कहा, "तब तक मैं अपना सब्र खो चुका था और मेरी पत्नी की तबीयत बिगड़ती जा रही थी. मैंने ग़ुस्से में गार्ड को फ़टकार लगाई और अस्पताल के अंदर घुस गया. ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने कहा कि उनके पास बेड नहीं हैं और मुझे इन्हें एक बड़े अस्पताल में ले जाना चाहिए. मैं उनसे बहस में अपना समय ख़राब नहीं करना चाहता था. मैं अपनी पत्नी को उस्मानिया अस्पताल लेकर गया."
उन्होंने बताया, "अस्पताल में कोई हमसे यह तक नहीं पूछ रहा था कि हम यहाँ क्यों आए हैं. मैं अपनी पत्नी को अंदर ले जाने के लिए स्ट्रेचर या व्हीलचेयर ढूंढ रहा था. मुझे एक व्हीलचेयर मिली जिसमें पहिया नहीं था. मैं जब वो लेने लगा तो एक महिला कर्मचारी ने मुझे उसके लिए पैसे जमा करने को कहा. कार में तेल भरवाने के लिए मैंने अपना पर्स अपने रिश्तेदार को दे दिया था जो अस्पताल पहुंचने ही वाला था यह बात मैं उस कर्मचारी को बताता रहा लेकिन वो सिर्फ़ पैसा जमा करने के लिए कहती रहीं."
"उनको मैंने अपना फ़ोन दे दिया और व्हीलचेयर लेकर मैं अपनी पत्नी को वार्ड में ले गया. उनको मैंने ख़ुद ऑक्सीजन दिया. बहुत देर के बाद एक डॉक्टर आया और उसने टेस्ट की लिस्ट दे दी. इसके बाद भी मैंने टेस्ट के लिए अपना फ़ोन जमा किया. इसके बाद मैं टेस्टिंग रूम में गया जहां ख़ून के कतरे चादरों पर पड़े थे और खाना ज़मीन पर बिखरा था लेकिन मेरा ध्यान इस पर था कि कैसे इसे जल्द से जल्द निपटाऊं."
"टेस्ट के बाद मैं ड्यूटी डॉक्टर के पास गया लेकिन तब तक मेरी पत्नी का पल्स रेट गिरने लगा था. डॉक्टर अपने सीनियर से बात करने गए और वापस आने के बाद उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी के लिए बेड नहीं है और मुझे अपनी पत्नी को दूसरे अस्पताल ले जाना चाहिए."
इमेज कैप्शन, श्रीकांत का परिवार
स्ट्रेचर पर छोड़ दिया गया अकेले
श्रीकांत कहते हैं कि जब उन्होंने यह सुना तो उनका दिल बैठा जा रहा था. उनके पास अपनी पत्नी का इलाज कराने के लिए पैसा था लेकिन कोई उनकी पत्नी को इलाज नहीं देना चाह रहा था.
इसके बाद उन्होंने अपने परिचितों को अस्पताल में जगह के लिए फ़ोन कॉल करना शुरू किया. उन्होंने एक परिचित को फ़ोन कॉल किया जो एक स्वास्थ्य कर्मी भी हैं उन्होंने एक निजी अस्पताल में जाने को कहा जहां पर बेड और वेंटिलेटर भी थे.
उन्होंने कहा, "मैंने अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचा. वहां मेरी पत्नी को दवाइयां देनी शुरू की गईं लेकिन कुछ देरे के बाद उन्होंने कहा कि वो उनका इलाज नहीं कर सकते क्योंकि उनमें कोविड के लक्षण हैं. काफ़ी बहस के बाद उन्होंने सीटी स्कैन करने के लिए कहा. फिर मेरी पत्नी को स्कैन के लिए टेस्टिंग रूम में ले जाया गया. लेकिन वो आधे घंटे के बाद भी कमरे से बाहर नहीं आईं."
"इसके बाद मैं कमरे में यह देखने गया कि देर क्यों हो रही है. वो बहुत डरावना लम्हा था. मैंने देखा कि मेरी पत्नी अकेले स्ट्रेचर पर लेटी हुई है और वहां कोई कर्मचारी नहीं है. उसे उनकी क़िस्मत पर वहां छोड़ दिया गया था और कोई डर के कारण उनके पास नहीं जा रहा था. मेरी पत्नी रो रही थी. वो तब तक जान चुकी थीं कि कुछ ग़लत हो गया है. तब तक हम अस्पतालों के चक्कर में 6 घंटे बर्बाद कर चुके थे."
