मरीज़ के सिरहाने कटा पैर लगाने का पूरा मामला

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- Author, प्रदीप श्रीवास्तव
- पदनाम, झांसी से, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश के झांसी के एक अस्पताल में लापरवाही का चौंका देने वाला मामला सामने आया है.
यहां महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक शख़्स के सिर के नीचे तकिये की जगह उसी का कटा हुआ पैर लगा दिया गया.
सोशल मीडिया पर ये तस्वीर ख़ूब साझा की जा रही है.
एक हादसे में बुरी तरह पैर ज़ख़्मी होने पर इस शख़्स को अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में लाया गया था. इस कारण डॉक्टरों को उसका पैर काटकर अलग करना पड़ा था.
लेकिन ऑपरेशन के बाद 25 साल के घनश्याम के सिरहाने उसी का कटा हुआ पैर लगा दिया गया.
इसके बाद मरीज़ के परिवार वालों और अन्य मरीजों ने वहां हंगामा शुरू कर दिया. मामले के तूल पकड़ने के बाद कॉलेज प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं.
मौके पर मौजूद डॉक्टर और नर्स सस्पेंड

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कॉलेज की प्रिंसिपल डॉक्टर साधना कौशिक का कहना है, ''घटना के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया है. रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.''
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर हरीश आर्या का कहना है कि मौके पर उपस्थित सभी लोगों को उनकी लापरवाही की वजह से सस्पेंड कर दिया गया है. इनमें इमरजेंसी ऑफिसर डॉक्टर महेंद्र पाल सिंह, सीनियर रेजिंडेट ऑर्थोपेडिक डॉक्टर आलोक अग्रवाल, सिस्टर इंचार्ज दीपा नारंग और नर्स शशि श्रीवास्तव शामिल हैं.
अस्पताल में मौजूद स्टाफ में से कोई इस मसले पर बात करने के लिए तैयार नहीं हुआ. घनश्याम स्कूल की बस में क्लीनर का काम करते हैं. बीते शनिवार को मऊरानीपुर के मुख्य मार्ग पर बस के सामने आ रहे ट्रैक्टर से भिड़ंत बचाने पर उनकी बस पलट गई थी.
बस में घनश्याम के अलावा स्कूल के बच्चे भी सवार थे. दुर्घटना में आधा दर्जन स्कूली बच्चे भी घायल हुए हैं. मौके पर स्कूल प्रशासन और घायलों के परिवारों को बुलाया गया और उन्हें झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज भेजा गया.

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घनश्याम की पत्नी हेमवती कहती है, ''घर में कमाने वाले वो अकेले ही थे. पर अब विकलांग होने पर काम मिलेगा या नहीं कुछ कह नहीं सकते.''
घनश्याम के परिवार वालों का ये भी कहना है कि अस्पताल में इलाज को लेकर कई तरह की लापरवाही बरती गई हैं. इस कारण उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाया गया है.
दूसरी ओर अस्पताल के एक डॉक्टर नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं, ''मरीज़ कटे हुए पैर को अपने साथ लाया था, जिसकी ज़रूरत ही नहीं थी. स्ट्रेचर पर भी वह उसे अपने साथ ही लिए हुआ था.''
आगे वे कहते हैं कि ऐसा लगता है कि किसी ने जान-बूझकर शरारत करते हुए उसे मरीज़ के सिरहाने रख दिया. क्योंकि डॉक्टर पेशे से जुड़े लोग ऐसा करने से पहले सौ बार सोचेंगे.

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झांसी स्थित मेडिकल कॉलेज का नाम रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर रखा गया है. कालेज में एमबीबीएस व पीजी की पढ़ाई होती है.
यह बुंदेलखंड का एक मात्र मेडिकल कॉलेज है, जिस पर मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के एक दर्जन ज़िलों की एक करोड़ आबादी के दवा-इलाज का भार है. यहां प्रतिदिन करीब दो हज़ार मरीज़ इलाज के लिए ओपीडी में आते हैं, जबकि दो सौ से ज्यादा मरीज़ वॉर्ड में भर्ती होते हैं.
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