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जादुई विरासत को आगे बढ़ाती मानेका सरकार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जादूगरी को अभी तक मर्दों का पेशा माना जाता था लेकिन मशहूर जादूगर पीसी सरकार (जूनियर) की बेटी मानेका इस मिथक को तोड़ रही हैं. पीसी सरकार (जूनियर) की 27 साल वर्षीय बेटी मानेका सरकार हाल में कोलकाता के स्टार थिएटर में आयोजित अपने पहले एकल शो के बाद देश की पहली पेशेवर महिला जादूगर बन गईं. आठ पीढ़ियों तक पुरुष ही इस खानदानी विरासत को आगे बढ़ाते रहे. लेकिन अब सरकार खानदान की नौवीं पीढ़ी की संतान मानेका ने इस जादुई विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है. जादूगर पीसी सरकार और उनका ‘इंद्रजाल’ दुनिया भर में मशहूर रहा है. मुग़ल काल से ही सरकार घराने के पूर्वज जादू दिखाते रहे हैं. अमरीका के ओह्यो यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल करने के बाद मानेका ने महिलाओं के लिए अब तक अछूत माने जाने वाले इस पेशे को कैसे चुना? इस सवाल पर मानेका कहती हैं कि उन्होंने अपनी मर्जी से इस पेशे को चुना. मानेका के पिता ही उनके गुरू थे. विरासत
पीसी सरकार (जूनियर) ने इसी साल मई में खानदान की जादुई विरासत यानी जादू के कारनामे दिखाने वाली छड़ी एक समारोह में मानेका को सौंप दी. मानेका को अहसास है कि खानदानी परंपरा को आगे बढ़ाने की यह ज़िम्मेदारी बहुत अहम है. इससे सरकार घराने की इज़्ज़त जुड़ी है. बिना किसी झिझक के मानेका कहती हैं,"मुझे ख़ुद पर पूरा भरोसा है." जादूगर खानदान की होने के बावजूद एक महिला के तौर पर इस पेशे को चुनने में उनको कम बाधाएँ नहीं पार करनी पड़ीं. मानेका कहती हैं, "नज़दीकी रिश्तेदारों और दोस्तों ने ही उनके फ़ैसले का विरोध किया. लेकिन पिता मेरे पक्ष में थे. लोग कहते थे कि एक लड़की भला जादूगरनी कैसे बन सकती है. अब मेरे पहले शो की कामयाबी के बाद वही लोग कह रहे हैं कि मानेका उम्मीदों पर खरी उतरी है." मानेका कहती हैं,"मेरे इस पेशे में आने के बाद इस सामाजिक मान्यता को झटका लगा है कि लड़कियाँ इस पेशे में नहीं उतर सकतीं. सामाजिक वर्जनाओं के चलते ही अब तक महिलाएँ इस पेशे से कतराती रही हैं." उनके अनुसार,"हमारे देश में अब भी लड़की शब्द का इस्तेमाल गाली की तरह ही किया जाता है. कोई मर्द अगर रोए तो उससे कहा जाता है कि क्यों लड़कियों की तरह रो रहे हो यानी साक्षरता के बावजूद समाज में लड़कियों के प्रति नज़रिया पूरी तरह बदला नहीं है." मानेका बचपन से ही पिता के साथ उनके शो के सिलसिले में पूरी दुनिया घूमती रही हैं. शायद यही वजह है कि तीन बहनों में से उन्होंने ही इस परंपरा को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है. एक सवाल के जवाब में मानेका कहती हैं, "जादू कला और विज्ञान का संगम है. हर कलाकार अपने क्षेत्र में जादुई स्तर हासिल करना चाहता है. कला का श्रेष्ठ स्तर ही जादू कहलाता है." वो कहती हैं, "शो के दौरान भी दर्शकों को यही कहा जाता है कि हमारे पास कोई अलौकिक ताकत नहीं है. हम तो अपनी कला से सिर्फ़ लोगों का मनोरंजन करते हैं." जादू मानेका के पिता ताजमहल और रेलगाड़ी गायब करने का चमत्कार दिखा चुके हैं. क्या वे भी ऐसा कुछ अनूठा करने की सोच रही हैं. इस पर मानेका कहती हैं, "मैं भारत की प्राचीन जादू कला को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही हूँ. भारत को शुरू से ही रहस्यमय जादू का देश कहा जाता रहा है लेकिन कुछ पुरानी जादुई परंपराएँ अब धीरे-धीरे लुप्त हो गई हैं. मैं उनको पुनर्जीवित कर पूरी दुनिया के सामने लाना चाहती हूँ." मानेका की कामयाबी का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगले साल के आखिर तक उनके तमाम शो पूरी तरह बुक हैं. कोलकाता के बाद वे दक्षिण भारत से शुरूआत कर पूरे देश का दौरा करेंगी. उसके बाद इस साल के अंत में वे अमरीका के दौरे पर जाएंगी. जादू शो के साथ ही वे इस क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति पर एक किताब भी लिख रही हैं. क्या शादी के बाद भी वे अपने शो जारी रखेगीं. इस सवाल पर मानेका कहती हैं, "फ़िलहाल तो शादी की कोई योजना नहीं है. शादी के पहले यही मुख्य शर्त होगी कि मेरा शो चालू रहेगा." | इससे जुड़ी ख़बरें ब्लेन का नया कारनामा12 सितंबर, 2003 | पहला पन्ना केवल पानी पर 44 दिन 05 सितंबर, 2003 | पहला पन्ना मंत्र पढ़वाने वाले मंत्री | भारत और पड़ोस जादू मंतर के चक्कर में चक्करघिन्नी30 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस अब जादू विश्वविद्यालय...22 जुलाई, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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