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बिहारः छपरा में तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या
बिहार के सारण ज़िले में गुरुवार देर रात तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई.
मृतकों की पहचान हो गई है. नौशाद कुरैशी, राजू नट और विदेशी नट को भीड़ ने मवेशी चुराने के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला.
घटना ज़िले के बनियापुर थाना अंतर्गत पिठौरी नंदलाल टोला गाँव में हुई. ग्रामीणों ने तीनों मृतकों पर मवेशी चोरी करने का आरोप लगाया है.
लेकिन छपरा के पुलिस अधीक्षक हरिकिशोर राय ने मॉब लिंचिंग की ऐसी किसी भी घटना से इनकार किया है.
उन्होंने कहा, "तीनों मृतक गाँव में भैंस चोरी कर रहे थे. इसी दौरान घर वालों की नींद खुल गई. लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और उनके साथ मारपीट की गई. इसके बाद तीनों की इलाज के दौरान मौत हो गई. मामले में तीन लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है."
हालांकि मृतकों के परिजनों का आरोप है कि उनके घरवालों को पीट-पीटकर मार डाला गया. समाचार एजेंसी एएनआई को एक शख़्स ने बताया कि मारे गए तीनों लोग ख़रीदारी के लिए वहां गए हुए थे. वहीं पर उन लोगों को घेरकर मार डाला गया.
एक स्थानीय शख़्स ने बताया कि ये तीनों लोग बलेरो गाड़ी से जा रहे थे और तभी बीच रास्ते में इन लोगों को रोक लिया गया. उन्हें रोकने वाले क़रीब 10 से 12 लोग थे. इन लोगों को घेरने के साथ ही वे चोर-चोर चिल्लाने लगे. उन्होंने बताया कि घटना सुबह क़रीब चार बजे की है. उन लोगों ने बिना कुछ देखे-सुने इन तीनों लोगों पर हमला बोल दिया और मार डाला.
वहीं मौजूद एक अन्य शख़्स ने भी घटना के बारे में यही बताया.
उन्होंने बताया कि जिस वक़्त उन पर हमला हुआ, उन लोगों ने मदद के लिए फ़ोन भी किया था लेकिन अभी इससे पहले कि वो कुछ बता पाते उनका मोबाइल छीन लिया गया. उन्होंने बताया कि पीछे से गाली-गलौच हो रही थी.
उन्होंने बताया कि फ़ोन पर यह पता नहीं चल सका कि उनके साथ कहां पर मारपीट हो रही है. इसके बाद कुछ लोग थाने पर पहुंचे और वहीं पर उन्हें पता चला कि बानीपुर गांव के सरपंच ने पुलिस स्टेशन में फ़ोन करके तीन लोगों को पकड़ने की बात बताई है.
उन्हें इस बात की भी सूचना मिली कि पुलिस की एक जीप पहले से ही उस ओर रवाना कर दी गई है लेकिन कुछ ही देर बात सूचना मिली कि उन लोगों को मार डाला गया है.
वो कहते हैं कि यह सीधे तौर पर मॉब लिंचिंग का मामला है. लोगों में पुलिस को लेकर भी भारी नाराज़गी है. उनका कहना है कि अगर पुलिस समय पर पहुंच जाती तो शायद इस घटना को होने से रोका जा सकता था.
पटना से स्थानीय पत्रकार नीरज सहाय ने घटनास्थल का दौरा किया और वहां लोगों से इस बारे में बात की.
गांव के ही लड़कों ने बताया कि वे तीनों जानवर चुराने आए थे.
नीरज सहाय को उन लड़कों ने बताया कि सुबह क़रीब चार-पांच बजे का वक़्त था. वो लोग एक ट्रॉली लेकर आए थे. उन्होंने एक बकरी तो चुरा ली थी और भैंस को चढ़ा रहे थे. तभी भैंस ने उन तीनों में से एक को सींग मार दी. जिसके बाद शोर-शराबा हुआ और गांव के लोग जमा हो गए.
हालांकि इन लड़कों ने भी मारपीट होने से इनक़ार नहीं किया है. उनका कहना है कि दो लोगों की वहीं पर मौत हो गई थी जबकि एक शख़्स ज़िंदा था.
बिहार में इस तरह की घटना पहले भी हो चुकी है. इससे पहले सितंबर 2018 में भी बेगूसराय ज़िले में भीड़ की पिटाई से तीन लोगों की मौत हो गई थी.
इसके अलावा मोतिहारी ज़िले में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर संजय कुमार पर भी कुछ लोगों ने हमला किया था.
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