मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' में स्वदेशी कहां हैं?

सिलाई करतीं औरतें

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    • Author, ज़ुबैर अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया संबोधन में 'एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण' का वादा किया है.

पीएम मोदी का 'आत्मनिर्भर भारत अभियान', उनकी पार्टी की मूल अवधारणा के अनुसार एक महत्वकांक्षी परियोजना है जिसका उद्देश्य सिर्फ़ कोविड-19 महामारी के दुष्प्रभावों से लड़ना नहीं, बल्कि भविष्य के भारत का पुनर्निर्माण करना है.

मंगलवार शाम के अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, "अब एक नई प्राणशक्ति, नई संकल्पशक्ति के साथ हमें आगे बढ़ना है."

वे बोले, "हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थीं, जो रिज़र्व बैंक के फ़ैसले थे और आज जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है, उसे जोड़ दें तो ये क़रीब-क़रीब 20 लाख करोड़ रुपये का है. ये पैकेज भारत की जीडीपी का क़रीब-क़रीब 10 प्रतिशत है. 20 लाख करोड़ रुपये का ये पैकेज, 2020 में देश की विकास यात्रा को, आत्मनिर्भर भारत अभियान को एक नई गति देगा."

भारत में 'स्वदेशी' एक विचार के रूप में देखा जाता है, जो भारत की संरक्षणवादी अर्थव्यवस्था का आर्थिक मॉडल रहा और राष्ट्रवादी तबक़ा इस विचार की वकालत भी करता रहा है, लेकिन पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहीं भी 'स्वदेशी' शब्द का इस्तेमाल नहीं किया.

जबकि आत्म-निर्भर भारत बनाने का पीएम मोदी का विचार 'स्वदेशी' के काफ़ी क़रीब दिखता है और उन्होंने अपने संबोधन में खादी ग्राम उद्योग के उत्पादों की अच्छी बिक्री का ज़िक्र भी किया.

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दशकों तक, भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया के लिए खुली नहीं थी. बाहरी दुनिया पर संदेह और आत्मविश्वास में कमी भी थी. पिछली शताब्दी के अंतिम चार दशकों के भारत ने स्वदेशी मॉडल पर भरोसा करते हुए पाँच साल की नियोजित अर्थव्यवस्था का अनुसरण किया और 2.5 से 3 प्रतिशत विकास दर के साथ वृद्धि की जिसे कभी 'विकास की हिंदू दर' के रूप में भी जाना जाता था.

अंत में, भारत को अपने आर्थिक संकटों की वजह से साल 1991 में बाहरी दुनिया के लिए अपने दरवाज़े खोलने पर मजबूर होना पड़ा.

आज भारत एक बार फिर 'आत्म-निर्भर' बनने के लिए भीतर की ओर देख रहा है. भले ही मोदी ने दावा किया है कि उनकी आत्म-निर्भरता वाली बात का मतलब दुनिया से कनेक्शन तोड़ लेना नहीं है, पर मोदी जो कह रहे हैं उसे निभा पाना आसान नहीं होगा, ख़ासतौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के ऐसे दौर में, जब अमरीका के स्टॉक मार्केट की हर एक हलचल चीन और भारत के बाज़ारों पर सीधा असर डालती है.

इसके अलावा, स्थानीय उत्पादों का उत्पादन करने और उन्हें प्रतिस्पर्धा में खड़ा करने के लिए स्थानीय उद्यमियों और निर्माताओं को कुछ सुरक्षा राशि भी देनी होगी जिससे विश्व व्यापार संगठन के सदस्यों के साथ भारत का सीधा टकराव होगा.

हालांकि, बीजेपी के एक अंदरूनी सूत्र ने पीएम मोदी के आत्म-निर्भरता के दृष्टिकोण को बहुत अलग बताया.

प्रधानमंत्री मोदी

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उन्होंने कहा, "भारत के लिए पीएम मोदी के दृष्टिकोण में आत्मनिर्भरता ना तो बहिष्करण है और ना ही अलगाववादी रवैया. ज़ोर इस बात पर है कि दक्षता में सुधार किया जाये. इसके अलावा दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए दुनिया की मदद करना मोदी सरकार का विचार है."

लेकिन 'स्वदेशी जागरण मंच' के अरुण ओझा कहते हैं कि "कोरोना महामारी के बाद आर्थिक राष्ट्रवाद' सभी देशों में आएगा."

आरएसएस से जुड़ी इस संस्था ने पीएम मोदी के आत्म-निर्भर बनने के विचार का स्वागत किया है.

अरुण ओझा ने कहा, "हम तो वर्षों से आत्म-निर्भरता और स्वदेशी मॉडल की वकालत कर रहे हैं."

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले से ही 'अमरीका फ़र्स्ट' यानी 'अमरीका को प्राथमिकता' की नीति का पालन कर रहे हैं और भारत अमरीका के साथ व्यापार या शुल्क आदि से संबंधित विवाद का सामना नहीं कर सकता.

डोनाल्ड ट्रंप 25 फ़रवरी को अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान भारत की सीमा-शुल्क की दरों के बारे में सीधी बात कह चुके हैं. उन्होंने कहा था, "भारत में शायद दुनिया में सबसे अधिक टैरिफ़ हैं और इन्हें कम से कम अमरीका के साथ रोका जाना चाहिए."

