कांग्रेस अपने पूर्वजों का बचाव क्यों नहीं कर पाती है?

नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी

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    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को 'मौत तक भ्रष्टाचारी नंबर वन' बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर सिर्फ़ कांग्रेस पार्टी में हलचल मची हुई है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर एक तरह का 'युद्ध' छिड़ा हुआ है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले भी गांधी-नेहरू परिवार के सदस्यों पर कई राजनीतिक और व्यक्तिगत टिप्पणी कर चुके हैं लेकिन कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस बयान ने 'सभी सीमाएं लांघ दी.'

प्रधानमंत्री ने कुछ दिन पहले प्रयागराज के कुंभ के संदर्भ में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को भी घेरा था और इससे पहले भी नेहरू और इंदिरा गांधी की नीतियों और उनके कार्यों की आलोचना के साथ ही व्यक्तिगत टिप्पणियां भी कर चुके हैं.

कांग्रेस पार्टी इस बार राजीव गांधी पर की गई टिप्पणी को लेकर बहुत ज़्यादा आक्रामक दिख रही है .

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

वहीं दूसरी ओर, विपक्षी नेताओं और ख़ासकर कांग्रेस पार्टी के नेताओं की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई किसी भी टिप्पणी को बीजेपी पूरी आक्रामकता के साथ उसे एक राजनीतिक हथियार बनाने से नहीं चूकती और इसका वह राजनीतिक फ़ायदा भी ले चुकी है.

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले मणिशंकर अय्यर के बयान से लेकर हाल ही में चौकीदार संबंधी आरोपों को भी बीजेपी ने न सिर्फ़ राजनीतिक हथियार बनाया बल्कि उसका इस्तेमाल भी किया और अभी भी कर रही है.

कांग्रेस

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सवाल उठता है कि कांग्रेस पार्टी अपने इन प्रमुख नेताओं पर भी की गई टिप्पणी पर उतनी हमलवार क्यों नहीं हो पाती है?

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित इस सवाल का जवाब बेहद ग़ुस्से में देती हैं, "राजीव जी पर दिए गए बयान की कांग्रेस पार्टी तो क्या पूरा देश ही निंदा कर रहा है. कोई व्यक्ति सत्ता के अहंकार में भाषा और अपने पद की मर्यादा लांघ जाए तो क्या हम भी वैसे ही हो जाएं."

जहां तक राजीव गांधी के बारे में मोदी की टिप्पणी का सवाल है तो ख़ुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी ट्वीट करके जवाब दिया है और कांग्रेस के कई नेताओं ने भी बेहद तल्ख़ी के साथ प्रतिक्रिया दी है.

नाम ना बताने की शर्त पर कांग्रेस के एक बड़े नेता कहते हैं, "हमने आपत्ति दर्ज कराई, विरोध किया, बयान जारी किया गया, जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं लेकिन मीडिया में कोई बताए तब न. मीडिया तो हमारी बातें लोगों को बताता ही नहीं लेकिन देश तो देख रहा है."

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बीजेपी की ख़ास रणनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ किसी टिप्पणी पर बीजेपी की आक्रामकता के लिए बीजेपी के आक्रामक प्रवक्ताओं और आईटी सेल को श्रेय दिया जाता है. वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह कहते हैं, "कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है. प्रवक्ताओं की एक बेहतरीन परंपरा रही है और उसी हिसाब से उनका प्रशिक्षण होता था. भाषा की मर्यादा रहती थी. हालांकि बीजेपी में भी पुराने नेताओं और प्रवक्ताओं में लगभग वैसे ही संस्कार थे लेकिन जब से बीजेपी का मौजूदा नेतृत्व आया है तो उसने एक नए ढंग की परंपरा विकसित की है और आक्रामकता के साथ न सिर्फ़ अपने नेता का बचाव करती है बल्कि विरोधियों पर हमलावर भी होती है."

मोदी, शाह

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जानकारों का कहना है कि कांग्रेस का शुरू से ही एक तंत्र बना हुआ है और उसी हिसाब से वह अभी भी चल रहा है लेकिन बीजेपी ने तकनीक के साथ अपने तौर-तरीकों को भी बदला है.

मणिशंकर अय्यर की नरेंद्र मोदी के बारे में की गई टिप्पणी को जिस तरीक़े से तब के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक अस्त्र के तौर पर इस्तेमाल किया उसका श्रेय बीजेपी के पारंपरिक मीडिया सेल की बजाय ख़ुद मोदी और अमित शाह द्वारा विकसित किए गए 'सोशल मीडिया तंत्र' को जाता है.

