नज़रिया: 'मिनी बजट की तरह हैं जीएसटी पर नए एलान'

अरुण जेटली

इमेज स्रोत, Reuters

जीएसटी को लेकर सवालों और आलोचनाओं का सामना करने के बाद केंद्र सरकार ने अब इसमें कुछ बदलाव किए हैं.

शुक्रवार को हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में कई अहम फ़ैसले लिए गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली पहले ही जीएसटी की समीक्षा करके इसमें बदलाव लाने की बात कह चुके थे.

जीएसटी काउंसिल की मीटिंग के बाद बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कई ऐलान किए. इन घोषणाओं की मुख्य बात क्या रही और इससे कारोबारियों पर क्या असर पड़ेगा, इस बारे में बीबीसी संवाददाता आदर्श राठौर ने वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार एम.के. वेणु से बातचीत की. पढ़ें उनकी राय:

जीएसटी को लेकर हुए नए एलानों में सबसे अहम बात यह है कि छोटे उद्योगों को राहत मिली है.

जिन छोटे उद्योगों का बिज़नेस टर्नओवर कम होता था, उन्हें महीने में तीन-तीन बार यानी साल 36-37 बार रिटर्न फाइल करना पड़ता था, जो बड़ा मुश्किल काम था. ऊपर से जीएसटी का सिस्टम भी उतना लोड नहीं ले पाता था.

मशीन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, छोटे कारोबारों को राहत मिलेगी

अब जिन व्यापारियों का टर्नओवर डेढ़ करोड़ तक है, उन्हें हर महीने रिटर्न फाइल करने से राहत मिली है. अब उन्हें तीन महीनों में एक बार रिटर्न फाइल करना होगा.

अब टैक्स देने वाले तकरीबन 90 फ़ीसदी रजिस्टर्ड उद्योग इस श्रेणी में आ गए हैं. बाकी के 10 फ़ीसदी का सालाना टर्नओवर डेढ़ करोड़ से ज़्यादा है. तो यह छोटे उद्योगों के लिए राहत भरा तो है ही, साथ में जीएसटी के सिस्टम पर लोड भी कम होगा.

'महंगाई बढ़ने का भी था डर'

विपक्ष कहता रहा है कि 28 फ़ीसदी टैक्स बहुत ज्यादा है और पूरी दुनिया में कहीं पर इतना जीएसटी नहीं है.

1200 आइटम्स में कई पर 28 फ़ीसदी टैक्स था. इससे महंगाई बढ़ने का भी ख़तरा था.

जीएसटी

इमेज स्रोत, Getty Images

जीएसटी आने के बाद कुछ इन्फ्लेशन बढ़ी है, इसलिए कई आइटम्स पर जीएसटी को को 28 से 18 फ़ीसदी किया गया. साथ ही पापड़ वगैरह जैसी खाने की नॉन ब्रैंडेड चीज़ें जो लोकल लेवल पर बिकती हैं, उसपर जीएसटी 12 पर्सेंट से 5 पर्सेंट कर दिया है.

मेरा मानना है कि ऐसा इस डर से किया गया है कि कहीं बाद में महंगाई और न बढ़ जाए.

'और राहत दी जा सकती थी'

सरकार ने कहा है कि आगे जाकर जीएसटी को और रिफ़ाइन करेंगे. इसमें अभी भी कई ख़ामियां है.

जीएसटी पर राज्य मंत्रियों की कमिटी से बात हुई तो उन्होंने कहा कि अभी सिस्टम से सॉफ्टवेयर वगैरह की दिक्कत को दूर करने के लिए छह महीने और लगेंगे.

जीएसटी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, एक जुलाई से लागू हुआ था जीएसटी

कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि तिमाही डीएसटी रिटर्न भरने के लिए जो नई डेढ़ करोड़ सालाना टर्नओवर की लिमिट रखी गई है, उसे और कम किया जा सकता था.

दुनिया भर में यह लिमिट आधा या एक मिलियन डॉलर तक है. अगर इसे भारतीय मुद्रा में बदलें तो यह लिमिट साढ़े तीन से चार करोड़ हो जाती है.

इसलिए यह भी कहा जा रहा है कि अगर तिमाही रिटर्न के लिए यह लिमिट पांच करोड़ तक रखी जाती तो छोटे उद्योगों को और भी राहत मिलती.

'मिनी बजट की तरह हैं ये एलान'

अगर आप कई आइटमों में टैक्स रेट 28 से 18 फ़ीसदी कर दें, तो 10 पर्सेंट टैक्स रेट गिराना बड़ी बात होती है.

बहुत सी आइटम्स में 28 से 18 फ़ीसदी किया गया है और बहुत सी आइटम्स में पांच फ़ीसदी भी हुआ है.

ये रेट्स इतने कम कर दिए हैं कि एक तरह से मिनी बजट पेश हो गया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)