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हीरोइन की तलाश में देव आनंद | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अपनी क्रिएटिविटी और हमेशा कुछ नया सोचने और सक्रिय रहने के लिए जाने जाने वाले सदाबहार अभिनेता देव आनंद अपनी अँग्रेज़ी फिल्म ‘व्हेन हार्टबीट्स आर द सेम’ के लिए नायिका तलाशने क्रोएशिया पहुँचे हुए हैं. इन्होंने ज़ीनत अमान, टीना मुनीम जैसी अनेक अभिनेत्रियों को पहचान दी है. और आज तक उन्हें अपनी फ़िल्मों के लिए वैसे ही लोग चाहिए जैसा कि उनकी कल्पना में है फिर चाहे उसके लिए उन्हें कितनी ही मशक्कत क्यों न करनी पड़े. इनकी पिछली कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर नाकाम ही रही हैं लेकिन देवआनंद को इससे कोई फर्क़ नहीं पडता है. वे अपनी भूलों से सीख लेते हुए उन्हें सुधारने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. उनका कहना है कि उनकी फिल्में कहानी या निर्देशन की वजह से नहीं बल्कि प्रोमोशन की कमी की वजह से मारी गई हैं. वे कहते हैं, “चार साल से मेरे साथ यही दिक्कत हो रही है कि दूसरे लोगों की तरह मैं प्रोमोशन पर ज़्यादा ध्यान नहीं दे पाता हूँ. मिस्टर प्राइम मिनिस्टर के बाद मुझे ये बात बहुत अच्छी तरह से समझ में आ गई है और अब मैं इसकी तरफ पूरी तरफ से सजग रहूँगा”.
अपनी इस फिल्म के लिए देव आनंद काफी उत्साहित हैं और कहते हैं, “मेरी कहानी पूरी तरह से तैयार है और मैं क्रोएशिया सिर्फ इसलिए जा रहा हूँ कि मैं अपनी कहानी के हिसाब से एक ऐसी लडकी खोजूँ जो एकदम कमसिन और नाज़ुक होने के साथ ही ऐसी हो कि उसे देखकर ताज़गी का एहसास हो”. “मुझे पूरा भरोसा है कि मैं अपने इस काम में सफल ज़रूर होऊँगा और दुनिया के सामने ऐसी लडकी पेश करूँगा जिसे लोग देखते ही रह जाएँगे”. उनके लिए यह बात कोई मायने नहीं रखती है कि फिल्म की अभिनेत्री सडक पर फूल बेचने वाली लड़की होगी या फिर कोई और, लेकिन इनकी कहानी में फिट बैठनी चाहिए. फ़िल्म के लिए नायिका मिलते ही इसकी शूटिंग भी तुरंत शुरू हो जाएगी. इसके अलावा देव साहब आजकल अपनी जीवनी लिखने में भी काफ़ी व्यस्त हैं. ये कहते हैं, “मेरी इस किताब में ऐसी-ऐसी बातें होंगी जिसे लोग पढ़ना चाहेंगे क्योंकि मैंने इसमें कुछ छुपाया नहीं हैं”. “मेरी ज़िंदगी तो वैसे भी हमेशा से एक खुली किताब की तरह रही है लेकिन मेरी किताब में और कई चीज़ें पढ़ने को मिलेंगी”. | इससे जुड़ी ख़बरें पत्रिका से बेहतर साथी और कौन..?14 सितंबर, 2006 | पत्रिका अरुण कमल की तीन कविताएँ14 सितंबर, 2006 | पत्रिका पत्रकारिता की कालजयी परंपरा 15 सितंबर, 2006 | पत्रिका जुग्गी चाचा की मोटरसाइकिल15 सितंबर, 2006 | पत्रिका बीबीसी पत्रिका का विस्तार18 सितंबर, 2006 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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