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प्रेस रिव्यू: 'आप ज़हरीली हवा में सांस ले रहे हैं'
द हिन्दू ने पहले पन्ने पर सुर्खी लगाई है - हवा में ज़हर है. अख़बार लिखता है कि भारत के एक तिहाई शहरों ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वार्षिक प्रदूषण सीमा का उल्लंघन किया है.
अख़बार के अनुसार 2011 से 2015 के बीच 22 राज्यों के 94 शहरों में हवा की गुणवत्ता के मानकों का उल्लंघन किया है. इनमें दिल्ली, बदलापुर, पुणे, उल्हास नगर और कोलकाता ने पीएम 10 और एनओ2 दोनों के स्तरों को पार किया है.
इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पन्ने पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव के तिरुपति मंदिर में साढ़े पांच करोड़ के सोने गहने चढ़ाने की खबर को जगह दी है.
अखबार ने लिखा है कि बुधवार सुबह तेलंगाना राज्य के आंदोलन के नेता प्रोफेसर बी कोडनडरम को पुलिस ने उनके घर छापा मारकर उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया क्योंकि उनके नेतृत्व में हज़ारों लोग तेलंगाना में राज्य सरकार की उस नाकामी के ख़िलाफ़ रैली में जुटने वाले थे जिसमें उन्हें नौकरियां देने का वादा किया गया था.
दिनभर गिरफ्तारियां होती रहीं और मुख्यमंत्री 600 किलोमीटर दूर तिरुपति मंदिर में साढ़े पांच करोड़ रुपए के गहने चढ़ा रहे थे.
हिन्दुस्तान ने पहले पन्ने पर दिल्ली के संगम विहार इलाक़े में निकले चूरन वाले नोटों पर वित्त मंत्रालय की कार्रवाई की खबर को जगह दी है.
अखबार ने लिखा है कि वित्त मंत्रालय ने बुधवार को एसबीआई के एटीएम से निकले चूरन वाले नोटों पर रिपोर्ट मांगी है.6 फरवरी को एक व्यक्ति को एटीएम से चिल्ड्रेन बैंक ऑफ इंडिया लिखे दो हज़ार के चार नोट मिले थे.
जनसत्ता ने अपने संपादकीय में कौन सुने गंगा की पीर पर लेख छापा है.
संपादकीय के अनुसार हाल में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की प्रधान पीठ ने गंगा की सफाई के मुद्दे पर एक टिप्पणी में कहा है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो उत्तर प्रदेश में गंगा से जुड़ी सभी परियोजनाओं की सीबीआई जांच कराई जाए.
पीठ ने कहा है कि करोड़ों रुपए ख़र्च करने और अनेक परियोजनाएं चलाने के बावजूद अगर अभी तक गंगा प्रदूषणमुक्त नहीं हो सकी है को हमें गंगा की स्वच्छता के नारे लगाना बंद कर इस विषय पर गंभीरतापूर्वक चिंतन करना होगा.
दैनिक भास्कर में एमनेस्टी इंटरनेशल की रिपोर्ट के हवाले से लिखा गया कि भारत में आलोचकों को चुप कराने के लिए अंग्रेज़ों की तरह दमनकारी क़ानूनों का इस्तेमाल हुआ.
दुनिया भर में मानवाधिकार संरक्षण के लिए काम करने वाले एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 2016 को मानवाधिकार संरक्षण या उल्लंघन के मामले में अबतक का सबसे बुरा साल बताया है. एमनेस्टी ने भारत में जाति, संप्रदाय और गो-हत्या के बहाने हो रही हिंसा पर चिंता जताई है.
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