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निसर्ग तूफ़ान: कैसे पड़ा ये नाम और क्यों ये तूफ़ान ख़तरनाक हो सकता है?
निसर्ग तूफान महाराष्ट्र के तटवर्ती इलाके तक पहुंच गया है.
मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन घंटे में तूफ़ान अपने चरम पर पहुंच जाएगा.
भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि तूफ़ान निसर्ग बुधवार दोपहर 100 से 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ़्तार के साथ महाराष्ट्र के अलीबाग के दक्षिण में टकरा सकता है.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने लोगों से दो दिनों तक घरों के भीतर ही रहने की अपील की है.
कहा जा रहा है कि बीते सौ से अधिक सालों में ये पहली बार है जब कोई शक्तिशाली तूफ़ान मुंबई से टकरा सकता है.
भारतीय मौसम विभागके प्रमुख डॉक्टर मृत्युंजय महापात्र ने बीबीसी संवाददाता मानसी दाश को बताया कि आज सवेरे अरब सागर में बन रहा ये तूफ़ान एक गंभीर चक्रवाती तूफ़ान में बदल गया है और तूफ़ान के केंद्र में इसकी स्पीड फिलहाल 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा है.
पढ़िए उन्होंने तूफ़ान निसर्ग के बारे में और क्या-क्या कहा -
कौन-कौन से इलाक़े कितने प्रभावित हो सकते हैं?
- इतनी स्पीड से हवा चलने से पेड़ उखड़ सकते हैं, बिजली और टेलिफ़ोन के खंभे उखड़ सकतें हैं या गिर सकते हैं. इस दौरान मिट्टी से बने घर, फूस और टिन की छत वाले घर टूट सकते हैं. इसके अलावा होर्डिंग उड़ सकते हैं.
- माना जा रहा है कि जिस इलाके से ये तूफ़ान टकराएगा वो शहरी इलाक़ा है लेकिन इस कारण वहां झुग्गियों को खासा नुक़सान पहुंच सकता है. हम ये मान रहे हैं कि महाराष्ट्र के ठाणे, मुंबई और रायगड़ ज़िले में इस कारण तेज़ हवां चलेंगी और ये तीनों जिले इससे सबसे अधिक प्रभावित होंगे.
- तूफ़ान के कारण समुद्रतट से कम ऊंचाई वाले ठाणे, मुंबई और रायगड़ जैसे इलाक़ों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. इसके साथ साथ समंदर में एक से दो मीटर तक की उंचाई में लहरें भी उठ सकती हैं जो समुद्र तट के इलाक़ों में नुक़सान कर सकती हैं.
- इस तूफ़ान के कारण एक ही समय पर तेज़ हवाएं चलेंगी, भारी बारिश होगी और समंदर में तेज़ लहरें भी उठेंगी. इस कारण इसे मल्टी-हैज़र्ड यानी एक साथ कई जोखिम वाला तूफ़ान कहा जा रहा है.
क्या है तैयारियां?
- इससे निपटने के लिए हम प्रतिघंटे अपडेट जारी कर रहे हैं. साथ ही हम राज्य सरकारों के साथ भी समन्वय कर रहे हैं. हमारी तैयारी पूरी है और हम उम्मीद करते हैं कि इससे अधिक नुकसान न हो.
तूफ़ान का नाम निसर्ग क्यों?
- तूफ़ान का नाम तय करने की एक पूरी प्रक्रिया होती है और भारतीय मौसम विभाग के भीतर रिजनल स्पेशलाइज़्ड मेटेरोलॉजिकल सेंटर तूफ़ानों का नामकरण करता है. ये सेंटर तूफ़ानों और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम रखने वाली युक्त राष्ट्र संघ की एजेंसी वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (डब्लूएमओ) अप्रूव्ड है.
- लेकिन उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों जो देश तूफ़ान से प्रभावित होते हैं वो तूफ़ानों के लिए नाम सुझाते हैं.
- जब डब्लूएमओ ने सितंबर 2004 में संबंधित देशों से अपने-अपने क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नाम ख़ुद रखने को कहा तब भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, श्रीलंका और थाईलैंड को मिलाकर कुल आठ देशों ने एक बैठक में हिस्सा लिया और तूफ़ानों के नाम तक करने की प्रक्रिया शुरू की.
- उस समय हर देश ने आने वाले चक्रवात के लिए आठ नाम सुझाए और इस तरह तूफ़ानों के लिए 64 नामों की एक सूची तैयार हुई थी.
- नाम देने की शर्त ये होती रही है कि ये नाम छोटे, समझ आने लायक, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और भड़काऊ नहीं हों.
- लेकिन बाद में इस समूह में और देश शामिल हुए और देशों की कुल संख्या 13 हो गई. और सूची में संभावित तूफ़ानों के और नाम जुड़ते गए.
- सूची के अनुसार अंफन के साथ सूची के सभी 64 नाम ख़त्म हो गए. तूफ़ान निसर्ग 65वां तूफ़ान है यानी 64 तूफानों के नामों के बाद जो नई लिस्ट बनी उसमें ये पहला तूफ़ान है.
- तूफ़ान निसर्ग बांग्लादेश का सुझाया नाम है जो एक कमिटी के फ़ैसले के बाद सुझाया गया था.
कितने बड़े इलाक़े पर हो सकता हैतूफ़ान का असर?
- तूफ़ान निसर्ग का व्यास करीब 400 से 500 किलोमीटर का है और करीब 100 किलोमीटर के रेडियस में तूफ़ान की स्पीड 100 किलोमीट प्रति घंटे रहने की आंशका है. यानी अलीबाग को पार करते वक्त ये इसके आसपास के 100-145 किलोमीटर के इलाक़े को प्रभावित करते हुए आगे बढ़ेगा. इसी कारण हम कह रहे हैं कि इससे सबसे अधिक प्रभावित ठाणे, मुंबई और रायगड़ जिले होंगे.
- इसके साथ रत्नागिरी, पालघर और सिंधुदुर्ग में 80 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड में हवाएं चल सकती हैं. इसके साथ-साथ गुजरात के वलसाड़, नवसारी और डांग जिलों में भी 80 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से वहां हवाएं चल सकती हैं.
- हवा की ये स्पीड करीब 6 घंटे तक रहेगी यानी शाम के सात-आठ बजे तक हालात ऐसे ही रहेंगे औ फिर धीरे-धीरे हवा की स्पीड कम होगी.
- इसके बाद मध्य महाराष्ट्र होते हुए ये आगे बढ़ेगा और पुणे, नासिक, अवधनगर, औरंगाबाद में भी 60 से 70 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से हवाएं चल सकती हैं.
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