नगालैंड असेंबली में हो पाएगी महिलाओं की एंट्री?

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- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पूर्वोत्तर में नगालैंड ऐसा राज्य है जहां आज तक एक भी महिला विधायक नहीं बनी है.
नगालैंड में 27 फ़रवरी को मतदान होना है. इस बार के चुनाव में पांच महिलाएं विधायक बनने के लिए अपनी किस्मत आज़मा रही हैं. नगालैंड के इतिहास में ये संख्या सबसे ज़्यादा है.
पांच महिलाएं मैदान में
विधानसभा चुनाव में जो पांच महिलाएं चुनाव मैदान में हैं, उनमें से दो नेशनल पीपल्स पार्टी, एक बीजेपी से, एक नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक पीपुल्स पार्टी (एनडीपीपी) और एक निर्दलीय उम्मीदवार हैं.
इन उम्मीदवारों में से नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक पीपुल्स पार्टी (एनडीपीपी) की उम्मीदवार अवान कोन्याक इकलौती ऐसी हैं जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है. अवान के पिता राज्य में मंत्री रह चुके हैं. अवान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए की पढ़ाई पूरी की है.

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कौन-कौन हैं महिला उम्मीदवार
नेशनल पीपल्स पार्टी की उम्मीदवार के. मांगयांगपुला चॉंग सरकारी कर्मचारी रह चुकी हैं. नोकसेंग विधानसभा सीट से वो नेशनल पीपल्स पार्टी की उम्मीदवार हैं. चॉंग पेशे से डॉक्टर हैं. उनकी उम्र 45 साल है और उन्होंने श्रीलंका से मेडिसीन की पढ़ाई की हैं. उनके पति बिज़नेसमैन हैं.
नेशनल पीपल्स पार्टी की दूसरी उम्मीदवार वेडी यू क्रोमी दीमापुर-तीन विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं. 27 साल की क्रोमी शादीशुदा हैं. वो और उनके पति दोनों समाज सेवा के काम से जुड़े हैं. क्रोमी ने ग्रैजुएशन तक की पढ़ाई की है.
निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भाग्य आज़मा रही हैं रेखा रोज़ डुक्रू. रेखा चिज़ामी विधानसभा सीट से मैदान में हैं. 35 साल की रेखा ने मैंगलौर विश्वविद्यालय से ग्रैजुएशन की पढ़ाई की है. वो अविवाहित हैं और खुद को एक उद्यमी मानती हैं.

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बीबीसी से बातचीत में रेखा ने कहा, "मुझे राजनीति का अनुभव नहीं हैं. आज भी नगालैंड में राजनीति को पुरुषों का क्षेत्र समझा जाता है. इसी सोच को मैं तोड़ना चाहती हूं. मेरे 10 भाई बहन हैं. अपने परिवार से मुझे जितना सपोर्ट मिला उतना ही विरोध का सामना भी करना पड़ा है."
रेखा ने पत्रकारिता की पढ़ाई भी की है. अपने चुनाव प्रचार के बारे में वो कहती हैं, "मेरे दिन की शुरुआत सुबह साढ़े छह बजे हो जाती है. पैसे ज़्यादा नहीं हैं, इसलिए घर-घर घूमकर चुनाव प्रचार कर रही हूं."
अपनी जीत के लिए कितनी आश्वस्त हैं रेखा? इस सवाल के जवाब में वो कहती हैं, "मैं जीतूं या हारूं, मैं दोनों ही सूरत के लिए तैयार हूं."

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भारतीय जनता पार्टी ने भी इस बार विधानसभा चुनाव में एक महिला उम्मीदवार खड़ा किया है. राखिला 66 साल की हैं पहले तीन बार चुनाव लड़ चुकी हैं. सभी महिला उम्मीदवारों में राखिला सबसे कम पढ़ी-लिखी हैं. वो नौवीं पास हैं. राजनीति और समाज सेवा में उनकी रुचि है, उनके पति सरकारी टीचर हैं.
नगालैंड का इतिहास
देश के 16वें राज्य के तौर पर नगालैंड की स्थापना एक दिसंबर 1963 को हुई. नगालैंड विधानसभा में कुल 60 सीटें है. राज्य की कुल आबादी 22 लाख की है. वहां 16 जनजातियां पाई जाती हैं.
'नगालैंड इलेक्शन वॉच' की संयोजक हैकानी जखालू के मुताबिक नगालैंड में ज़्यादातर जनजातियां पितृ सत्तात्मक हैं. इसलिए पढ़ाई-लिखाई में आगे होने के बावजूद यहां महिलाएं राजनीति में आगे नहीं रहती हैं.

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हैकानी पिछले कई सालों से नगालैंड की राजनीति को काफ़ी क़रीब से देखती आई हैं. उनके मुताबिक, "इससे पहले भी दो-चार महिलाएं नगालैंड की राजनीति में उम्मीदवार रही हैं. लेकिन इस बार का विधानसभा चुनाव थोड़ा अलग है."
हैकानी इसकी वजह बताती हैं, "पिछले एक साल से नगालैंड में निगम चुनाव में महिला आरक्षण की मांग ज़ोर-शोर से उठी है. इसको लेकर राज्य में काफ़ी प्रदर्शन हुए, हिंसा भी हुई, कुछ जानें भी गईं, मामला कोर्ट भी पहुंचा. लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पाया है."
हैकानी आगे बताती हैं, "पिछले साल से सबक लेते हुए सबसे अच्छी बात यही हुई है कि पांच महिलाएं इस बार के विधानसभा चुनाव के लिए आगे आई हैं. उस हिंसात्मक प्रदर्शन के बाद महिलाएं पीछे नहीं हटी हैं, ये अपने आप में इस विधानसभा चुनाव को अलग बनाता है."

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महिलाओं का राजनीतिक सफ़र
2011 की जनगणना के मुताबिक नगालैंड में 76 फ़ीसदी महिलाएं पढ़ी-लिखी हैं.
नगालैंड में कामकाजी महिलाओं की अर्थव्यवस्था में भागीदारी भी पुरुषों के मुक़ाबले कम नहीं, लेकिन केवल राज्य की राजनीति में ही वो पिछड़ी हैं.
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक 2013 में कुल 188 उम्मीदवारों में से दो महिला उम्मीदवार थीं.
2008 के विधानसभा चुनाव में कुल 218 उम्मीदवारों में से चार महिला उम्मीदवार थीं.
लेकिन आज तक कोई महिला विधायक यहां नहीं चुनी गई.
2018 के विधानसभा चुनाव में कुल 195 उम्मीदवार हैं जिनमें से पांच महिलाएं हैं.
लेकिन इस बार भी ये पांच महिलाएं नगालैंड विधानसभा का बंद किला भेद पाएंगी या नहीं, इसका पता तीन मार्च को चलेगा जब विधानसभा चुनाव के नतीजों का एलान होगा.












