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जब तीन घंटो में तैयार होते थे 'हनुमान'
रामानंद सागर की 'रामायण' से जुड़ी कई दिलचस्प बातों का सिलसिला इस धारावाहिक की ख़ास तस्वीरों के साथ. देखिए कुछ ऐसी ही तस्वीरें
हनुमान के रोल के लिए दारा सिंह से बेहतर कोई कैसे हो सकता था? प्रेम सागर कहते है कि, ''दारा सिंह से हमारे परिवार जैसे संबंध थे और वो एक अनुशासित व्यक्ति थे''.
रामायण में हनुमान के किरदार के लिए दारा सिंह के मेकअप पर लगभग 3 से 4 घंटे का समय लगता था. दारा सिंह खुद भी एक हनुमान भक्त थे.
गुजरात के उमरगाँव में चली रामायण कि शूटिंग देर रात तीन-तीन बजे तक होती थी. सभी कलाकारो का ख़ासा ध्यान रखा जाता था और कमाल की बात है कि कोई भी कलाकार शूटिंग के दौरान बीमार नहीं पड़ा.
रावण के रोल में गुजराती अभिनेता अरविन्द त्रिवेदी को कास्ट किया गया. रामायण के सह -निर्देशक प्रेम सागर कहते है कि अरविन्द को देखते ही रावण की छवि सामने आयी और हमें हमारा रावण गुजरात में मिला.
रामायण के सभी मुख्य कलाकारो का चयन हो चुका था. पर रामानंद सागर ने सुग्रीव के रोल के लिए किसी को नहीं चुना. इस बात से घबराये रामानंद सागर ने मन में भगवान राम को याद किया और सो गए.
अगली सुबह रामायण के सेट्स पर इंदौर से एक बड़ी डील-डौल का पहलवान पहुँचा और उसने कहा कि वो सुग्रीव का रोल करना चाहता है और उसे तुरंत सुग्रीव के रोल के लिए कास्ट कर लिया गया.
रामायण में काम करने वाले जूनियर आर्टिस्ट की गिनती कभी नहीं की गई. प्रेम सागर बताते हैं कि रामायण में लड़ाई के सीन में अगर लोग कम पड़ते थे तो आस पास के गाँव वाले जूनियर आर्टिस्ट बन जाते थे.
लगातार छह सिल्वर जुबली सुपरहिट फिल्में बनाने के बाद रामानंद सागर ने जब टीवी पर रामायण बनाने का फैसला किया तो उनके सभी साथी अचंभित थे.
रामायण ने भारतीय टेलीविजन इतिहास में नये मुकाम हासिल किये. इसके हर दृश्य को जीवन्त बनाने में खासा मेहनत की गई थी.
1944 में एक ज्योतिष ने रामानंद सागर का हाथ देखकर ये भविष्यवाणी की थी कि वो अपने जीवन के अंतिम दिनों में श्री राम के जीवन को फिर रचेंगे.
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