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प्रेस रिव्यू: शाहरुख़ की चचेरी बहन पाकिस्तान में चुनाव लड़ेंगी
दैनिक भास्कर के मुताबिक़ बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ ख़ान की चचेरी बहन नूर जहां पाकिस्तान में 25 जुलाई को होने वाले आम चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रही हैं.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वह पेशावर की ख़ैबर पख़्तूनख़्वा संसदीय सीट से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेंगी.
नूर अपने परिवार के साथ शाह वाली कताल इलाक़े में रहती हैं. यह इलाक़ा क़िस्सा ख़्वानी बाज़ार से सटा हुआ है. नूर शाहरुख़ से मिलने दो बार भारत आ चुकी हैं. दोनों परिवारों के बीच काफ़ी अच्छे रिश्ते बताए जाते हैं.
नूर के भाई ने बताया कि उनके परिवार के साथ राजनीतिक विरासत जुड़ी हुई है. नूर पहले भी सभासद रह चुकी हैं.
साल 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान शाहरुख़ के पिता मीर ताज मोहम्मद दिल्ली आ गए थे, लेकिन चाचा ग़ुलाम मोहम्मद ने पाकिस्तान में ही रहने का फ़ैसला किया.
ग़ुलाम मोहम्मद के दो बेटे (मंसूर ख़ान और मकसूद ख़ान) और एक बेटी (नूर) हैं.
1978 में शाहरुख़ पहली बार अपने पिता के साथ पेशावर पहुंचे थे. वहीं, नूर 1997 में पहली बार मुंबई आई थीं.
खैनी पर पाबंदी की तैयारी
दैनिक जागरण के मुताबिक बिहार में शराब पर प्रतिबंध लगने के दो साल बाद अब सरकार खैनी पर भी बैन लगाने की तैयारी कर रही है. नीतीश सरकार जल्द ही राज्य में खैनी के बेचने और खाने पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है.
तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में राज्य सरकार को तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही संस्था सोशियो इकोनॉमिक एंड एजुकेशनल सोसाइटी (सीड्स) ने खैनी पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है.
सीड्स के कार्यपालक निदेशक दीपक मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार खैनी को खाद्य सामग्री की श्रेणी में लाए और फिर इसे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट-2006 के तहत प्रतिबंधित करे.
उन्होंने बताया कि इसी एक्ट के तहत राज्य में गुटखा और पान मसाले को प्रतिबंधित किया गया है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में 25.6 प्रतिशत लोग धुआंरहित तंबाकू का सेवन करते हैं, इनमें सबसे अधिक संख्या खैनी खाने वालों की है.
राज्य सरकार ने केंद्र को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में खैनी को खाद्य उत्पाद के रूप में सूचित करने का अनुरोध किया गया है. खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) द्वारा खाद्य उत्पाद के रूप में अधिसूचित किए जाने के बाद सरकार के पास स्वास्थ्य आधार पर खैनी पर प्रतिबंध लगाने की शक्ति होगी.
कुर्सी पर बैठने को लेकर दलित महिला पर हमला
जनसत्ता के मुताबिक गुजरात के अहमदाबाद ज़िले में एक स्कूल में कुर्सी पर बैठने को लेकर भीड़ ने एक दलित महिला पर कथित रूप से हमला कर दिया. पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि घटना वलथरा गांव में हुई.
पुलिस ने बताया कि घटना दो दिन पहले वलथरा गांव में हुई. पुलिस ने बताया कि एक आंगनवाड़ी में कार्यरत पल्लवीबेन जाधव (45) को आधार कार्ड वितरित करने की जिम्मेदारी दी गई थी.
काठ पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, स्थानीय नागरिक जयराज वेगड यह देखकर नाराज़ हो गया कि पल्लवीबेन अपना कार्य करने के दौरान कुर्सी पर बैठी हुई है.
पल्लवीबेन के पति गणपत जाधव की ओर से दर्ज शिकायत के अनुसार, जयराज ने सवाल किया कि एक दलित होते हुए वह कुर्सी पर क्यों बैठी हुई है. जयराज ने कुर्सी को पैर से मारा जिससे पल्लवीबेन गिर गईं.
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