श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में पीयूष गोयल के दावों की तरह सब बढ़िया है?

पीयूष गोयल

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    • Author, सिंधुवासिनी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

“सभी श्रमिक स्पेशल ट्रेनें अपने गंतव्य पर पहुंची हैं. ज़्यादा भीड़ की वजह से कुछ को बस थोड़ी देर हुई. 4,040 ट्रेनों में से सिर्फ़ 71 ट्रेनों यानी 1.75% को डायवर्ट किया गया.”

केंद्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में ये दावा किया है. यही बात उन्होंने ट्वीट भी की है.

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इसके अलावा उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में कहा कि 250 ट्रेनें इसलिए ‘बेकार’ हो गईं क्योंकि राज्य सरकारें उनमें भेजने के लिए यात्री नहीं जुटा सकीं.

पीयूष गोयल ने कहा, “इन सबके बावजूद हमने कोई शिकायत नहीं की.”

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एक तरफ़ रेलमंत्री के ये दावे और दूसरी तरफ़ श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के रास्ता भटकने, घंटों लेट होने और बदहाली के शिकार होने की लगातार आती ख़बरें. इनमें से सच क्या है?

मज़दूरों से टिकट के पैसे लिए जाने पर विपक्षी पार्टियों की आलोचना और सुप्रीम कोर्ट के दख़ल के बाद भी क्या पीयूष गोयल के दावों की तरह स्पेशल श्रमिक ट्रेनों में सब बढ़िया है?

ट्रेनों में अब तक कम से कम 80 लोगों की मौत

इंडियन रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स (आरपीएफ़) की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार नौ मई से 27 मई के बीच श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में सफ़र के दौरान कम से कम 80 लोगों की मौत हुई है.

रिपोर्ट में इन मौतों के पीछे कैंसर, गंभीर बीमारी, लिवर की समस्या और कोविड-19 संक्रमण जैसी वजहें बताई हैं. हालांकि कोरोना वायरस संक्रमण को सिर्फ़ एक व्यक्ति की मौत का कारण बताया गया है.

श्रमिक स्पेशल ट्रेन

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बीबीसी ने आरपीएफ़ की इस रिपोर्ट की पड़ताल करने पर पाया है कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में यात्रा के दौरान जान गंवाने वालों में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों की संख्या सबसे ज़्यादा है. रिपोर्ट के मुताबिक़ कुल 80 मृतकों में से 32 लोग उत्तर प्रदेश और 25 लोग बिहार से ताल्लुक़ रखते थे.

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में मरने वालों के ये आंकड़े किसी ग़ैर-सरकारी संस्था ने नहीं बल्कि ख़ुद इंडियन रेलवे प्रोटेक्शन फ़ोर्स ने जारी किए हैं. ये आंकड़े रेलमंत्री के ‘सब ठीक है’ के दावों के ठीक उलट कहानी बयां करते हैं.

अगर सिर्फ़ पिछले हफ़्ते के रिकॉर्ड पर नज़र डालें तो सात दिनों के भीतर कम से कम नौ लोगों की मौत श्रमिक ट्रेनों में यात्रा के दौरान हुई है.

इन मरने वालों में बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर की वो महिला भी हैं जिनकी वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुई थी. वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला मृत अवस्था में प्लेटफ़ॉर्म पर पड़ी है और उनका बच्चा मौत से पूरी तरह अनजान उनके साथ खेल रहा है.

हालांकि सरकार ने महिला को ‘पहले से बीमार’ बताकर उनकी मौत से पल्ला झाड़ लिया था. भारत सरकार की सूचना एजेंसी ‘प्रेस इंफ़ॉर्मेशन ब्यूरो’ ने भी श्रमिक ट्रेन में महिला की मौत को ‘फ़ेक न्यूज़’ बताया था.

ये वीडियो सामने आने के बाद पीयूष गोयल ने ट्वीट करके कहा था, “मेरी सभी नागरिकों से अपील है कि गंभीर रोग से ग्रस्त, गर्भवती महिलाएं, व 65 से अधिक व 10 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में बहुत आवश्यक होने पर ही यात्रा करें.”

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हालांकि रेलमंत्री ने ये नहीं बताया कि ‘बहुत आवश्यक’ का पैमाना क्या होगा. रोज़ी-रोटी छिनने और राशन ख़रीदने के पैसे न बचने को ‘बहुत आवश्यक’ माना जाएगा या नहीं? मकान का किराया न चुका पाने पर बेघर कर दिए जाने को ‘बहुत आवश्यक’ माना जाएगा या नहीं?

ज़ाहिर है, कोरोना संक्रमण के ख़तरे के बीच श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में अमूमन वही लोग यात्रा कर रहे हैं जिनके पास कोई और विकल्प नहीं बचा है. अगर ये ‘बहुत आवश्यक’ नहीं है तो फिर क्या है? रेलमंत्री ने इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया.

