क्या अरुण जेटली एक फरवरी को पेश कर पाएंगे बजट?

अरुण जेटली

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    • Author, प्रदीप कुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत सरकार अपनी ओर से पहली फरवरी को आम बजट पेश करने की तैयारी शुरू चुकी है. इस सिलसिले में वित्त मंत्रालय ने बीते गुरुवार को बजट दस्तावेज को प्रिंट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली एक फरवरी, 2017 को बजट पेश कर पाएंगे या नहीं, यह काफ़ी हद तक सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के रूख़ पर निर्भर करने वाला है.

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने जा रहा है जिसमें आगामी दिनों पांच राज्यों के चुनाव का हवाला देते हुए बजट को आगे बढ़ाने की मांग की गई है.

सुप्रीम कोर्ट में यह जनहित याचिका वकील मनोहर लाल शर्मा ने दाखिल की है.

वकील मनोहर लाल शर्मा पूर्व में भी विभिन्न अदालतों में जनहित याचिका दायर करते रहे हैं. दिसंबर 2012 दिल्ली गैंगरैप मामले में वो अभियुक्तों के वकील भी थे.

लेज़्ली उडविन निर्देशित डॉक्युमेंट्री 'इंडियाज़ डॉटर' में अपने वक्तव्य को लेकर वो विवादों में भी रहे थे.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

याचिका दाखिल करने के बारे में मनोहर लाल शर्मा ने बीबीसी को बताया, "भारतीय जनता पार्टी पांच राज्यों में हो रहे चुनाव से पहले लोगों को प्रभावित करना चाहती है, इसलिए वह अड़ी हुई है कि वह एक फरवरी को बजट पेश करेगी, क्योंकि चार फरवरी से पांच राज्यों में चुनाव होने हैं."

इस अहम मामले में चीफ़ जस्टिस जेएस केहर और जस्टिस डी.वाय. चंद्रचूड़ की सदस्यता वाली बेंच मनोहर लाल शर्मा को शपथ पत्र दाखिल करने को कह चुकी है.

उनके शपथ पत्र दाख़िल किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को इस मामले में सुनवाई हो रही है.

अरुण जेटली- नरेंद्र मोदी

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मनोहर लाल शर्मा के मुताबिक उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान कुछ तथ्यों की ओर इंगित कराया है.

उनके मुताबिक, "पांच राज्यों के चुनाव को देखते हुए ये चुनाव आयोग की आचार-संहिता का सरासर उल्लंघन है. सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच का फ़ैसला भी है कि चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद उसे प्रभावित करने वाली किसी तरह की घोषणा नहीं की जा सकती."

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और पंजाब में फरवरी में चुनाव होने है. ऐसी स्थिति 2012 में भी देखने को मिली थी. तब इन्हीं राज्यों में चुनाव होने थे.

उस वक्त मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने आम बजट को 28 फरवरी से आगे बढ़ाकर 16 मार्च कर दिया था.

मनोहर लाल शर्मा इसका हवाला देते हुए कहते हैं, "उस वक्त यही जेटली जी राज्य सभा में चीख रहे थे कि बजट के ज़रिए सरकार चुनावी लाभ लेना चाहती है. लेकिन अब नरेंद्र मोदी-अरुण जेटली हर हाल में बजट चुनाव से पहले पेश करना चाहते हैं. संक्षेप में कहूं तो ये राजनीतिक गुंडागर्दी है."

शर्मा का दावा हैं कि उनका किसी राजनीतिक पार्टी से कोई ताल्लुक नहीं है.

उनके मुताबिक उन्होंने ये जनहित याचिका इसलिए दाखिल की है ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी की राजनीतिक गुंडागर्दी को न्यायसंगत तरीके से चुनौती दी जा सके.

एमएल शर्मा

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इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट में बजट के मुद्दे पर जनहित याचिका दाखिल करने वाले वकील एमएल शर्मा

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक चुनाव आयोग ने बजट की तैयारियों और उसे चुनाव से पहले पेश करने की वजहों के बारे में कैबिनेट सचिव से जवाब देने को कहा है.

भारत सरकार के पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमण्यन को भरोसा है कि कैबिनेट सचिव, चुनाव आयोग की शंकाओं का समाधान करने में कामयाब होंगे.

सुब्रमण्यन समय से पहले बजट को पेश करने के बारे में कहते हैं, "भारत जितना बड़ा देश है उसमें हर समय में किसी न किसी हिस्से में चुनाव होते रहेंगे. इसलिए कुछ राज्यों में चुनाव की वजह से बजट को टालना उचित नहीं कहा जा सकता है."

सुब्रमण्यन के अनुसार, "फरवरी-मार्च में जिन राज्यों में चुनाव होने है, वहां देश की कुल आबादी का 15 फ़ीसदी हिस्सा रहता है, जबकि बजट तो पूरे देश का होगा. मेरे ख़्याल से चुनाव वाले राज्य के मतदाताओं पर बहुत असर नहीं पड़ेगा."

वैसे मनोहर लाल शर्मा चुनावी वजहों से अलग भारतीय संविधान की धारा 112 का जिक्र करते हुए कहते हैं कि बजट को फरवरी में पेश करने की परंपरा ही ग़लत है और उन्होंने इस बाबत भी सुप्रीम कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया है.

शर्मा के मुताबिक, "भारतीय संविधान की धारा 112 में जिक्र है कि आप जिस भी वित्तीय साल का बजट रखना चाहते हैं, वो संसद के अंदर उसी साल रखा जाना चाहिए. हमने इस पर भी सुप्रीम कोर्ट का ध्यान दिलाया है. इस हिसाब से बजट अप्रैल में पेश होना चाहिए."

नसीम ज़ैदी

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इमेज कैप्शन, भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम ज़ैदी

टीएसआर सुब्रमण्यन इस पहलू पर कहते हैं, "बजट को अप्रैल से पहले पेश करने की सबसे बड़ी वजह तो यही है कि राज्यों को समय से खर्च करने के लिए अगले वित्तीय साल में बजट मिल सके. अगर अप्रैल में बजट पेश किया गया तो राज्यों तक उनका पैसा पहुंचने में अक्टूबर-नवंबर का वक्त लगेगा और बहुत सारी चीज़ें गड़बड़ा सकती हैं."

वैसे केंद्र सरकार की ओर से 31 जनवरी से नौ फरवरी के बीच संसद के बजट सत्र को बुलाने का प्रस्ताव है.

लेकिन कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, जनता दल (यूनाइटेड), समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के प्रतिनिधियों ने बीते पांच जनवरी को मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम ज़ैदी से मुलाकात कर बजट की तारीख को आगे बढ़ाने की मांग की है, ताकि भारतीय जनता पार्टी पांच राज्यों में होने वाले चुनाव को प्रभावित नहीं कर सके.

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