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भारत को पाकिस्तान से जोड़ने की कोशिशों पर जयशंकर ने उठाए सवालः पांच बड़ी ख़बरें
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद भारत और पाकिस्तान को साथ जोड़ने की कोशिशों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा वे लोग कर रहे हैं जिनके दिमाग पर जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किए जाने की बात हावी है.
इस दौरान जयशंकर ने पाकिस्तान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करना भारत का आंतरिक मसला है और पाकिस्तान को इसे इसके वास्तविक रूप में स्वीकार करना होगा.
उन्होंने कहा कि, "आप एक ऐसे देश को कैसे साथ जोड़कर देख सकते हैं जो आपकी अर्थव्यवस्था का आठवां हिस्सा है. जो छवि के हिसाब से आपसे एकदम अलग है."
उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे किसी भी बातचीत में पाकिस्तान आए.
जयशंकर ने कहा, "इसलिए अफ़ग़ानिस्तान के बारे में बात नहीं कीजिए, बल्कि दक्षिण एशिया की भी बात नहीं कीजिए. मुझे लगता है कि लोगों के दिमाग पर यह हावी हो गया है. यह तर्क अकसर वे लोग देते हैं जिनका मानना है कि हमें अनुच्छेद 370 के बारे में कुछ नहीं करना चाहिए था."
अमरीका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में आयोजित अटलांटिक काउंसिल की बैठक में इसी दौरान जयशंकर ने कहा कि पश्चिमी देशों के कारण भारत ने 200 सालों तक प्रताड़ना झेली.
भारत एक हिंदू राष्ट्र है, इसे छोड़कर सब बदल सकता हैः भागवत
आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि हिन्दुस्तान हिन्दू राष्ट्र है और इसे छोड़कर सब बदल सकता है.
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आंबेकर की पुस्तक 'द आरएसएस: रोडमैप्स फॉर 21 सेंचुरी' के विमोचन के मौके पर दिल्ली के अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में भागवत ने कहा कि संघ में प्रत्येक स्वयंसेवक अपने विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए स्वतंत्र है.
इसी दौरान उन्होंने कहा, "संघ का मुख्य मूल्य यह है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता है."
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक मोहन भागवत ने यहां तक कहा कि बीजेपी के साथ मतभेद होना आम बात है. लेकिन आरएसएस बहस में नहीं, बल्कि सहमति तक पहुंचने में विश्वास करता है.
इस दौरान उन्होंने कहा, "संघ को किसी भी विचारधारा में नहीं बांधा जा सकता है. संघ किसी भी विचार में विश्वास नहीं करता है और उसे किसी भी पुस्तक से दर्शाया जा सकता है."
चुनाव से ठीक पहले मुश्किल में देवेन्द्र फडनवीस
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस को क्लीन चिट देने वाली बॉम्बे हाई कोर्ट के एक फ़ैसले को रद्द कर दिया है.
फडनवीस पर 2014 में विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में दो आपराधिक मामलों को लेकर जानकारी छिपाने का आरोप है.
इस संबंध में नागपुर मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. इस मामले में फडनवीस को कोर्ट सले क्लीन चिट मिली थी. बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी नागपुर मजिस्ट्रेट कोर्ट के फ़ैसले को कायम रखते हुए फडनवीस को क्लीन चिट दी थी.
लेकिन अब चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ के इस फ़ैसले के बाद ने अब ये स्पष्ट हो गया है कि फडनवीस के ख़िलाफ़ रिप्रेज़ेन्टेशन ऑफ़ पीपल्स एक्ट (जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951) की धारा 125-ए के तहत सुनवाई होगी.
जजों का कहना था कि निचली अदालत के फ़ैसले को लेकर 3 मई 2018 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जो फ़ैसला दिया था वो क़ानूनी तौर पर तर्कसंगत नहीं है और इस कारण इसे रद्द करने की ज़रूरत है. कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले के सुनवाई निचली अदालत करेगी और मामले को 30 मई 2016 की तारीख से आगे बढ़ाया जाएगा जिस दिन इस संबंध में एक वकील ने निचली अदालत में याचिका दायर की थी.
महाराष्ट्र में इसी महीने 288 सीटों वाली विधानसभा के लिए चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में ये फ़ैसला बेहद अहम माना जा रहा है.
19वें माह के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा जीएसटी कलेक्शन
सरकार ने मंगलवार को जीएसटी कलेक्शन के ताज़ा आंकड़े जारी किए हैं जिसके अनुसार सितंबर में जीएसटी कलेक्शन में गिरावट देखने को मिली है.
सितंबर में जीएसटी क्लेक्शन घटकर 91,916 करोड़ रुपये रहा है जबकि इससे एक महीने पहले यानी अगस्त में जीएसटी कलेक्शन 98,202 करोड़ रुपये थी. यह गिरावट 19वें माह के निचले स्तर पर है.
वित्त मंत्रालय के अनुसार एक साल पहले इसी महीने में जीएसटी कलेक्शन 94,442 करोड़ रुपये था.
माना जा रहा है कि सुस्ती की मार झेल रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ये बड़ा झटका है.
माली में सेना और जिहादियों के बीच संघर्ष
माली की सरकार ने बताया है कि बुरकीना फासो के साथ लगी सीमा में जिहादियों ने दो मिलिट्री पोस्ट पर हमला किया.
इसमें कम से कम 26 सैनिक मारे गए जबकि 60 अन्य लापता हैं. इस इलाके में अभी भी सेना और जिहादियों के बीच संघर्ष चल रहा है.
सरकार का कहना है कि उनके बहुत से हथियार भी लूट लिए गए हैं.
साल 2012 से ही माली में जिहादियों और सेना के बीच संघर्ष चल रहा है.
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटारेस माली में लगातार बढ़ती हिंसा पर चिंता जाहिर कर चुके हैं.
यहां 2012 से 2018 के बीच मरने वालों की संख्या चौगुनी हो चुकी है.
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