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में सुविधाओं की बात करें तो मुंबई से झारखंड लौटे एक मोहम्मद बदरुद्दीन अंसारी ने बीबीसी को बताया था कि 48 घंटे की यात्रा में उन्हें सिर्फ़ दो बार खाना और तीन बार पानी मिला था.

श्रमिक स्पेशल ट्रेन

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सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो देखने को मिले हैं जिनमें ट्रेन रुकते ही लोग स्टेशन पर पानी की बोतलों और बिस्किट के पैकेटों पर टूट पड़ते नज़र आते हैं.

'थोड़ी देर' कितनी देर होती है?

पीयूष गोयल ने कहा कि सभी ट्रेनें गंतव्य पर पहुंची हैं और भीड़ की वजह से कुछ को थोड़ी देरी हुई है. मगर उन्होंने नहीं बताया कि ‘थोड़ी देर’ असल में कितनी ‘देर’ होता है.

इंडियन एक्सप्रेस ने कई स्रोतों से श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के टाइम टेबल का विश्लेषण किया है और पाया है कि एक मई से शुरू हुई 3,740 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में से 40 फ़ीसदी अपने गंतव्य स्थान पर देरी से पहुंचीं और ये देरी औसतन आठ घंटे की रही.

अब औसतन आठ घंटे की देरी ‘थोड़ा लेट’ है या ‘ज़्यादा लेट’ इसका सही जवाब तो उन ट्रेनों से सफ़र करने वाले वो लोग ही दे सकते हैं जो किसी तरह बस जल्द से जल्द अपने घर पहुंच जाना चाहते थे.

23 महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के लिए निकली श्रमिक स्पेशल ट्रेन गोरखपुर के बजाय ओडिशा के राउरकेला पहुंच गई. सवाल उठने पर रेलवे ने कहा कि इस ट्रेन का रास्ता बदला जाना ‘पूर्व नियोजित’ था.

इसी तरह बेंगलुरु से उत्तर प्रदेश के बस्ती के लिए निकली ट्रेन एनसीआर में ग़ाज़ियाबाद पहुंच गई. यह श्रमिक स्पेशल ट्रेन अपने गंतव्य तक 20 घंटे से ज़्यादा की देरी से पहुंची. क्या रेलमंत्री के दावों के अनुसार इस 20 घंटे की देरी को ‘थोड़ी देर’ माना जाए?

रेल मंत्रालय बार-बार यह दुहरा रहा है कि चूंकि ज़्यादातर श्रमिक ट्रेनें प्रवासी मज़दूरों को लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार जा रही हैं, इसलिए इन रास्तों पर भीड़भाड़ से बचने के लिए ट्रेनों को डायवर्ट करना पड़ रहा है.

अब सवाल ये है कि अगर ये सब ‘पूर्व निर्धारित’ था तो क्या रेलवे ने लोगों को पहले से बताया था कि स्पेशल श्रमिक ट्रेनों को गंतव्य तक पहुंचने में इतनी देर लगेगी? या ट्रेनों का रास्ता इस तरह बदला जाएगा? और अगर बताया गया था तो क्या सफ़र में देरी को देखते हुए लोगों को रास्ते के लिए खाना-पानी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं?

वीडियो कैप्शन, भारत में रेल चली, लेकिन मज़दूरों की मुश्किलें जारी हैं

बीबीसी समेत कई मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट में इन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से सफ़र करने वालों ने बताया है कि उन्हें इस तरह रास्ता बदले जाने या यात्रा में देरी के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी. लोगों ने ये भी कहा है कि ट्रेनों में देरी की वजह से उन्हें कई घंटे भूखे-प्यासे रहना पड़ा.

ये स्थिति उन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की है, जिनमें ज़्यादातर ग़रीब प्रवासी मज़दूर और मजबूर लोग सफ़र कर रहे हैं. ये स्थिति उन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की है जिनमें सफ़र कर लोगों के पास पहले से ही खाने-पीने की चीज़ों और पैसों की भारी कमी है.

इन सारी आलोचनाओं के बीच रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने कहा कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनें, सामान्य ट्रेनें नहीं हैं और उन्हें ‘प्रवासी मज़दूरों के हितों का ध्यान रखते हुए’ डायवर्ट किया जा सकता है.

रेल मंत्रालय और रेल मंत्री पीयूष गोयल लगातार लेट होती और रास्ता भटकती ट्रेनों को लेकर सफ़ाई दे रहे हैं. पीयूष गोयल ट्रेनों के रास्ता भटकने की ख़बरों को फ़ेक न्यूज़ बता रहे हैं और कह रहे हैं ट्रेनें पूर्व निर्धारित तरीके से डायवर्ट की जा रही हैं.

उन्होंने कहा कि 4,040 में से सिर्फ़ 71 ट्रेनें (1.75%) ट्रेनें डायवर्ट की गईं. 1.75% सुनने में छोटा सा प्रतिशत लगता है लेकिन 71 ट्रेनों में लाखों लोगों की परेशानियां भी क्या इतनी ही छोटी होंगी?

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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