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अब जादू विश्वविद्यालय... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जादू के हैरतअंगेज करतब सीखने के इच्छुक लोगों को अब ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा. जाने-माने जादूगर पीसी सरकार (जूनियर) अब जादू सिखाने के लिए एक विश्वविद्यालय खोलने जा रहे हैं. उस विश्वविद्यालय में जादू से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर एमए (इल्यूजन) यानि मायाजाल की डिग्री दी जाएगी. सरकार बताते हैं, " यह विश्वविद्यालय पारंपरिक तो नहीं होगा लेकिन गुरुकुल की तर्ज पर खोला जाएगा. यह देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में अपनी तरह का पहला विश्वविद्यालय होगा." सरकार इसमें पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार से भी कोई सहायता नहीं लेना चाहते और उन्होंने कोलकाता से सटे उपनगर बारुईपुर में ज़मीन भी खरीद ली है. वे कहते हैं कि दो तरह के पाठ्यक्रम होंगे - पहला नर्सरी से कक्षा आठ तक प्रारंभिक पाठ्यक्रम होगा और सप्ताह में एक या दो दिन पढ़ाया जाएगा. उनका कहना है कि इसमें जादू के बारे में बच्चों का भ्रम दूर किया जाएगा. सरकार कहते हैं, "आठवीं के बाद बच्चे सामान्य शिक्षा हासिल करेंगे. स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद छात्र इस विश्वविद्यालय में एमए (इल्यूजन यानि मायाजाल) की पढ़ाई कर जादूगरी में पारंगत हो सकेंगे." सरकार का दावा है कि अमेरिका व इंग्लैंड के कई विश्वविद्यालयों ने उनके प्रस्तावित पाठ्यक्रम में दिलचस्पी दिखाई है. लेकिन वे इसे भारत में शुरू करना चाहते हैं. जादू के बारे में वे कहते हैं, "एक जादूगर के लिए यह जानना काफ़ी महत्वपूर्ण है कि एक आम आदमी की इंद्रियां कहां तक देख-सुन और सोच सकती हैं. उस स्थिति से एक कदम आगे जाने पर ही सम्मोहन की स्थिति बन जाती है." | इससे जुड़ी ख़बरें जादू मंतर के चक्कर में चक्करघिन्नी30 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस काले जादू के आरोप में पाँच की हत्या19 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस जादू-टोने के मामलों से चिंता04 जून, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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