प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या पूर्वोत्तर में अपने ही एजेंडे में फंस गए

नरेंद्र मोदी

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    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

असम और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में नागरकिता संशोधन बिल 2016 के ख़िलाफ़ जारी विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है.

इस बीच, शुक्रवार की शाम गुवाहाटी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के चांगसारी में 1,123 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के भूमि पूजन समारोह में भाग लिया.

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने 2,187 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से गुवाहाटी और उत्तरी गुवाहाटी को जोड़ने वाले ब्रह्मपुत्र पर छह लेन के पुल के निर्माण कार्यों का उद्घाटन भी किया.

दो दिवसीय दौरे पर यहां आए प्रधानमंत्री ने असम के अलावा अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में भी कई बड़ी परियोजनाओं की आधारशिला रखी. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्वोत्तर के राज्यों में इतनी सारी परियोजनाओं की आधारशिला रखने की बात को यहां हो रहे विरोध को कम करने के एक प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है.

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लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों के लिए इतना कुछ लेकर आए प्रधानमंत्री को इसके बावजूद शुक्रवार को ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के सदस्यों ने काले झंडे दिखाकर अपना विरोध जताया.

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के असम दौरे को लेकर नागरिकता संशोधन बिल पर अपनी नाराज़गी व्यक्त करते हुए ताई आहोम युवा परिषद ने शनिवार को 12 घंटे का असम बंद बुलाया है जिसका ऊपरी असम के कई ज़िलों में व्यापक असर देखने को मिला.

विरोध कर रहे संगठनों ने शनिवार को दूसरे दिन भी गुवाहाटी में प्रधानमंत्री मोदी को काले झंडे दिखाए और कई जगह उनके पुतले फूंके गए.

अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में शनिवार को ग्रीनफ़ील्ड होलोंगी एयरपोर्ट और एफ़टीआईआई के स्थाई परिसर की आधारशिला रखने के बाद मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "मुझे यहां 4,000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास करने का अवसर मिला है. प्रदेश में 13,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त परियोजनाएं चल रही हैं."

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"पिछली सरकारों ने दशकों से असम की उपेक्षा की है लेकिन हम इसे बदलने के लिए यहां हैं. न्यू इंडिया तभी बन सकता है जब नॉर्थ ईस्ट को अच्छी तरह से विकसित किया जा सके."

इसके बाद असम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अपना पूरा भाषण पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी सरकार की विकास परियोजनाओं पर रखा.

नागरिकता संशोधन बिल पर अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "नागरिकता से जुड़े क़ानून को लेकर बहुत बड़ा भ्रम फैलाया जा रहा है. यह भ्रम फैलाने वाले वही लोग है जिन्होंने यहां घुसपैठ को रोकने के लिए नेशनल सिटीजन रजिस्टर को 36 साल बीत जाने के बाद भी लागू नहीं किया. लेकिन हमारी सरकार सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एनआरसी का काम तेज़ी से पूरा करने में लगी है."

प्रधानमंत्री ने यहां तक कहा, "विरोध करने वाले हमारी जनसभा में आए लोगों को देखें, उन्हें असम के मिजाज़ का पता चल जाएगा."

प्रधानमंत्री ने असम और पूर्वोत्तर राज्यों के विकास में अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनवाने के साथ ही बिना किसी का नाम लिए बांग्लादेशी घुसपैठ और धार्मिक अत्याचार के तहत भारत में शरण लेने वाले अल्पसंख्यक लोगों का ज़िक्र कर हिंदू मतदाताओं को साफ़ संदेश दे दिया.

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उन्होंने अपने भाषण में असम के संत, धर्म गुरुओं और जननायकों को असमिया भाषा में प्रणाम कर लोगों को भावनात्मक तौर पर प्रभावित करने की कोशिश भी की.

क्या नरेंद्र मोदी इतनी तादाद में आधारशिलाएं रख और भावनात्मक स्तर पर यहां के लोगों को प्रभावित करने के प्रयास से पूर्वोत्तर की कुल 25 लोकसभा सीटों पर असर डाल पाएंगे?

इस सवाल का जबाव देते हुए असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद के पूर्व नेता मनोज कुमार दत्ता ने बीबीसी से कहा, "दरअसल मोदी जी बार-बार यहां आ रहे हैं और यह प्रयास करते दिख रहें है कि उनकी सरकार इस क्षेत्र के विकास को लेकर काफ़ी गंभीर है. लेकिन वो यहां मौजूदा समय में हो रहे विरोध को समझने की कोशिश नही कर रहे हैं. मोदी जी को लगता है कि उनके यहां आने से क्षेत्र के लोगों की नाराज़गी कम होगी लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है.''

