You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
हैकिंग से कैसे बचाती है बीजेपी अपनी वेबसाइट
- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
बुधवार शाम कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के ट्विटर अकाउंट के हैक होने की ख़बर आई और अगले ही दिन सुबह यानी गुरुवार को कांग्रेस पार्टी का ट्विटर अकाउंट भी हैक हो गया.
कांग्रेस ने इसके लिए मोदी सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया.
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने लिखा, ''इससे साइबर सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की भेदनीयता का पता चलता है. मोदी जी के लिए ध्यान देने की बात है.''
लेकिन मामला पार्टियों के आरोप-प्रत्यारोप से अलग साइबर सुरक्षा का है.
बिहार में पेशे से बिज़नेसमैन और क़रीब 100 राजनेताओं का सोशल मीडिया हैंडल करने वाले ज्ञानेश्वर कहते हैं कि हैकिंग को रोकने के लिए तमाम सावधानियां ली जाती हैं लेकिन फिर भी मानव ग़लती की संभावना सबसे ज़्यादा होती है.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, ''हम कंटेंट राइटर को पासवर्ड नहीं देते. पासवर्ड सिर्फ़ मेरे और सबसे भरोसेमंद सिस्टम संचालक के पास होता है, क्लाइंट तक के पास पासवर्ड नहीं होता. कई क्लाइंट चाहते थे कि हम उन्हें पासवर्ड दे दें लेकिन हम उनसे पासवर्ड शेयर नहीं करते. वो कहते हैं कि फ़ेसबुक लाइव करना है. हम कहते हैं, हमारी कंपनी का व्यक्ति आपको फ़ेसबुक लाइव करवा देगा लेकिन हम उन्हें भी पासवर्ड नहीं देते.''
उनके अनुसार समस्या ये होती है कि फ़ोन या सिस्टम हमेशा राजनेताओं के पास नहीं होता है, कभी ये उनके पीए के पास होता है, कभी सिक्योरिटी के किसी व्यक्ति के पास होता है.
ज्ञानेश्वर आगे कहते हैं, ''अगर उन्होंने कोई छेड़छाड़ कर दिया तो ज़िम्मेदारी मेरी बनेगी. सभी कंपनियां यही करती हैं. कभी कभी हम दो लोग जो एक दूसरे के विरोधी हैं, उनके लिए एक ही व्यक्ति सोशल मीडिया पोस्ट करता है.''
कुछ दिनों पहले तक बीजेपी की सोशल मीडिया टीम के हिस्सा रहे एक व्यक्ति ने अपना नाम सार्वजनिक नहीं किए जाने की शर्त पर बीबीसी से बात करते हुए कहा कि भाजपा वेबसाइट के सर्वर पर फ़ायरवॉल है और जब भी कोई ख़तरा महसूस होता है उस पर तुरंत कार्रवाई की जाती है.
वो आगे कहते हैं, ''Bjp.org एशिया की ऐसी वेबसाइट है जिस पर हर रोज़ क़रीब 150-200 हमले होते हैं. ये हमले देश के भीतर और बाहर दोनों से होते हैं. हम अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया साइट्स का ऑडिट करते हैं, पता करते हैं कि हमले कहां से और कैसे हुए और हम कैसे अपनी सुरक्षा बढ़ा सकते हैं.''
उनके अनुसार ट्विटर और फ़ेसबुक जैसी सोशल मीडिया साइट्स का सर्वर भारत में नहीं है और ताज़ा वाक़ये का सर्वर हैकिंस से कोई लेना देना नहीं है.
वो कहते हैं कि कांग्रेस की ट्विटर अकाउंट का हैक होना या तो इनसाडर जॉब है या ये पासवर्ड का कुप्रशासन है क्योंकि क्रेडिट कार्ड की तरह ट्विटर या फ़ेसबुक सोशल मीडिया लॉगिन पर भी दो बार पासवर्ड ऑथेंटिकेशन करना होता है.
उनके अनुसार भाजपा की वेबसाइट पर सबसे ज़्यादा डीडॉस हमले होते हैं.
इसको आसान भाषा में समझाने की कोशिश करते हुए वो कहते हैं, ''हर वेबसाइट सर्वर पर होस्ट होती है और हर वेबसाइट को एक वक़्त में एक संख्या तक ही ऐक्सेस किया जा सकता है. डीडॉस हमलों में इस वेबसाइट पर उस दौरान ज़्यादा बार ऐक्सेस किया जाता है जिससे वेबसाइट ब्लॉक हो जाती है. ऐसा करना आसान होता है और इसके लिए पासवर्ड की भी ज़रूरत नहीं होती.''
इससे निपटने के लिए वेबसाइट ऐक्सेस में देरी कर दी जाती है जिससे एक वक़्त में एक से ज़्यादा बार वेबसाइट को ऐक्सेस नहीं किया जा सकता है.
राष्ट्रीय जनता दल और ख़ासकर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के सोशल मीडिया को देखने वाले संजय यादव कहते हैं कि मार्च या अप्रेल में लालू प्रसाद का फ़ेसबुक एकाउंट हैक हो गया था.
संजय कहते हैं कि उनका पासवर्ड मज़बूत था लेकिन उसे और मज़बूत किया.
बीबीसी से बात करते हुए संजय कहते हैं, ''पासवर्ड के बारे में जानकारी ज़्यादा लोगों से बांटी नहीं जाती लेकिन लालू जी और परिवार को इस बारे में जानकारी रहती है. उपमुख्यमंत्री तेजस्वी और मीसा भारती जैसी युवा राजनेताओं को सायबर सिक्योरिटी के बारे में पता होता है. उन्हें पता होता है कि गड़बड़ी हो तो मामले को कहां लेकर जाना होता है. लालू जी के मामले में उन्हें बताना होता है कि ऐसा हुआ है, और इसके ये फ़ायदे या नुक़सान हैं.''