सौम्य पनीरसेल्वम का सख़्त वार

    • Author, इमरान कुरैशी
    • पदनाम, बेंगलुरू से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी एआईएडीएमके में विभाजन अब मानो एक दो दिन की ही बात है.

गवर्नर विद्यासागर राव को चेन्नई पहुंचते ही ओ पनीरसेल्वम के बयानों से पैदा हुए संवैधानिक संकट से निपटना होगा.

पनीरसेल्वम ने कहा है कि उन्हें पार्टी महासचिव शशिकला के करीबी लोगों ने मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के लिए मजबूर किया.

तमिलनाडु में मंगलवार रात करीब 9 बजे नए राजनीतिक ड्रामे का आगाज़ हुआ जो लोग आमतौर पर तमिल फिल्मों में देखते हैं.

पनीरसेल्वम मरीना बीच पर जयललिता की समाधि पर आए और करीब 40 मिनट तक वहीं बैठे रहे.

वहां से उठने के बाद उन्होंने बहुत संयत हो कर जो बातें कही हैं उनमें कई ऐसे क़ानूनी बिंदु हैं जो अब तक शशिकला का समर्थन कर रहे पार्टी के विधायकों को भी उनसे दूर कर सकते हैं.

एक और अहम बात ये है कि एक ही झटके में उन्होंने पार्टी के उन कैडरों का दिल जीत लिया है जो शशिकला और उनके परिवार के लोगों का पार्टी पर नियंत्रण होने से नाखुश हैं.

पार्टी के छोटे बड़े नेताओं की भारी भीड़ मंगलवार रात पनीरसेल्वम के साथ मौजूद थी जबकि शशिकला के घर (जयललिता का पुराना घर पोएस गार्डेन) केवल मंत्रियों की गाड़ियों को ही जाते देखा गया.

पनीरसेल्वम ने जिन क़ानूनी बिंदुओं का जिक्र किया है, वो गवर्नर को ऐसा फैसला करना के लिए बाध्य करेंगे जिनका फ़ायदा पनीरसेल्वम को हो सकता है.

पनीरसेल्वम ने तीन अहम बातें कही हैं. पहली ये कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं दी गई कि पार्टी के विधायक दल की बैठक है.

दूसरी ये कि उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया.

और तीसरी कि उन पर विधायक दल के नेता के रूप में शशिकला का नाम प्रस्तावित करने के लिए दबाव बनाया गया.

किसके पास कितनी सीटे हैं

  • एआईएडीएमके- 134
  • डीमके- 89
  • कांग्रेस-8
  • अन्य- 2
  • कुल सीटें- 234

राजनीतिक विश्लेषक एस मुरारी का कहना है कि गवर्नर को पनीरसेल्वम की कही बातों पर विचार करना होगा क्योंकि जब पनीरसेल्वम आधिकारिक रूप से गवर्नर को ये बताएंगे कि उन्हें इस्तीफ़ा देने पर मजबूर किया गया तो गवर्नर को उन्हें विधानसभा में शक्ति परीक्षण के लिए कहना पड़ेगा.

उन्होंने कहा,"पनीरसेल्वम तब कह सकते हैं कि वो हफ़्ते-दस दिन बाद अपना बहुमत साबित करेंगे. तब तक आय से अधिक संपत्ति के मामले में शशिकला के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला भी आ जाएगा."

दिलचस्प है कि पनीरसेल्वम ने गवर्नर को जो इस्तीफ़े का पत्र लिखा उसमें एक ऐसी बात है जो आमतौर पर कोई मुख्यमंत्री नहीं लिखता. उनके दस्तख़त के ठीक नीचे समय भी लिखा है. वक्त था 1.41 पीएम.

इस समय तक पार्टी विधायकों की बैठक शुरू नहीं हुई थी. मतलब साफ़ है कि उन्हें बैठक से पहले ही इस्तीफा देने के लिए विवश किया गया.

मुरारी कहते हैं,"गवर्नर ने इस पूरे मामले में कुछ संदिग्ध होने का अनुमान शायद पहले ही लगा लिया और यही वजह है कि वो कोयंबटूर से सीधे दिल्ली और फिर वहां से मुंबई चले गए."

हालांकि सबको यकीन है कि सौम्य स्वभाव के पनीरसेल्वम ने ये कदम किसी ताक़तवर शख़्स के समर्थन के बगैर नहीं उठाया है.

विश्लेषक मान रहे हैं कि पिछले दिनों जयललिता के अंतिम संस्कार और फिर दिल्ली में मुलाक़ात के दौरान पनीरसेल्वम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हावभाव से साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी पनीरसेल्वम के साथ है.

बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव एच राजा का कहना है, "गवर्नर पनीरसेल्वम को विश्वासमत हासिल करने के लिए बुला सकते हैं क्योंकि उन्होंने इस्तीफ़ा देने पर मजबूर करने की बात कही है. तमिलनाडु के लोग इस बात से नाराज़ होंगे कि शशिकला के कुछ करीबियों ने मुख्यमंत्री को इस्तीफा देने पर विवश किया."

तो ऐसे में सवाल उठता है कि शशिकला और पनीरसेल्वम दोनों में किसके साथ ज़्यादा विधायक हैं? जानकारों की राय है कि ज़्यादातर विधायक पनीरसेल्वम के साथ हैं.

फ्रंटलाइन पत्रिका के वरिष्ठ सह संपादक आर के राधाकृष्णन कहते हैं कि इसमें कोई शक नहीं कि शशिकला के पास करीब 50 विधायक हैं.

उन्होंने कहा,"यदि एक बार गवर्नर ने पनीरसेल्वम के उठाए बिंदुओँ पर गौर किया तो विधायक भागेंगे क्योंकि उन्होंने महज़ आठ महीने पहले ही बहुत सारा पैसा खर्च किया है, वो इतनी जल्दी चुनाव नहीं चाहेंगे."

राधाकृष्णन ने द्रविड़ पार्टियों की संस्कृति में आए दिलचस्प बदलाव की ओर भी ध्यान दिलाया.

उन्होंने कहा,"पनीरसेल्वम के लिए डीएमके में भी बहुत सहानुभूति है जो शुरू से ही एआईएडीएमके की कट्टर विरोधी रही है और पार्टी कैडर भी इस कदम के बाद उनके साथ आ गए हैं."

भारत के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विकास सिंह मानते हैं कि क़ानूनी रूप से जब तक शशिकला के पास उनके पक्ष में विधायक दल का प्रस्ताव है, पनीरसेल्वम के बयान की कोई मान्यता नहीं होगी.

वो कहते हैं,"अगर गवर्नर को शंका हुई तो वो विधायकों को अलग-अलग पत्र लिखने के लिए कह सकते हैं. वो शशिकला को विश्वास मत हासिल करने के लिए कह सकते है लेकिन उनका शपथ ग्रहण टाल नहीं सकते."

मगर राजा का कहना है,"जब पनीरसेल्वम का इस्तीफ़ा दबाव डाल कर लिया गया तो विधायक दल का प्रस्ताव वैसे ही गैरक़ानूनी हो गया."

संक्षेप में तमिलनाडु अब फिर उसी स्थिति का सामना कर रहा है जो जयललिता के निधन के वक्त पैदा हुईं थी.

एमजी रामचंद्रन की मौत के बाद पार्टी विभाजित हुई अब लगता है कि जयललिता की मौत के बाद भी इसे विभाजन देखना होगा.

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