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दत्ता कहते हैं, ''नागरिकता संशोधन बिल को लेकर लोगों में भारी नाराज़गी है. मोदी जी और उनकी पार्टी को यह बात समझनी होगी कि इस बिल को लेकर केवल असम ही नहीं पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में विरोध हो रहा है. बीजेपी और उनके साथी दलों के लोगों ने भी प्रधानमंत्री से इस बिल की शर्तों से पूर्वोत्तर राज्यों को अलग रखने की बात कही है."

क्या प्रधानमंत्री मोदी के भाषण से आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को फ़ायदा मिलेगा?

इसका जवाब देते हुए दत्ता कहते है, "प्रधानमंत्री ने साल 2016 के विधानसभा चुनाव में भी ऐसा ही भाषण दिया था और लोगों ने उन पर भरोसा कर यहां पहली दफ़ा बीजेपी की सरकार बनाई लेकिन अब उनके भाषण से पार्टी को यहां फ़ायदा होने वाला नहीं है. अगर बीजेपी इस बिल पर लोगों की नाराज़गी को ऐसे ही दरकिनार करती रही तो आनेवाले लोकसभा चुनाव में उनको एक भी सीट नहीं मिलेगी."

असम में नागरिकता संशोधन के अलावा छह जनजातियों को अनुसूचित जनजाति यानी एसटी का दर्जा देने की बात को लेकर भी बीजेपी से जनजातीय लोग ख़फ़ा है. साल 2016 के असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इन छह जनजातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का वादा किया था.

हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को अपने भाषण में कहा कि उनकी सरकार इन छह जनजातियों को एसटी का दर्जा देने की दिशा में काम कर रही है और जिन जनजातियों को पहले से एसटी दर्जा मिला हुआ है उनको सरकार कोई नुकसान होने नहीं देगी.

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क्या प्रधानमंत्री के ऐसे भाषण से आने वाले समय में यहां हो रहा विरोध धम जाएगा और जनजाती तबके के लोग बीजेपी की बात मान लेंगे?

पूर्वोत्तर राज्यों की राजनीति को नजदीक से समझने वाले रुपक भट्टाचार्य कहते हैं, "बीजेपी और उसके सहयोगी संगठन असम और पूर्वोत्तर में हिंदुत्व एजेंडा पर चुनावी रणनीति बना रहे हैं लेकिन हिंदुत्व एजेंडा केवल हिंदी पट्टी वाले राज्यों में ही कामयाब हो सकता है. पूर्वोत्तर के लोगों की सोच बिलकुल अलग है. वो धर्म के नाम पर कोई फ़ैसला नहीं लेते. यहां सवाल जातीय संकट का है."

वो कहते हैं, "असम में घुसपैठ की समस्या सालों से है. बीजेपी को यहां अपनी राजनीतिक रणनीति बदलनी पड़ेगी. यहां के लोगों की भावनाओं को समझना होगा. जिस सहजता से बीजपी इस बिल के बारे में लोगों को समझा रही है अगर इसकी सच्चाई वैसी होती तो पूर्वोत्तर के राज्य इसका विरोध नहीं करते. यहां सवाल जाति, भाषा और उनकी संस्कृति पर मंडरा रहे संकट का है. यहां धर्म के नाम पर राजनीति नहीं चलेगी. यहां केवल जातीयता के आधार पर ही लामबंद किया जा सकता हैं"

प्रधानमंत्री के दौरे का विरोध और ऊपरी असम में बंद के प्रभाव के बावजूद असम प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता विजय गुप्ता ऐसी किसी भी नाराज़गी की बात को स्वीकार नहीं करते.

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वो कहते हैं, "मोदीजी की रैली में उमड़ी भीड़ को देखने के बाद भी क्या आप यही कहेंगे कि असम के लोग नाराज़ हैं. किसी के आठ-दस झंडे दिखाने से कुछ नहीं होता. जनता के बीच में कहीं कोई नाराज़गी नहीं है. आसू के लोग अपने कार्यालय से अगर कुछ झंडे दिखाते हैं तो उससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. प्रदेश में हमारे प्रति काफ़ी सकरात्मक माहौल है."

अगर माहौल सकरात्मक है तो चुनाव से ठीक पहले इतनी सारी परियोजनाओं की आधारशिला और रैलियों में प्रधानमंत्री मोदी के ये भाषण क्या संकेत दे रहे हैं?

इसका जवाब देते हुए विजय गुप्ता कहते हैं, "पूर्वोत्तर के राज्यों पर इससे पहले किसी सरकार ने इतना ध्यान नहीं दिया. हमारी सरकार आने के बाद यहां बहुत काम हुए हैं. चाहे रेल-रोड़ कनेक्टिविटी हो या अन्य बुनियादी विकास की बात हो. यहां के लोग इस बात को महसूस कर रहे हैं. हमारी पार्टी धर्म की राजनीति नहीं करती. कुछ लोग इन सब बातों को लेकर भ्रम फैला रहें है. हमारी पार्टी एक धर्म निरपेक्ष पार्टी है और सबका साथ सबका विकास हमारा मूल मंत्र है और इसमें सभी धर्म के लोग आते है."

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