श्रीकांत कहते हैं कि तब तक वो निराश हो चुके थे और ग़ुस्से में थे.
उनका कहना है, "मैं अभी भी मदद की उम्मीद में था. मैंने फिर एक निजी एंबुलेंस को कॉल किया और कोविड के लिए बनाए गए सरकारी गांधी अस्पताल लेकर गया. मुझे फिर दरवाज़े पर रोका गया और कोविड-19 टेस्ट रिपोर्ट मांगी गई. मुझे गार्ड को धक्का मारना पड़ा लेकिन अस्पताल में घुसने के बाद मुझे थोड़ी उम्मीद की किरण दिखाई दी."
हालांकि, वहां पर श्रीकांत को किंग कोटी अस्पताल जाने के लिए कहा गया और पहले कोविड टेस्ट कराने को कहा गया. उस समय तक रोहिता के लिए बहुत देर हो चुकी थी और उनकी पत्नी ज़िंदगी की जंग लगभग हार चुकी थीं.
श्रीकांत अकेले नहीं हैं जो इस कठिन परीक्षा से गुज़रे हैं और अपने जीवनसाथी को मरते देखा है.
क्यों नहीं मिल पा रहे बेड
तेलंगाना के एक सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी कहते हैं कि लॉकडाउन में ढील दिए जाने के बाद संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं.
हैदराबाद के एक बड़े सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में काम करने वाले एक वरिष्ठ कर्मचारी का कहना है कि बेड की कमी की वजह लॉकाडउन में ढील देने के बाद संक्रमण के मामले लगातार बढ़ना है.
वो कहते हैं, "90 फ़ीसदी पॉज़िटिव मरीज़ों को होम क्वारंटीन की ज़रूरत है इसके बाद 5 फ़ीसदी को अस्पताल में थोड़ी देखभाल और बाकी के 5 फ़ीसदी को आईसीयू की ज़रूरत पड़ती है लेकिन इसके इलाज के लिए आइसोलेशन की ज़रूरत है जिसके लिए एक ख़ास व्यवस्था की ज़रूरत है. हालांकि, अस्पताल इलाज के लिए तैयार हैं लेकिन इस परिस्थिति में काम करने के लिए विशेषज्ञों और लोगों की कमी है."
तेलंगाना सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के अध्यक्ष डॉक्टर डी. भास्कर राव कहते हैं कि निजी अस्पतालों में क्षमता के हिसाब से बेड हैं लेकिन कोविड टेस्ट में पॉज़िटिव पाए जाने के बाद भी कई लोग एसिम्प्टोमैटिक होने के बावजूद निजी अस्पतालों में आ रहे हैं जबकि उनको होम आइसोलेशन में रहना चाहिए. इसके कारण कई लोगों को बेड नहीं मिल पाता है.
ऐसी भी रिपोर्ट हैं कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ़ कोविड पॉज़िटिव हैं. हालांकि इसको लेकर कोई आंकड़ा नहीं है लेकिन गांधी अस्पताल के सुप्रीटेंडेंट ने हाईकोर्ट को 17 जून को बताया था कि 12 डॉक्टर और 6 स्वास्थ्यकर्मी कोरोना पॉज़िटिव हैं. इसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ा है
सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने हाईकोर्ट में जो रिपोर्ट जमा की है उसके अनुसार किंग कोटी अस्पताल में वेंटिलेटर के साथ 14 बेड, ऑक्सीजन सप्लाई के साथ 300 बेड हैं.
वहीं, गांधी अस्पताल में वेंटिलटर के साथ 80 बेड और ऑक्सीजन सप्लाई के साथ 1200 बेड हैं.
श्रीकांत ने जिन निजी अस्पतालों के बारे में बताया बीबीसी न्यूज़ तेलुगू ने उनसे उनकी प्रतिक्रिया चाही लेकिन यह लेख लिखे जाने तक किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
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कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
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वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
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हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
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ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
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कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
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शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
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पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
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अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.