ज़ाकिर नाइक: डोंगरी से दुबई तक
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई
मुम्बई का मुस्लिम बहुल इलाक़ा डोंगरी. जहां अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम की ज़िंदगी परवान चढ़ी.
यहां मकान कौन सा है और दुकान कौन सी ये कहना मुश्किल है. सांप जैसी रेंगती तंग गलियों में रहने वाले अधिकतर लोग छोटे व्यापार से जुड़े हैं. यहां रोज़ की दिहाड़ी वालों का जमावड़ा भी लगता है.

इमेज स्रोत, Zakir Naik FB Page
ज़ाकिर नाइक के इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के अधिकतर दफ्तर इसी इलाके में हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) के छापों के बाद अब इनमें ताले लगे हैं.
मोहल्ले वाले ज़ाकिर नाइक के बारे में कुछ भी बोलने से डरते हैं. एक ने कहा कि यहां लोग पुलिस के चक्कर में नहीं पड़ना चाहते. दूसरे ने साहस दिखाया और बोला ज़ाकिर नाइक को देश वापस आकर अपना नाम साफ़ करना चाहिए.
ज़ाकिर नाइक का जन्म 1965 में इसी मोहल्ले के एक मिडिल क्लास मुस्लिम घराने में हुआ. यहीं उनका बचपन गुज़रा, यहीं उनकी पढ़ाई भी हुई.
उनकी तीन बहनों में से एक सलवा नाइक उनकी विचारधारा से असहमत हैं. उनकी शादी एक शिया मुस्लिम घराने में हुई है.
ज़ाकिर नाइक की पत्नी फरहत नाइक भी उनके काम में हाथ बंटाती हैं. उनका एक बेटा है और एक बेटी. लोग कहते हैं कि बेटा फ़रीक़ नाइक उन्हीं की तरह इस्लाम को फैलाने में जुटा हुआ है.

इमेज स्रोत, Anushree Fadnavis-Indus Images
ज़ाकिर नाइक डॉक्टरों के परिवार से आते हैं. उनके पिता अब्दुल करीम नाइक, जिनका अभी हाल में देहांत हुआ है, डॉक्टर थे. उनके बड़े भाई मुहम्मद नाइक भी डॉक्टर हैं.
बड़े भाई मजगांवन में मॉडर्न डायग्नॉस्टिक्स जांच घर के मालिक हैं. ज़ाकिर नाइक डॉक्टरी पढ़ने के बाद अपने पिता का हाथ बंटाते थे.

इमेज स्रोत, Anushree Fadnavis-Indus Images
परिवार डोंगरी के नज़दीक मज़गांवन में रोज़री हाउस नाम के एक अपार्टमेंट जैसी बिल्डिंग में रहता है. ज़ाकिर नाइक के पिता कोंकण इलाके के रत्नागिरी से मुम्बई आकर बसे थे. उनके कई रिश्तेदार या तो डोंगरी में रहते हैं या फिर मज़गांवन में.
करोड़ों को प्रभावित करने का दावा करने वाले ज़ाकिर नाइक दक्षिण अफ़्रीका के गुजराती मूल के इस्लाम धर्म प्रचारक अहमद दीदात से प्रभावित थे.
उनसे मुलाक़ात के कुछ साल बाद ज़ाकिर नाइक ने डॉक्टरी का पेशा छोड़ा और ख़ुद इस्लामी प्रचारक बन गए. दीदात ने उनकी प्रशंसा करते हुए 2004 में कहा था कि जो काम (इस्लाम धर्म का प्रचार) उन्होंने 40 साल में किया ज़ाकिर नाइक ने चार साल में कर के दिखाया.
ज़ाकिर नाइक ने इस्लाम के प्रचार के लिए इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की जिस पर अब सरकार ने पाबंदी लगा दी है. कुछ सालों के बाद उन्होंने पीस टीवी नाम का एक टीवी चैनल भी शुरू किया.
कहते हैं उनकी सभाओं में हज़ारों लोग आते थे जिनमें ग़ैर मुस्लिम भी होते थे.
कुछ सालों में उनकी चर्चा दूर-दूर तक फैलने लगी. उनका क़द भी बढ़ने लगा. हर चाहने वालों को समय देना उनके लिए कठिन हो गया.

इमेज स्रोत, Anushree Fadnavis-Indus Images
ज़ाकिर नाइक भाषण देने कई मुस्लिम देशों में जाने लगे. सऊदी अरब और खाड़ी देशों के अधिकारियों ने उन्हें पुरस्कारों से नवाज़ा. वो भारत के सुन्नी मुसलमानो के पोस्टर ब्वॉय बन गए.
आमिर रिज़वी पेशे से एक डिज़ाइनर हैं लेकिन मुस्लिम मामलों में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. उनका कहना है कि जाक़िर नाइक ने अपने आप को इस तरह से ढाला हुआ है कि उन्हें देखने से लगे कि वो पढ़े-लिखे इंसान हैं.
ज़ाकिर नाइक के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने का मुक़दमा भी दर्ज किया है.
उन्होंने अपने ख़िलाफ़ लगे सभी आरोपों का पुरज़ोर खंडन किया है.

इमेज स्रोत, Anushree Fadnavis-Indus Images
हमने उनसे संपर्क करने की बहुत कोशिश की लेकिन वो हम से अब तक बात करने पर राज़ी नहीं हुए हैं.
उनके पूर्व मुलाज़िम सलीम युसूफ़ कहते हैं कि वो उनकी बातों से असहमत हैं लेकिन सरकार की उनपर लगाई गई पाबंदी से भी असहमत है.
ऐसा महसूस होता है कि ज़ाकिर नाइक का देश लौटने का कोई इरादा नहीं लेकिन अपनी संस्था के ख़िलाफ़ लगी पाबंदी को वो अदालत में चुनौती देने वाले हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















