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पंजाब में सरहद के गाँवों से पलायन
पंजाब में पाकिस्तानी सीमा से दस किलोमीटर के दायरे में आने वाले कई गाँवों से लोग सुरक्षित जगहों पर जाने लगे हैं.
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ रहे सैन्य तनाव के बीच उन्हें डर है कि कहीं सीमापार से फ़ायरिंग न शुरू हो जाए.
फ़िरोज़पुर के डिप्टी कमिश्नर डीपीएस खरबंदा ने बीबीसी को बताया कि जो लोग अपने परिवारों के साथ सुरक्षित जगहों पर जाना चाहते हैं उनके लिए प्रशासन ने सीमा से दस किलोमीटर दूर 31 रिलीफ़ कैंप बनाए गए हैं.
गुरुद्वारों से लोगों कों सुरक्षित ठिकानों पर जाने की अपील किए जाने के बाद अटारी, रानिया, फिरोज़पुर और गुरदासपुर सेक्टर के कई गांवों से बच्चों और महिलाओं को रिश्तेदारों के यहां भेजा जा रहा है.
स्थानीय संवाददाता रविंद्र सिंह रोबिन के मुताबिक़ पंजाब सरकार ने कई जिलों में सचिव स्तर के छह अधिकारी तैनात किए गए हैं ताकि अपना घर और गाँव छोड़कर जा रहे लोगों की मदद की जा सके.
पलायन कर रहे लोग कहते हैं कि उनपर दो तरफ़ा मार पड़ रही है. एक तो उन्हें अपनी खड़ी फ़सल छोड़नी पड़ रही है वहीं घर भी छोड़ना पड़ रहा है.
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पड़ने वाले गांव धनोआ कलां के राजबीर सिंह गुरुवार को की गई सर्जिकल स्ट्राइक का समर्थन करते हैं.
उन्होंने कहा, "इस कदम का लंबे समय से इतंजार था. आर्मी को ये कार्रवाई बहुत पहले कर लेनी चाहिए थी. हां हमें अपने घर बार को छोड़ कर जाने में समस्या तो आ रही है लेकिन पहले राष्ट्र है."
वो कहते हैं कि पाक प्रायोजित आतंकवाद ने पहले ही दीनानगर और पठानकोट में बहुत बर्बादी कर दी है. उन्हें सबक सिखाना बहुत जरूरी था.
राजबीर का परिवार गुरुवार को सुरक्षित जा चुका है लेकिन राजबीर और उनकी मां ने गांव छोड़ने से मना कर दिया है.
मोधे गांव में गांववाले गुरुद्वारा में एकत्रित होकर एलओसी पर चरमपंथी कैंपों को फ़ौज द्वारा ध्वस्त किए जाने की सफलता की प्रार्थना भी की.
स्थानीय निवासी कुलवंत सिंह ने बीबीसी को बताया कि हम यहां फ़ौज की सफलता की प्रार्थना करने के लिए एकत्रित हुए हैं.
गुरदासपुर ज़िले में डेरा बाबा नानक नाम की जगह पर रावी नदी पर प्रशासन अस्थायी पुल भी बना रहा है ताकि नदी पार के लोगों को लाने में आसानी हो.
उन्होंने आगे कहा की ऑपरेशन पराक्रम के समय हम सभी गांव वाले यहां से अपने रिश्तेदारों के पास तरनतारण चले गए थे लेकिन इस बार वहाँ नही गए हैं.
उन्हें आशा है कि सब कुछ जल्दी सामान्य हो जाएगा, अगर नहीं होता है तो मैं इस गांव छोड़ने वाला आखिरी आदमी होउंगा.
धारीवाल उद्धर गांव के गुरमीत सिंह कहते हैं कि हमारी सेना ने सराहनीय कदम उठाया है. पाकिस्तान को बड़ा सबक सिखाया है. हमारे गांव के अधिकतर बुजुर्गों और बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया गया है.
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