राहुल गांधी जल्द कांग्रेस अध्यक्ष बनेंगे: सचिन पायलट
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, जयपुर से
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी अगले कुछ हफ्तों के भीतर पार्टी अध्यक्ष का पद संभाल सकते हैं. ऐसा पार्टी के नेता सचिन पायलट का कहना है जो राहुल गाँधी के इनर सर्किल के सदस्यों में शुमार होते हैं.
इस समय राहुल गाँधी की माँ सोनिया गाँधी पार्टी अध्यक्ष हैं, लेकिन लंबे समय से अस्वस्थ होने के कारण वो राजनीति में कम सक्रिय हैं. सोनिया गाँधी 1885 में बनी कांग्रेस पार्टी की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष बने रहने का रिकॉर्ड रखती हैं.
राजस्थान के जयपुर में बीबीसी हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में सचिन पायलट ने कहा कि पार्टी पदों के लिए जल्द ही चुनाव होने जा रहे हैं.

उन्होंने बताया "बहुत जल्द ही हम नए अध्यक्ष की घोषणा करेंगे जिसमें सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं की सर्वसम्मति होगी और राहुल गाँधी उपाध्यक्ष से अध्यक्ष चुने जाएंगे."
उन्होंने आगे बताया, "इसकी पूरी प्रक्रिया होगी- ब्लॉक, ज़िला, प्रदेश, ऑल इंडिया लेवल पर अलग-अलग चुनाव होते हैं, लोग अपनी बात को रखते हैं और सर्वसम्मति से ये एक राय बनने वाली है."

राजनीतिक हलकों में बीते कुछ समय से पार्टी की अध्यक्षता के लिए राहुल गाँधी के नाम पर चर्चा चल रही है. राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट कहते हैं, "इसकी औपचारिक घोषणा जल्द ही हो जाएगी. मुझे लगता है कि ये बस चंद हफ्तों की बात है."
सचिन पायलट का दावा है कि इस प्रक्रिया के बाद पार्टी की "एक नई शुरुआत होगी". 2014 के आम चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद इसके पुनर्निर्माण की ज़रूरत पर खुद राहुल गाँधी ज़ोर देते आए हैं.
कांग्रेस पार्टी पर नज़र रखने वाले पत्रकारों के मुताबिक़ इस पर अब तक कुछ अधिक अमल नहीं हो सका है.
'भाजपा-कांग्रेस में गैप बस एक प्रतिशत का'

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लेकिन सचिन पायलट के अनुसार पार्टी के पुनर्निर्माण का काम काफी पहले से शुरू हो चुका है, हाँ उनके अनुसार इसमें और गति आनी चाहिए.
वो कहते हैं "मुझे चार साल पहले राजस्थान का अध्यक्ष बनाया गया. छह-सात राज्यों में अलग-अलग अध्यक्ष बने हैं. लेकिन इतनी बड़ी पार्टी में और गति आनी चाहिए ये हम मानते हैं. काफी काम हुआ है और अधिक काम करना बाक़ी है."
सचिन पायलट का दावा है कि अगले साल होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा को शिकस्त देने के लिए पार्टी पूरी तरह से तैयार है. भाजपा ने 2014 के आम चुनाव में राज्य की लोकसभा की सभी 25 सीटें जीती थीं और इससे एक साल पहले विधानसभा चुनाव में कुल 200 सीटों में से 163 सीटें जीती थीं. कांग्रेस को केवल 21 सीटें हासिल हुई थीं
सचिन पायलट कहते हैं कि राज्य में पार्टी अब पहले से अधिक मज़बूत है. वो कहते हैं, "2014 में जो लोकसभा चुनाव हुआ था उसमे भाजपा को मिले थे 56 प्रतिशत वोट. कांग्रेस को मात्र 30 प्रतिशत वोट मिले थे. जो गैप था वो 26 प्रतिशत का था. फिर गाँवों में चुनाव हुए और हमारा वोट शेयर बढ़ कर 46 प्रतिशत हो गया और भाजपा का घटकर 47 प्रतिशत हो गया. अब गैप मात्र एक प्रतिशत का है."

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इसके इलावा पायलट के अनुसार अब तक विधानसभा की पांच सीटों के लिए मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस ने तीन सीटें हासिल की हैं. उनका कहना है कि कि एक साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में जीत उनकी पार्टी की होगी.
लेकिन पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री पद का दावेदार कौन होगा? चुनाव से पहले किसे उम्मीदवार की तरह पेश किया जाएगा? पार्टी में इस मुद्दे पर मतभेद की ख़बरें हैं. दो बार मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत राजस्थान के और पार्टी के एक कद्दावर नेता हैं और एक वरिष्ठ स्थानीय पत्रकार के अनुसार सचिन पायलट की मेहनत के बावजूद गहलोत की मदद के बग़ैर पार्टी चुनाव नहीं जीत सकती.
गहलोत इस समय पार्टी के महासचिव हैं और गुजरात के मामलों के इंचार्ज. दिसंबर में गुजरात विधानसभा में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया तो गहलोत की साख और भी बढ़ेगी और साथ ही राजस्थान के सबसे अहम पद पर बैठने की उम्मीद भी.
'भाजपा के छलकपट से जीतना ज़रूरी है'

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सचिन पायलट के अनुसार वो पद की परवाह नहीं करते और उन्हें गहलोत जैसे वरिष्ठ नेता समेत पार्टी के सभी नेताओं का सहयोग हासिल है.
वो कहते हैं "मैं 26 साल का था तो मेरी पार्टी ने मुझे सांसद बनने का मौक़ा दिया था. जब मैं 31 साल का था मैं केंद्रीय मंत्री बन गया, 35 की उम्र में मुझे राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया. आज भी मैं ये उम्मीद करूँ कि पार्टी मुझे देती रहे तो ये ठीक नहीं है."
उनके अनुसार "पद किसे मिलता है ये बड़ी बात नहीं. भाजपा के छलकपट से, वो क्या खेल खेलेंगे, वो कैसे धार्मिक भावनाओं को भड़काएंगे, समाज को बाटेंगे, राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए दंगे-फसाद करेंगे उस पर हम कैसे नियंत्रण करेंगे- वो बहुत महत्वपूर्ण है."
भाजपा का कभी पूरा ना होने वाला सपना

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भाजपा का दावा है कि वो एक कांग्रेस-मुक्त भारत बनाएगी. इस दावे के बारे में सचिन पायलट कहते हैं कि "ये भाजपा का एक सपना है जो कभी पूरा नहीं हो सकता."
पायलट के अनुसार सियासी लड़ाई में आपसी नफ़रत को कोई जगह नहीं है. वो कहते हैं "हम भी सरकार में रहे. राजीव गाँधी जब प्रधानमंत्री बने तो हमारे 425 सांसद थे, भाजपा के आज तो केवल 280 सांसद हैं. मुझे याद नहीं कि राजीव गाँधी ने कहा हो हम भाजपा-मुक्त भारत बनाना चाहते हैं."
"राजनीति में हम अलग-अलग दल के तो हो सकते हैं लेकिन हम एक दूसरे के दुश्मन तो नहीं हैं."
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