जम्मू और कश्मीर में नई राजनीतिक पार्टी का जन्म

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जम्मू और कश्मीर में रविवार का दिन सियासी तौर पर अहम होने जा रहा है.
श्रीनगर में मौजूद बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर ने बताया कि पूर्व मंत्री अल्ताफ़ बुखारी रविवार को श्रीनगर के लाल चौक पर अपना राजनीतिक दल लॉन्च करेंगे. इस नए राजनीतिक दल का नाम होगा 'अपनी पार्टी.'
माना जा रहा है कि महबूबा मुफ़्ती की पीडीपी और उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ़्रेंस के असंतुष्ट नेता अल्ताफ़ बुखारी के झंडे का दामन थाम सकते हैं.
अल्ताफ़ बुखारी ने कश्मीर की स्वायत्ता ख़त्म करने के केंद्र सरकार के फ़ैसले का स्वागत किया था.
सात महीनों के सियासी सन्नाटे के बाद वे कश्मीर की एकमात्री राजनीतिक आवाज़ होने जा रहे हैं.
अल्ताफ़ बुखारी को भारतीय जनता पार्टी का क़रीबी माना जाता है. कई लोगों की राय ये भी है कि अल्ताफ़ बुखारी कश्मीर की नई सियासत का चेहरा बनने जा रहे हैं.

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सीएए पर विदेश मंत्री का बयान
"आप मुझे एक ऐसा देश बताइए जो कहता है कि उसके यहां दुनिया के सभी लोगों का स्वागत है."
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ये बात नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के बारे में एक सवाल पूछे जाने पर कही. एस. जयशंकर ने शनिवार को ग्लोबल बिज़नस समिट में हिस्सा लिया और वहां पूछे गए कई सवालों के जवाब दिए.
सीएए के मुद्दे पर चल रहे विवाद को लेकर उन्होंने कहा, "हर व्यक्ति नागरिकता को एक संदर्भ में देखता है. आप मुझे एक ऐसा देश बताइए जो कहता हो कि उसके यहां दुनिया के सभी लोगों का स्वागत है."
एस. जयशंकर ने कहा कि भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन क़ानून के ज़रिए ऐसे लोगों की संख्या कम करने की कोशिश की हैं जिनका अपना कोई देश नहीं है और इसकी सराहना की जानी चाहिए.
उन्होंने कहा कि कोई ये तर्क नहीं दे सकता कि सरकार या संसद को नागरिकता की शर्तें तय करने का अधिकार नहीं है क्योंकि हर सरकार ऐसा करती है.
सीएए और दिल्ली के हालिया दंगों पर कुछ देशों की तीखी प्रतिक्रियाओं और ये पूछे जाने पर कि क्या भारत अपने मित्र खो रहा है, एस.जयशंकर ने कहा, "शायद अब हम ये समझ पा रहे हैं कि हमारा असली दोस्त कौन है."
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यूएनएचसीआर के मुद्दे पर जयशंकर ने क्या कहा?
पाकिस्तान और ईरान ने दिल्ली दंगों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा था भारत में 20 करोड़ मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है.
वहीं, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह ख़ामेनेई ने भी दिल्ली दंगों की कड़ी निंदा की थी. उन्होंने कहा कि भारत में मुसलमानों पर ज़ुल्म हो रहा है और दुनिया भर के मुसलमान इससे दुखी हैं.
उन्होंने ट्वीट कर कहा था, "भारत में मुसलमानों के नरसंहार पर दुनियाभर के मुसलमानों का दिल दुखी है. भारत सरकार को कट्टर हिंदुओं और उनकी पार्टियों को रोकना चाहिए और इस्लामी दुनिया की ओर से भारत को अलग-थलग किए जाने से बचने के लिए भारत को मुसलमानों के नरसंहार को रोकना चाहिए."
जम्मू और कश्मीर मसले पर शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र आयुक्त (यूएनएचसीआर) की टिप्पणी के बारे में जयशंकर ने कहा, "यूएनएचआरसी के निदेशक पहले भी ग़लत रहे हैं. आप कश्मीर के मामले में यूएनएचआरसी का पिछला रिकॉर्ड देखिए. ये सीमापार आतंकवाद के बारे में ऐसे बात करता है जैसे इसका पड़ोसी देश से कोई लेना-देना ही न हो."
यूएनएचसीआर के निदेशक ने कहा था कि कश्मीर मुद्दे पर वो भारत से सहमत नहीं हैं.

