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समिति ने महत्त्वपूर्ण सिफ़ारिशें कीं
प्रवासी भारतीयों के बारे में डॉक्टर एलएम सिंघवी की अध्यक्षता में सितंबर 2000 में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई. समिति में आरएल भाटिया, जेआर हीरेमथ, बालेश्वर अग्रवाल और विदेश मंत्रालय के सचिव जेसी शर्मा बतौर सचिव शामिल थे. समिति ने आठ सितंबर 2002 को पूर्ण रिपोर्ट सौंपने से पहले तीन अंतरिम रिपोर्टें सौंपी थीं. इनमें भारतीय मूल के लोगों के लिए कार्ड की योजना के साथ ही प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की बात कही गई थी. तीसरी रिपोर्ट में कहा गया कि प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार दिए जाने चाहिए. समिति ने अंतिम रूप से जो रिपोर्ट सौंपी उसमें लगभग 160 विभिन्न सिफ़ारिशें की गई हैं. इसके तहत हवाई अड्डों की हालत सुधारने की बात कही गई है. इस बारे में कहा गया है कि भारतीय मूल के लोग जब भारत आएँ तो उनके साथ हवाई अड्डे पर लोग अच्छी तरह से पेश आएँ और उनके लिए सारी प्रक्रियाएँ भी आसान हों. समिति की रिपोर्ट के अनुसार जब कोई भारतीय देश से बाहर जा रहा हो तो उसे कौन सी औपचारिकताएँ पूरी करनी होंगी इस बारे में पूरी जानकारी सहज ढंग से मुहैया कराई जाए. प्रवासी भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों से विवाह करने वाली महिलाओं के शोषण के बारे में एक विशेष शाखा का गठन किया जाए जिससे उसमें मुफ़्त वैधानिक सलाह भी दी जाए. दूल्हों को उस समय की वैवाहिक स्थिति के बारे में शपथ पत्र देना होगा. विदेश में श्रमिक के तौर पर काम कर रहे भारतीयों के हितों के संरक्षण पर विशेष ज़ोर दिया गया. इसके लिए मुख्य तौर पर बीमा योजना की बात की गई. प्रवासी भारतीयों से जुड़े कई मुद्दे हैं जिन पर विचार करने की ज़रूरत है और जिन पर हर पक्ष से कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है. विभिन्न मुद्दे डॉक्टर एलएम सिंघवी की रिपोर्ट के अनुसार इसमें अगर संस्कृति की बात करें तो भारत में रहने वालों के साथ ही भारतीय मूल के सभी लोग भारत की संस्कृति अपनाने वालों में से हैं. समिति के अनुसार भारतीय मूल के लोग अपनी सफलता में इस संस्कृति का एक बड़ा योगदान मानते हैं और चाहते हैं कि अगली पीढ़ी में भी ये संस्कृति जाए. इस बारे में समिति का कहना था कि भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद को भारतीय मूल के लोगों के साथ रिश्तों के सूत्र को और मज़बूत करना चाहिए. समिति शिक्षा क्षेत्र को भी प्रवासी भारतीयों के साथ देश के रिश्ते मज़बूत करने में अहम मानती है. इसके अलावा छुट्टी के दिनों में छात्रों का आदान-प्रदान कार्यक्रम भी होना चाहिए. फिर दूसरे देशों में आईआईटी, आईआईएम और अन्य मेडिकल कॉलेजों की शाखाएँ भी खोले जाने का प्रस्ताव रखा गया. दूसरे देशों में जो देशी मीडिया है वह भारत को उन देशों से जोड़ने में मदद देता है. समिति का कहना था कि भारतीय मूल के लोग विदेशी मीडिया में भी काफ़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. मगर समिति की सिफ़ारिश है कि इस तरह के मीडिया के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठी की जानी चाहिए. समिति के अनुसार अमरीका स्थित साउथ एशियन एसोसिएशन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स और ब्रिटेन की यूके एसोसिएशन ऑफ़ इंडियन जर्नलिस्ट्स के साथ रिश्ते मज़बूत किए जाने चाहिए. देश की आर्थिक स्थिति और प्रवासी भारतीयों के उसमें संभावित योगदान पर भी समिति ने कुछ अनुशंसाएँ की हैं. समिति का कहना है कि प्रबंधन, कॉरपोरेट, व्यापार और बैंकिंग के क्षेत्रों में प्रवासी भारतीयों के अनुभवों का फ़ायदा लेना चाहिए. समिति का कहना था कि प्रवासी भारतीय दुनिया में कई देशों की बड़ी कंपनियों में काम कर रहे हैं. ऐसे विशेषज्ञों को बताना चाहिए कि उन देशों के बाज़ार में किस तरह प्रवेश किया जा सकता है. समिति को बताया गया कि दूर-देशों से भारत के गाँवों-क़स्बों में पैसा पहुँचने में काफ़ी वक़्त लग जाता है इसलिए सरकार को इस बारे में ध्यान देने की ज़रूरत है. समिति के अनुसार प्रवासी भारतीय देश के पर्यटन क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं. प्रवासी भारतीयों को देश में लाने के लिए कुछ अच्छी योजनाओं की ज़रूरत पर बल दिया गया. |
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