हाल ही में ख़ुद को पिछड़ी जाति का बताकर पीएम मोदी ने जहां लोगों की सहानुभूति लेने की कोशिश की वहीं 'चौकीदार चोर है' जैसे विपक्षी हमले को सोशल मीडिया में अपने सभी समर्थकों को 'चौकीदार' बनाकर उसका राजनीतिक अस्त्र के तौर पर इस्तेमाल किया.

अरविंद सिंह कहते हैं, "इस नए तंत्र में अपने झूठ को भी ढका जा रहा है और इसके लिए सोशल मीडिया को प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है. इसके ज़रिए किसी भी झूठ को इतना प्रचारित कर दिया जाता है कि लोग उसे सच ही मान लेते हैं. कांग्रेस पार्टी सोशल मीडिया कैंपेन में अभी भी न सिर्फ़ काफ़ी पीछे है बल्कि तुलनात्मक रूप से राजनीतिक और भाषाई मर्यादा का भी बीजेपी की तुलना में कहीं ज़्यादा ध्यान रखती है. लेकिन गंभीर और सोचने वाली बात ये है कि सोशल मीडिया पर परोसे गए ऐसे ही कथित सच कई बार प्रधानमंत्री के भाषणों तक में तथ्य के रूप में पेश किए जाने लगते हैं."

भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी पर तो प्रतिक्रिया देने से बचते हैं लेकिन उनके जवाब में घूम-फिर कर यही बात आती है कि 'सत्तर साल से देश लूटने वाले लोगों को अब ये बातें ख़राब तो लगेंगी ही.'

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कांग्रेस जवाब क्यों नहीं देती?

वहीं उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री के इस बयान पर कांग्रेस नेताओं में जमकर नाराज़गी है. विधायक आराधना मिश्रा कहती हैं, "ये राजनीति का गिरता स्तर है. कभी किसी प्रधानमंत्री ने ऐसी भाषा और ऐसी टिप्पणियां नहीं कीं. राजीव जी के ऊपर टिप्पणी करने वाले को हिन्दू सभ्यता और संस्कार की मर्यादा तक का नहीं पता है. वो इस दुनिया में नहीं हैं और उन्हीं की पार्टी की सरकार उन्हें क्लीन चिट दे चुकी है."

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आराधना मिश्रा कहती हैं कि इसका सीधा मतलब ये निकलता है कि बीजेपी और ख़ुद प्रधानमंत्री घबराए हुए हैं, "राहुल जी जिस तरह से उनके हर सवाल का जवाब दे रहे हैं, प्रियंका जी चैलेंज कर रही हैं, उससे उनकी घबराहट साफ़ दिख रही है. मोदी जी के इस बयान पर पूरे देश में नाराज़गी है. उन्हें इसका प्रायश्चित करना पड़ेगा."

लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र कहते हैं कि कांग्रेस ऐसी टिप्पणियों पर भी आक्रामकता के साथ जवाब देने से इसलिए बचती है क्योंकि वो बीजेपी की 'बी टीम' नहीं बनना चाहती, "आप देखिए, राहुल गांधी ख़ुद ऐसे बयानों का जवाब किस तरह से दे रहे हैं. कांग्रेस को पता है कि यदि जवाब इसी भाषा में दिए गए तो इतिहास में वो ख़ुद को मौजूदा बीजेपी से अलग नहीं दिखा पाएगी. कांग्रेस में इस तरह की टिप्पणी करने वाले को पार्टी से निलंबित भी किया गया है लेकिन बीजेपी में शायद ही किसी नेता के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई की गई हो."

यहां एक दिलचस्प बात यह भी है कि बीजेपी की आक्रामकता तभी दिखती है जब कोई आपत्तिजनक टिप्पणी या आरोप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अथवा अमित शाह पर लगते हैं. बीजेपी के अन्य किसी बड़े और पुराने नेता के ख़िलाफ़ की गई टिप्पणियों पर इतनी आक्रामक शैली में जवाब नहीं दिया जाता.

अरविंद कुमार सिंह इसकी वजह बताते हैं, "दरअसल, अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी का संगठन ठीक वैसे ही काम कर रहा है कि जैसे कि राज्यों में पार्टी संगठन करते हैं, ख़ासकर क्षेत्रीय पार्टियों के. यहां पार्टी के नेता को ही सर्वेसर्वा मानकर उसकी बातों का प्रचार-प्रसार किया जाता है और उसके ख़िलाफ़ लगे आरोपों का बचाव किया जाता है."

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