You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
क्रिकेट लीग, जिसमें है हिंदू-मुसलमान कोटा
- Author, इमरान कुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
जिस दिन डेरी फ़ार्मर पहलू ख़ां को कथित गौरक्षकों की भीड़ ने राजस्थान में बुरी तरह पीटा उसी दिन हिंदुत्व की प्रयोगशाला कहे जाने वाले कर्नाटक के तटीय इलाके में विशाल भीड़ के सामने एक दूसरी कहानी से पर्दा हट रहा था.
मैंगलुरु से 60 किलोमीटर दूर उडुपी के हेजमादी गांव में एक क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा था.
इसकी खास बात ये थी कि इसमें सभी धार्मिक समुदायों के लिए एक अजीब कोटा निर्धारित किया गया था.
हेजमादी प्रीमियर लीग (एचपीएल) टूर्नामेंट में शामिल होने वाले सभी आठों टीमों में हरेक के पास सात हिंदू और चार मुस्लिम या इससे उलट खिलाड़ी थे.
टीमों में सामाजिक हिस्सेदारी, कई कारणों से अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है.
साम्प्रदायिक तनाव बहुत था
एक लंबे समय से दोनों समुदायों के ख़िलाड़ी अलग अलग खेला करते थे क्योंकि इस इलाक़े में दोनों समुदायों के बीच रिश्ता बहुत नाजुक रहा है.
पिछले कुछ दशकों तटीय इलाक़े का साम्प्रदायिक सौहार्द ऐसा हो चुका है कि अलग अलग समुदाय के आने वाले कॉलेज स्टूडेंट्स भी मॉरल पुलिसिंग की वजह से एक साथ आईसक्रीम भी नहीं खा सकते.
इनमें से एक टीम के उप कप्तान संदेश शेट्टी हैं, जो एक बिजनेसमैन भी हैं.
उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, "इसका मक़सद था कि मुस्लिम और हिंदू एक साथ खेलें. मैच देखने आई विशाल भीड़ इस बात से वाकई बहुत खुश थी कि हम सभी एक साथ खेल रहे थे."
क्रिकेट सबको जोड़ता है
एक निजी कंपनी में अधिकारी सईद अश्विन अमीन कहते हैं, "आज के युग में, हम अपने समुदाय के लिए संघर्ष करते हैं. लेकिन, यह बिल्कुल अलग था. इसमें साम्प्रदायिक भावना कहीं भी नहीं थी. हम सभी ने अपनी टीम के लिए खेला और भीड़ ने इसे प्रोत्साहित किया. यह बहुत अच्छा आइडिया है."
संदेश और अश्विन इस टूर्नामेंट के आयोजन के लिए 35 साल के सैयद हुसैन को श्रेय देते हैं.
हुसैन खाड़ी देशों की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करते हैं. जब भी वो छुट्टियों में गांव आते थे तो हर बार उन्हें दोनों समुदायों के रिश्ते में और गिरावट दिखती थी. इस बात से वो दुखी थे.
हुसैन कहते हैं, "जिस तरह एक टीम की तरह हमने खेला, उन दिनों सभी समुदायों में इसी तरह की मिलनसारी हुआ करती थी. जब भी मैं घर आया चीजों को बद से बदतर होता देख बहुत हताश हो जाता था. मैं कुछ करना चाहता था, तब मुझे लगा कि क्रिकेट सभी बाधाओं को ख़त्म कर देता है क्योंकि हरेक को एक टीम के रूप में प्रदर्शन करना होता है."
पहले लोग हिचके फिर साथ आए
इसके लिए लोगों को सहमत करने के लिए वो अपने गांव और अलग अलग इलाक़ों में गए.
वो कहते हैं, "शुरुआत में, उनमें हिचक थी. कुछ को लगता था कि ये असंभव है. आखिरकार, सबको लगा कि साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए यह कोशिश, सबके हित में है."
ये तय हुआ कि हर टीम में सात सदस्य होंगे, चाहे हिंदू हों या मुस्लिम समुदाय के.
लेकिन बाकी चार सदस्य या तो हिंदू समुदाय के होंगे या मुस्लिम समुदाय से.
अगर ज़रूरी हुआ तो इस कोटा को लागू करने के लिए बाहर से खिलाड़ी लिए जाएंगे, जैसा कि आईपीएल मैचों में विदेशी खिलाड़ियों को लिया जाता है.
सौहार्द ट्रॉफ़ी
खिलाड़ियों की उम्र 16 से लेकर 42 साल तक रखी गई, जबकि अम्पायर पड़ोसी गांव से थे.
और ये भी तय हुआ कि टीमों का नाम किसी भी धार्मिक चिह्नों पर नहीं बल्कि इलाक़ों के नामों पर रखा जाएगा.
और इस तरह से टीमों के बड़े शानदार नाम रखे गए; किंग्स कोडी, साउथ सुल्तान, नार्दन रॉयल्स, स्टार्स कोडी, बाईपास बुलेट्स, कन्नानगर मास्टर्स, बास्तीपाडपु ब्लास्टर्स और अवराल अटैकर्स.
अंत में आठ टीमों को दो पूलों में बांटा गया. एचपीएल में 15 हज़ार रुपये का प्रथम पुरस्कार और दूसरे नंबर की टीम को 10 हज़ार रुपये का पुरस्कार हुसैन के दोस्त ने स्पांसर किया.
उस दोस्त की कंपनी ने 108 जर्सी मुहैया कराई और किसी ने कोल्ड ड्रिंक्स की व्यवस्था की.
और इस तरह दो दिवसीय टूर्नामेंट का आग़ाज़ हुआ. ट्रॉफ़ी का नाम दिया गया 'सौहार्द ट्रॉफ़ी.'
और गेंद थी....
संदेश शेट्टी कहते हैं, "हमने दो दिन तक बहुत मजे किये. हर मैच आठ ओवर का था. बड़ी संख्या में जुटी भीड़ ने हमारा वाकई प्रोत्साहन किया. अगर हम अन्य खेल भी इसी तरह खेलें तो सभी खुश होंगे. मैं अब सहमत हूं."
अश्विन ने कहा, "दर्शकों को बहुत मज़ा आया."
तो क्या आगे भी ऐसे आयोजन होंगे?
लोगों की प्रतिक्रिया को देखते हुए हुसैन और बाकी लोग इस बात से सहमत दिखे कि अब इसका सलाना आयोजन होगा और बेहतर साजो सामान के साथ.
सभी समुदायों से आने वाले खिलाड़ियों को साथ लाने का पहला लक्ष्य पूरा होने के बाद अब उन 108 खिलाड़ियों और बड़ी संख्या में देखने आए लोगों को इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन सी गेंद इस्तेमाल हुई थी.
असल में ये टेनिस बॉल थी!
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)