You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कश्मीर: मुठभेड़ में हिज़बुल मुजाहिदीन के शीर्ष चरमपंथी की मौत
- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी संवाददाता
भारत प्रशासित कश्मीर में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ के दौरान हिज़बुल मुजाहिदीन का शीर्ष चरमपंथी रियाज़ नाइकू अपने एक साथी के साथ मारा गया है.
हालांकि पुलिस ने मारे गए चरमपंथी का नाम नहीं लिया है. अवंतीपुरा के स्थानीय निवासियों का कहना है कि फ़ौज, पारामिलिट्री और पुलिस के संयुक्त कार्रवाई में नाइकू बेग़ पोरा गांव में घिर चुका था.
मिली जानकारी के मुताबिक़ इस मुठभेड़ में दो चरमपंथियों की मौत हो गई है और तीन ऑपरेशन जारी हैं.
यह ऑपरेशन उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले में हुए दो चरमपंथी हमले में आठ सुरक्षाबलों के मारे जाने के बाद हुआ है. मारे गए सुरक्षाबलों में एक कर्नल और एक मेजर भी शामिल हैं.
40 साल का रियाज़ नाइकू स्थानीय हिज़बुल मुजाहिदीन का आखिरी जीवित नेता थे. 2016 में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद उन्होंने हिज़बुल की कमान संभाली थी.
नाइकू के ऊपर 12 लाख रुपये का ईनाम रखा गया था. पुलिस उनके ऊपर हिज़बुल को फिर से संगठित करने और सुरक्षा बलों के ऊपर हमला करने के आरोप लगाती रही है.
कश्मीर में इस साल मार्च के बाद से चरमपंथी हमलों में काफी इजाफा हुआ है.
पुलिस के सूत्रों का कहना है कि चरमपंथियों के खिलाफ ठंड के दिनों में ऑपरेशन बंद थे. नाम नहीं बताने के शर्त पर उन्होंने कहा, "जनवरी से अब तक 76 चरमपंथी सुरक्षाबलों की कार्रवाई में मारे जा चुके हैं. लेकिन हमने 20 जवान भी अपने खो दिए हैं जिनमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं."
पुलिस के मुताबिक़ रमज़ान के पहले दस दिनों में 14 चरमपंथी, दो उनके सहयोगी, आठ जवान और एक शारीरिक रूप से अक्षम बच्चे की मौत हुई है.
मार्च के आख़िर में शुरू हुए लॉकडाउन के दौरान नियंत्रण रेखा पर भारत और पाकिस्तान के फ़ौज के बीच तनाव बढ़ चुका है. इसी बीच कश्मीर में फ़ौज ने चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई बढ़ा दी है.
सूत्र के मुताबिक, "इस साल मारे गए 76 चरमपंथियों में 34 चरमपंथी लॉकडाउन के दौरान मारे गए हैं."
इस बीच सुरक्षा बलों ने मारे गए चरमपंथियों को लेकर स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया से निपटने के लिए नई नीति बनाई है. नई नीति के मुताबिक़, मारे गए चरमपंथियों की पहचान नहीं बताई जाएगी और ना ही उनके शव परिजनों को सौंपे जाएंगे.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)