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नोटबंदी के बीच मोबाइल पेमेंट में ऊंची छलांग
भारत में दो बड़े नोटों को वापस लिए जाने के बाद भले देश भर में करेंसी की कमी हो गई है लेकिन इससे मोबाइल पेमेंट कंपनियों के बिज़नेस में भारी उछाल आया है. देश की सबसे बड़ी डिजिटल वॉलेट कंपनी पेटीएम के ज़रिए शनिवार को रिकॉर्ड 70 लाख से ज़्यादा का ट्रांज़ैक्शन हुआ. घाटे में चल रही यह फ़र्म पांच बिलियन डॉलर की है. इसे दिग्गज चीनी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा की मदद हासिल है.
पेटीएम का दावा है कि उसके 150 मिलियन यानी 15 करोड़ यूज़र्स हैं जबकि उसके आसपास मोबीक्विक है और उसके 35 मिलियन यानी तीन करोड़ 50 लाख यूज़र्स हैं.
दोनों कंपनियों के साथ नए यूज़र्स तेज़ी से जुड़ रहे हैं.
500 और 1000 हज़ार के नोटों को रद्द किए जाने के बाद मोबाइल वॉलेट कंपनियों ने यह छलांग लगाई हैं.
आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोटों को रद्द करने की घोषणा की थी. इस फ़ैसले के बाद देश की कुल करेंसी का 86 प्रतिशत हिस्सा अमान्य हो गया था.
देश में करेंसी संकट शुरू होने के बाद मुंबई जैसे शहरों के लोगों ने कैशलेस पेमेंट की तरफ़ रुख़ किया. समस्या यह है कि इसमें तेज़ गति से बढ़ोतरी के बावजूद मोबाइल पेमेंट अभी प्राथमिक चरण में ही है. क्रेडिट कार्ड अब भी यहां बहुत जगहों पर पेमेंट के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाता है.
सरकार के फ़ैसले से अचानक आए करेंसी संकट के बीच मोबाइल पेमेंट्स कंपनियां आक्रामक अंदाज़ में पांव पसारने की कोशिश कर रही हैं.
यहां तक कि छोटे-छोटे खुदरा व्यापारियों ने भी डिजिटल वॉलेट से पेमेंट लेना शुरू कर दिया.
कैशलेस इकोनॉमी की कई अर्थशास्त्रियों और यहां तक कि माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने भी तारीफ़ की है. इनका मानना है कि कैशलेस इकोनॉमी से भारत में भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगा.
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