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तीन तलाक़ और सिस्टम से जिंदग़ी की जंग हार गई बरेली की रज़िया
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बरेली (उत्तर प्रदेश) से लौटकर, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
तीन तलाक़ को सुप्रीम कोर्ट ने भले ही अवैध करार दिया हो और उस पर क़ानून बनाने की जद्दोजहद जारी हो लेकिन न तो तीन तलाक़ की घटनाएं कम हो रही हैं और न ही पीड़ित महिलाओं की मुसीबतें.
ताज़ा उदाहरण बरेली की उस महिला का है जिन्होंने पति के तीन तलाक़ को मानने से इनकार तो कर दिया लेकिन उसके बाद उन्होंने जो लड़ाई लड़नी पड़ी, उसके आगे वो तलाक़ के साथ-साथ ज़िंदग़ी की जंग भी हार गई.
बरेली के कटघर इलाक़े की रहने वाली रज़िया के पति ने क़रीब पांच महीने पहले उन्हें फ़ोन पर तलाक़ दे दिया था.
रज़िया ने इस तलाक़ को मानने से इनकार कर दिया और पति के घर में ही रहती रही.
उनके परिजनों का दावा है कि रज़िया का पति जब दिल्ली से लौटा तो उसने रज़िया को इस 'नाफ़रमानी' की ऐसी सज़ा दी जिसका अंजाम रज़िया की मौत के रूप में सामने आया.
ज़िंदगी की जंग
रज़िया के परिवार वालों का आरोप है कि पति नईम ने रज़िया को कमरे में बंद करके भूखा-प्यासा रखा.
परिवार वालों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने रज़िया को अस्पताल में भर्ती कराया जहाँ वो कुछ दिन तक ज़िंदगी की जंग लड़ते-लड़ते हार गई और 10 जुलाई को लखनऊ ले जाते वक़्त उसकी मृत्यु हो गई.
परिवार वालों का आरोप है कि रज़िया को इस दौरान मारा-पीटा गया, खाना-पीना नहीं दिया गया और उसे इस स्थिति में ला दिया गया जहाँ उसकी मौत होनी तय थी.
हालांकि बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (इंचार्ज) सतीश कुमार कहते हैं कि मेडिकल रिपोर्ट में शरीर पर चोट और मारे जाने की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन ख़ून की कमी, दिमाग़ का सिकुड़ना और अक़्सर बेहोश होने जैसे कारणों से मौत हुई है, ये पता चला है.
एसएसपी सतीश कुमार ने बीबीसी को बताया, "तलाक़ के बाद रज़िया की ओर से पांच मई को मुक़दमा दर्ज कराया गया था तो उसके बाद उनकी मेडिकल जांच भी कराई गई थी. रिपोर्ट में किसी तरह के चोट के प्रमाण नहीं मिले थे, न तो अंदर और न ही बाहर. इनकी दवा भी कराई गई."
कैसे हुई मौत?
एसएसपी के मुताबिक़ भूख-प्यास से मौत हुई या नहीं, इसके बारे में डॉक्टर ज़्यादा सही जानकारी दे सकते हैं लेकिन रिपोर्ट में यही बातें आई थीं. लेकिन परिवार वालों का कहना है कि जब उन लोगों ने एफ़आईआर दर्ज कराई थी तब रज़िया के शरीर पर चोट के निशान थे.
रज़िया की बहन सारा ने बीबीसी को बताया, "पुलिस वालों ने बड़ी मुश्किल में तो रिपोर्ट लिखी. हम लोग उनसे बार-बार ये कहते रहे कि रज़िया को परेशान किया जा रहा है, उसे खाना तक नहीं दिया जा रहा है, उसकी हालत ख़राब है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. जब हम उसे लेकर अपने घर स्वालेनगर ले आए और फिर शिकायत की तब जाकर पुलिस वालों ने रिपोर्ट लिखी."
सारा बताती हैं कि शरीर पर तब चोट के निशान साफ़ दिख रहे थे लेकिन मेडिकल जाँच कराने और मामले थाने से ऊपर जाने में कई दिन लग गए और ऐसे में चोट के निशान मिट गए होंगे.
सारा का आरोप है कि अगर पुलिस ने उनकी बात उसी समय सुनी होती और कार्रवाई की होती तो अब तक अभियुक्त पुलिस की गिरफ़्त में आ गए होते.
मामा के ख़िलाफ़ मुक़दमा
पुलिस ने फ़िलहाल परिवार वालों की शिक़ायत पर रज़िया के पति नईम, उनकी मां, नईम के दो भाइयों और उनके एक मामा के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया है लेकिन अभी तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं की है.
एसएसपी के मुताबिक़ रज़िया की मौत के बाद अभियुक्तों पर दर्ज मुक़दमों में धाराएं बढ़ा दी गई हैं और जल्द ही उनकी गिरफ़्तारी हो जाएगी.
बरेली की समाजसेविका फ़रहत नक़वी का कहना है कि रज़िया को अस्पताल वालों ने भी बिना सही इलाज के ही घर भेज दिया जबकि वो मरणासन्न थीं.
उनका कहना था, "जब इलाज के लिए सीधे डीएम ने दख़ल दिया तब कहीं जाकर रज़िया को दोबारा अस्पताल में भर्ती किया गया."
अचानक रज़िया को दिया तलाक़
फ़रहत इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही को ज़िम्मेदार ठहराती हैं. उनका कहना है कि जब तक अभियुक्त बरेली में ही मौजूद थे और हम लोगों ने इसकी जानकारी भी दी, तब तक उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया गया जबकि पुलिस दो महीने पहले ही मुक़दमा दर्ज कर चुकी थी.
उनका कहना है कि अब जब सभी लोग फ़रार हो गए हैं तब पुलिस उन्हें ढूंढ़ रही है.
स्वालेनगर की रहने वाली रज़िया की शादी 13 साल पहले किला नई बस्ती के रहने वाले नईम से हुई थी.
रज़िया की बहन बताती हैं कि शादी के कुछ दिनों बाद से ही नईम उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगा, बावजूद उसके रज़िया ससुराल में ही रही.
लेकिन बाद में नईम दिल्ली रहने लगा और फिर एक दिन उसने अचानक रज़िया को तलाक़ दे दिया. रज़िया के छह साल का एक बेटा भी है.
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