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केरल के दो समाचार चैनलों पर लगी रोक हटी
सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि केरल के दो समाचार चैनलों के प्रसारण पर लगाई गई रोक हटा ली गई है.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार उन्होंने कहा कि "केरल के दो समाचार चैनलों पर 48 घंटों का प्रतिबंध लगाया गया था लेकिन हमें पता चला कि असल में क्या हुआ था. इस कारण हमने तुरंत दोनों चैनलों पर लगी पाबंदी हटा ली है."
उन्होंने कहा कि "हमारा मानना है कि गणतंत्र में मीडिया की आज़ादी होना ज़रूरी है. जब इमर्जेंसी के दौरान मीडिया पर पाबंदी लगाई गई थी तब हमने उसका विरोध किया था. प्रधानमंत्री ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है. हम मामले की तह तक पहुंचेंगे और ग़लत करने वाले के ख़िलाफ़ जो भी ज़रूरी कदम लेने हैं वो लेंगे."
उन्होंने कहा कि सभी तो इस बात की समझ होनी चाहिए कि आज़ादी के साथ ज़िम्मेदारी भी होनी चाहिए.
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इससे पहले सूचना और प्रसारण मंत्रालय की तरफ से आदेश जारी कर मलयालम चैनल एशियानेट न्यूज़ और मीडिया वन का प्रसारण 6 मार्च की शाम 7.30 बजे से लेकर 8 मार्च को शाम 7.30 बजे तक बंद किया गया था.
मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली हिंसा को लेकर इन दोनों चैनलों की कवरेज एकतरफा थी.
इस प्रतिबंध की कई हलकों से आलोचना की गई थी. केरल राज्य के वित्त मंत्री थॉमस आईसेक ने कहा था कि दिल्ली हिंसा की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने और इस हिंसा में हिंदुत्व की सांप्रदायिक ब्रिगेड की भूमिका उजागर करने की वजह से चैनलों के प्रसारण पर रोक लगाई गई है.

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यस बैंक के खाताधारकों का पैसा सुरक्षित- एसबीआई चेयरमैन
भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा है कि घाटे में चल रहे यस बैंक में खाताधारकों के पैसों को कोई ख़तरा नहीं है.
उन्होंने कहा है कि उन्होंने स्टॉक एक्सचेंज के ज़रिए जानकारी दे दी है कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बोर्ड में इस बात को लेकर सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई है और एसबीआई यस बैंक की 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीद सकता है.
उन्होंने कहा कि यस बैंक में निवेश की पूरी पूंजी मात्र 2,459 करोड़ होगी और खाताधारकों के लिए कोई ख़तरा नहीं है.
उन्होंने ये भी कहा कि रिज़र्व बैंक की तरफ से एक प्लान मिला है जिस पर उनकी टीम काम कर रही है.
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समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार रजनीश कुमार ने कहा है कि यस बैंक के लिए कई निवेशकों ने उनसे संपर्क भी किया है.
इससे पहले रिज़र्व बैंक ने यस बैंक के पुनर्निर्माण की योजना का मसौदा सामने पेश किया था और इस संबंध में लोगों से राय मांगी थी. मसौदे में कहा गया है कि स्टेट बैंक ने यस बैंक में निवेश करने की इच्छा जताई है और बैंक इसके पुनर्निर्माण की योजना में शामिल होना चाहता है.
क़रीब 15 साल पहले भारतीय बैंकिंग सेक्टर में उतरा यस बैंक आर्थिक तंगी से गुज़र रहा है. बैंक को अपने ग्राहकों को उनका पैसा लौटाने में दिक्क़त आ रही है.
गुरुवार की शाम रिज़र्व बैंक ने एक सर्कुलर जारी कर यस बैंक के बोर्ड को भंग कर दिया और उस पर नज़र रखने के लिए एक प्रशासक नियुक्त कर दिया.
इसके साथ ही बैंक के जमाकर्ताओं पर निकासी की सीमा सहित इस बैंक के कारोबार पर कई तरह की पाबंदिया भी लगाई गई हैं. साथ ही बैंक का नियंत्रण भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में वित्तीय संस्थानों के एक समूह यानी कंसोर्शियम के हाथ में देने की तैयारी की गई है.

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इस ख़बर के आने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि यस बैंक के जमाकर्ताओं का पैसा पूरी तरह सुरक्षित है और सरकार उनका नुक़सान नहीं होने देगी.
उन्होंने ये भी कहा कि इस मामले में रिज़र्व बैंक और सरकार दोनों गंभीरता से देख रही है और सरकार कोई भी फ़ैसला आम लोगों के हितों को देखते हुए करेगी.

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