You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
यूपी में यहां महिलाओं की फौज, हथियार है बेलन
- Author, प्रदीप श्रीवास्तव
- पदनाम, बांदा से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले के एक मोहल्ले में चार साल से पानी नहीं आने से महिलाएं जल विभाग के चक्कर काटकर परेशान हो गई थीं.
ऐसे में इन महिलाओं के बुलाने पर बेलन फौज आई, उन्होंने जल विभाग के दफ्तर के गेट को बाहर से बंद कर दिया. मजबूरन अधिकारियों को एक घंटे के अंदर पानी की व्यवस्था करनी पड़ी.
ये बेलन फौज के काम करने का अंदाज़ है. दरअसल, बेलन फौज बांदा, महोबा, हमीरपुर व चित्रकूट ज़िलों की मध्य व निम्न मध्य वर्गीय महिलाओं का समूह है, जो उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी की समस्याओं के लिए लड़ता है.
संगठन का मुख्यालय बांदा में है, इसका मुख्य फोकस महिलाओं पर होने वाले अत्याचार जैसे घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, छेड़छाड़ आदि के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करना है.
साथ ही पानी, बिजली, सड़क, घूसखोरी आदि की समस्याओं को भी उठाना है. संगठन में एक हजार सक्रिय सदस्यों में से अधिकतर महिलाएं घरेलू व कामकाजी हैं जो घर के कामों को जल्दी से निपटाकर आंदोलन के लिए एकजुट होती हैं.
स्थानीय पत्रकार जीशान अख़्तर कहते हैं कि महिलाएं अपनी जायज़ मांगों के लिए लड़ती हैं, इसलिए हम उनकी मदद भी करते हैं.
बेलन फौज की प्रमुख 51 वर्षीय पुष्पा गोस्वामी दो बार पार्षद रह चुकी हैं.
बेलन से धुनाई
वे कहती हैं, "साल 2009 में बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहीं थी. इंजीनियर ने मुझे धमकाते हुए अभद्रता की. मौके पर ही एक समोसे वाले के बेलन को उठाकर मैने इंजीनियर की धुनाई कर दी. तभी से मैं पूरे बांदा में बेलन फौज की मुखिया के नाम से मशहूर हो गईं."
पुष्पा के पति का साल 2015 में देहांत हो गया. लेकिन वह टूटी नहीं उन्होंने पति की मौत के ग़म को भुलाकर अपनी जैसी महिलाओं के ग़म को साझा कर लिया.
बेलन फौज के आंदोलन भी रोचक होते हैं. बात मनवाने के लिए इनके आंदोलन में पानी की टंकी पर चढ़ जाना, कार्यालय के गेट पर ताला जड़ देना और कर्मचारियों एवं अधिकारियों को चूड़ी पहनाना और गाड़ी की चाबी निकाल लेना आदि शामिल हैं.
लोकतंत्र में इस तरह के उग्र आंदोलनों को पुष्पा गोस्वामी ग़लत नहीं मानतीं हैं. वह कहती हैं, "हम किसी प्रकार के हिंसा का सहारा नहीं लेते हैं. हमें अबला समझा जाता है, मजबूरी में हमें अपने आप को पुरुषों से सशक्त दिखाने के लिए ऐसे क़दम उठाने पड़ते हैं."
बेलन फौज के खाते में कई जीत दर्ज हैं. मिड डे मिल और छात्रवृत्ति की रकम डकारने वाले स्कूलों पर इनके चलते कार्रवाई हुई है.
29 साल की माला सिंह बताती हैं कि पति की मौत के बाद ससुराल वालों ने उन्हें नौ साल की बच्ची के साथ घर से धक्के मारकर निकाल दिया. कहीं सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने पुष्पा गोस्वामी से मदद मांगी तब जाकर मुकदमा लिखा गया.
बेलन फौज अपने कामों के लिए किसी प्रकार का आर्थिक सहयोग नहीं लेती बल्कि सदस्यों द्वारा जुटाए गए धन से काम चलाती है.
गुलाबी गैंग
पिछले सालों में बांदा में ही महिलाओं के संगठन गुलाबी गैंग ने काफी ख्याति अर्जित की थी. संपत पाल ने साल 2007 में इसका गठन किया था. गांव की गरीब महिलाओं का यह संगठन अपने हक के लिए थाना का घेराव करने से लेकर अधिकारियों की पिटाई तक करता था.
सरकारी विभागों में गुलाबी गैंग को लेकर काफी डर था. लेकिन गैंग की प्रमुख संपत पाल के राजनीति में आ जाने के बाद से इसकी गतिविधियां सुस्त पड़ गईं और बेलन फौज ने इस बीच अपनी जगह मज़बूत कर ली है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)