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देखी है कभी 'साइन लैंग्वेज डिक्शनरी'?
- Author, दिव्या आर्य
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत में पहली बार 'साइन लैंग्वेज डिक्शनरी' बनाई जा रही है. इस डिक्शनरी में 'साइन लैंग्वेज' से अंग्रेज़ी और हिंदी भाषा में अनुवाद होगा.
जो सुन या बोल नहीं सकते यानी मूक-बधिर लोगों के हाथों, चेहरे और शरीर के हाव-भाव से बातचीत की भाषा को 'साइन लैंग्वेज' कहते हैं.
जानिए इसके बारे में चार अहम बातें.
क्या होती है 'साइन लैंग्वेज डिक्शनरी'?
'साइन लैंग्वेज' महज़ इशारे नहीं होते, बल्कि किसी अन्य भाषा की ही तरह इसका अपना व्याकरण और नियम है.
पर ये लिखी नहीं जाती और अंग्रेज़ी-हिंदी की तरह अपनी बात कहने के लिए पूरे वाक्य बनाने की ज़रूरत भी नहीं होती.
उदाहरण के तौर पर अगर किसी मूक-बधिर व्यक्ति को कहना हो, "ये खाना अच्छा है", तो उसे सिर्फ़ 'खाना' और 'अच्छा' का 'साइन' बनाना होगा.
पर अगर यही हिंदी में लिखना हो तो ये समझना ज़रूरी होगा कि 'खाना' संज्ञा है, 'अच्छा' विशेषण है और 'ये' और 'है' शब्दों का इस्तेमाल कब और क्यों किया जाता है.
'साइन लैंग्वेज डिक्शनरी' इन दोनों भाषाओं के बीच पुल का काम करेगी और 'साइन्स' की समझ रखनेवाले लोगों को लिखित अंग्रेज़ी और हिंदी की जानकारी देगी.
क्या दुनिया में पहले से मौजूद 'साइन लैंग्वेज डिक्शनरी' का इस्तेमाल भारत में नहीं हो सकता?
'साइन लैंग्वेज' का इस्तेमाल दुनियाभर में होता है पर एक ही शब्द के 'साइन्स' देश की संस्कृति और स्थानीय परंपराओं के मुताबिक अलग हो सकते हैं.
उदाहरण के तौर पर शादी का 'साइन' 'अमेरिकी साइन लैंग्वेज' में अंगूठी पहनाने से जुड़ा है जबकि 'इंडियन साइन लैंग्वेज' में ये हथेलियों को एक के ऊपर एक रखकर दिखाया जाता है.
'अमेरिकी साइन लैंग्वेज' में चाय का 'साइन' टी-बैग को डूबोने के 'ऐक्शन' से किया जाता है जबकि 'इंडियन साइन लैंग्वेज' में ये चाय की प्याली से चाय पीते हुए दिखाकर किया जाता है.
इसीलिए 'इंडियन साइन लैंग्वेज' की डिक्शनरी बनाना ज़रूरी पाया गया.
कौन बना रहा है ये 'साइन लैंग्वेज डिक्शनरी'?
सामाजिक कल्याण मंत्रालय के तहत साल 2016 में बनाए गए 'इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर' में इस डिक्शनरी पर काम चल रहा है.
मंत्रालय में संयुक्त सचिव अवनीश कुमार अवस्थी के मुताबिक, "भारत में 'साइन लैंग्वेज' का इस्तेमाल क़रीब 100 साल से हो रहा है पर देश के अलग-अलग इलाकों में 'साइन' के ज़रिए एक ही बात कहने के अलग-अलग तरीके हैं, ये डिक्शनरी उनका एक मानक बना देगी."
उदाहरण के तौर पर दक्षिण भारत में मुट्ठी बंद कर दोनों बाहों को एक के ऊपर एक रखा जाए तो उसे 'शादी' का 'साइन' माना जाता है पर इसी 'साइन' को उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में 'जेल' का 'साइन' माना जाता है.
'डिक्शनरी' पर काम कर रहे मूक-बधिर ट्रेनर इसलाम उल हक़ बताते हैं कि ये छपी हुई किताब के साथ-साथ वेबसाइट पर वीडियोज़ के साथ भी उप्लब्ध होगी.
'साइन लैंग्वेज डिक्शनरी' किसके लिए उपयोगी होगी?
साल 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में ढाई करोड़ से ज़्यादा लोग विकलांग हैं जिनमें से 50 लाख को सुनाई नहीं देता या उनकी सुनने की शक्ति कमज़ोर है.
'साइन लैंग्वेज' इनके लिए संचार का एकमात्र तरीका होता है. भारत में क़रीब 700 स्कूल हैं जहां इसकी मदद से पढ़ाई की जा रही है. पर ये नाकाफ़ी हैं और इनके बारे में भी जानकारी बहुत कम है.
'डिक्शनरी' पर काम कर रही असिस्टेंट प्रोफ़ेसर अंदेशा मंगला के मुताबिक, "कई सरकारी नौकरियों में इन लोगों के लिए आरक्षण है पर 'साइन लैंग्वेज' की जानकारी कम होने की वजह से ये लोग उच्च शिक्षा से अक़्सर वंचित रह जाते हैं जिससे आगे चलकर रोज़गार के मौके भी कम हो जाते हैं."
मंत्रालय को उम्मीद है कि 'साइन लैंग्वेज डिक्शनरी' मूक-बधिर लोगों को रोज़गार, शिक्षा, औपचारिक स्तर पर बातचीत, चिट्ठी लिखने वगैरह में मददगार साबित होगी और साथ ही अनुवादकों के लिए भी उपयोगी होगी.