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प्रियंका चोपड़ा ने सुनाई हॉलीवुड में एंट्री की कहानी
- Author, मधु पाल
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अपनी आने वाली फ़िल्म 'द स्काई इज़ पिंक' के प्रमोशन के लिए भारत आई हुई हैं. शादी के बाद प्रियंका की ये पहली फ़िल्म है.
आज प्रियंका कामयाब अभिनेत्रियों में से एक हैं और बॉलीवुड के साथ-साथ हॉलीवुड दोनों जगह काम कर रही हैं.
प्रिंयका ने ख़ास बातचीत में हमें बताया कि उनके लिए मां की भूमिका निभाने का अनुभव कैसा था और हॉलीवुड में उनकी शुरुआत कैसे हुई.
प्रियंका कहती हैं, ''मैंने इतना लंबा सफ़र तय किया है और यहाँ तक पहुंचने के लिए मैंने बहुत ठोकरें भी खाई हैं. लेकिन, मुझमें क्षमता थी ठोकरें खाने की. शायद इसलिए आज मैं उस मुक़ाम तक पहुंच पाई हूँ.''
वह कहती हैं, ''मेरी कामयाबी का श्रेय सबसे पहले मैं अपने आप को ही देना चाहूंगी. मैंने ठोकरें बहुत खाई हैं लेकिन ठोकरे खाने की क्षमता रखी मैंने. इससे भी बड़ा श्रेय मेरे माता-पिता को जाता है जिन्होंने हर ठोकर पर मुझे फिर से खड़े होने की ताक़त दी. मुझे ये समझाया कि हर चीज़ में मेरी ख़ुद की राय होना कितना ज़रूरी है. तुम ज़िंदगी में जो भी करोगी हम तुम्हारे पीछे खड़े हैं तुम्हे संभालने के लिए.''
माँ के किरदार में कोई परेशानी नहीं
फ़िल्म 'द स्काई इज पिंक' मोटिवेशनल स्पीकर आयशा चौधरी की ज़िंदगी पर आधारित है, जिन्हें पल्मनरी फाइब्रोसिस नाम की बीमारी थी. प्रियंका फ़िल्म में अदिति चौधरी और फ़रहान अख़्तर निरेन चौधरी के रोल में दिखेंगे. दोनों पति-पत्नी बने हैं, ज़ायरा उनकी बेटी के रोल में नज़र आएंगी.
प्रियंका ने इस फ़िल्म में एक 17 साली के बच्चे की मां का किरदार निभाया. उनके लिए एक बड़े बच्चे की मां का किरदार निभाना कैसा अनुभव था, इस पर प्रियंका चोपड़ा कहती हैं, ''माँ का किरदार निभाने में मुझे कोई भी परेशानी नहीं है. मैंने माँ का किरदार फ़िल्म 'प्यार इम्पॉसिबल' में भी निभाया था. ये फ़िल्म 2010 में आई थी. 'सात ख़ून माफ़' में नसीरुद्दीन शाह की पत्नी बनी हूँ. मैंने कभी इस बारे में नहीं सोचा. मैं अपने आपको एक्टर मानती हूँ और आज भी जो किरदार मिलते हैं उसे बख़ूबी निभाती हूं. उम्र मेरे लिए मायने नहीं रखती, लेकिन अच्छा किरदार होना ज़रूरी है और अगर उस काम में चुनौती है तो और मज़ा आता है.''
हॉलीवुड में पहचान के लिए करना पड़ा संघर्ष
आज प्रियंका भारत में ही नहीं सारी दुनिया में अपनी पहचान बना चुकी हैं. लेकिन क्या इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर अपनी जगह बना पाना प्रियंका के लिए आसान था.
इस पर प्रियंका चोपड़ा कहती हैं, ''मैं जब अमरीका गई थी तब मुझे कोई नहीं जनता था. मुझे वहां अपने लिए ख़ुद रास्ता बनाना पड़ा. मेन स्ट्रीम ग्लोबल एंटरटेनमेंट में आप कैसे भागीदार हो सकते हैं, इस लेकर भारतीय कलाकारों में से किसी ने नहीं सोचा था और ना ही किसी ने प्रयास किया. मेरे लिए सबसे बड़ा संघर्ष वही था.''
''मैं अमरीका गई तो 32 साल की थी और भारत की बहुत बड़ी स्टार थी लेकिन जब अमरीका में किसी के साथ मीटिंग करती थी तो वहां के लोगों को बार-बार अपना नाम बताना पड़ता था. बताना पड़ता था कि मैं प्रियंका चोपड़ा हूँ और भारत से आई हूँ. ये मेरा काम है और अब मुझे इस तरह का काम चाहिए. बार-बार ये दाहोराना बड़ा संघर्ष होता है.''
प्रियंका चोपड़ा कहती हैं, ''मैं मानती हूं कि आपको काम चाहिए तो सर झुकाओ और अच्छा काम मांगोगे तो काम ज़रूर मिलेगा. लेकिन, अगर आप ये कहोगे कि मैं स्टार हूँ, मैं बड़ी हूँ और अहंकार, घमंड दिखाएँगे तो कोई काम नहीं देगा. मैं जब वहां गई तो मुझे महसूस हुआ कि वो लोग आज भी ऐसा सोचते हैं कि बॉलीवुड वाले सिर्फ़ नाच-गाना ही कर सकते है. एक ही तरह की फ़िल्में करते रहते हैं और हमारी इंडस्ट्री को सिर्फ़ वही आता है. उनकी इस सोच को तोड़ना बहुत मुश्किल था.''
''मैंने वहां बहुत ऑडिशन दिए, नए-नए एक्टर के साथ ऑडिशन किये. अजीब लगा लेकिन डर नहीं लगा. यही बात मुझे अपनी अच्छी लगती है कि मैं बार-बार कोशिश करती रहती हूँ. शायद यही बात मुझे अलग बनाती है.''
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