मोदी और ट्रंप

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चौंतीस मिनट के अपने संबोधन में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 'हमें लोकल चीज़ों को लेकर वोकल होना चाहिए.' यानी भारतीयों को स्थानीय चीज़ों के बारे में ज़्यादा बात करनी चाहिए, खुलकर बात करनी चाहिए.

एक नारे के रूप में यह सुनना बहुत अच्छा लगता है. आत्म-निर्भरता वैसे भी हर देश का एक वांछित सपना है. लेकिन इस काम के क्रियान्वयन में मोदी लड़खड़ा सकते हैं, जैसे उनके ख़ास प्रोजेक्ट 'मेक इन इंडिया' के संबंध में देखा गया.

भारत सरकार का 'मेक इन इंडिया' प्रोजेक्ट भारत को मैन्युफ़ैक्चरिंग का हब बनाने में विफल रहा है जो इस प्रोजेक्ट का घोषित उद्देश्य था.

जैसा कि कुछ आलोचकों ने कहा भी है कि "मोदी वादा कुछ ज़्यादा और डिलीवरी थोड़ी कम करते हैं."

प्रधानमंत्री ने अपने पूरे भाषण में 'देश को आत्मनिर्भर बनाने' पर सारा ज़ोर दिया, लेकिन उन्होंने इस बारे में कुछ स्पष्ट नहीं बताया कि इसे संभव कैसे किया जाएगा. उन्होंने कुछ संकेत ज़रूर दिये, जैसे उन्होंने कहा कि ये पाँच स्तंभों पर आधारित होगा: अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढाँचा, प्रणाली, जीवंत लोकतंत्र और माँग.

पर क्या भारत में ये स्तंभ अच्छी स्थिति में हैं? क्या वे मज़बूत हैं?

अर्थव्यवस्था

प्रवासी मज़दूर

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आलोचक इन पाँच स्तंभों के स्वास्थ्य को लेकर बहुत उत्साहित नहीं हैं. 2.7 ट्रिलियन डॉलर की भारत की अर्थव्यवस्था 2 प्रतिशत से भी कम पर बढ़ रही है जो इस पीढ़ी की अब तक की सबसे कम वृद्धि दर है. ग्लोबल सप्लाई चेन कमज़ोर पड़ी है. वैल्यू चेन हैं लेकिन ऐसी नहीं है जो चीन के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें.

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत के पास करोड़ों ग़रीब लोगों को फिर खड़े करने का बहुत बड़ा काम है जो लॉकडाउन की वजह से वापस ग़रीबी-रेखा के नीचे चले गए हैं.

इन्फ़्रास्ट्रक्चर यानी बुनियादी ढाँचा

चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए या भारत में निवेश करने के लिए चीन स्थित विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए भारत को विश्व स्तर के बुनियादी ढांचे का निर्माण करना होगा. भूमि, पानी और बिजली में सुधारों की ज़रूरत है.

भारत में विदेशी कंपनियों के लिए हमेशा से एक बाधा बुनियादी ढांचे की कमी रही है. आलोचकों का कहना है कि मोदी सरकार को अब तक 6 साल हो चुके हैं लेकिन इन्फ़्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट्स अभी भी पर्याप्त नहीं हैं. इन्फ़्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट्स में सालों लग जाते हैं और भारत के पास अब इतना समय नहीं है.

सिस्टम यानी प्रणाली

पीएम ने प्रौद्योगिकी के इष्टतम उपयोग की बात कही है. उनकी सरकार ने कुछ सही क़दम उठाये हैं जिसमें अत्याधुनिक तकनीक को अपनाना और समाज में डिजिटल तकनीक का उपयोग बढ़ाना शामिल है. यह अर्थव्यवस्था का चालक साबित हो सकता है.

वाइब्रेंट डेमोक्रेसी यानी जीवंत लोकतंत्र

विश्लेषकों का दावा है कि मोदी-काल में लोकतांत्रिक मूल्य बहुत हद तक मिट चुके हैं.

लेकिन लोकतंत्र भारत की मुख्य ताक़त है और जहाँ चीन भारत का मुक़ाबला नहीं कर सकता है.

वो उद्यमी और निर्माता जो लोकतंत्र, मानवाधिकार और बाल शोषण के उन्मूलन को महत्व देते हैं, वो साम्यवादी चीन के स्थान पर भारत के साथ डील करना चाहेंगे.

वीडियो कैप्शन, कोरोना वायरस की मार से काम-धंधे भी अछूते नहीं, लेकिन कुछ कारोबार कमाल कर रहे हैं.

डिमांड यानी मांग

वास्तव में, भारत का घरेलू बाज़ार निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक पेशकशों में से एक है.

वर्तमान में डिमांड हल्की है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि कोविड-19 के बाद की दुनिया में एक बार फिर भारत को शुरुआत करनी होगी जिसके लिए कई छोटे और मध्यम उद्यमियों को सरकारी प्रोत्साहन की आवश्यकता होगी.

और अच्छी ख़बर ये है कि पीएम मोदी भी इस बात को मान रहे हैं कि आत्म-निर्भरता केवल एसएमई (छोटे और मझौले उद्योगों) की मदद से ही हासिल की जा सकती है.

मोदी सरकार 'देश के आत्म-निर्भरता' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बुधवार से एक अभियान शुरू कर रही है.

इसमें बड़े नेताओं के साथ-साथ तालुक़ा स्तर के पार्टी सदस्यों को भी शामिल किया जा रहा है जो सोशल मीडिया पर पीएम के संदेश को प्रसारित करने और टीवी समाचार चैनलों पर साक्षात्कारों में दिखाई देंगे.

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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