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गुरुवार, 21 सितंबर, 2006 को 15:52 GMT तक के समाचार
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कितना सहज और सरल हो गया है संवाद

बीबीसी पत्रिका के प्रकाशन की शुरुआत के बाद से लगातार ईमेल के ज़रिए पाठक मुझसे संपर्क बनाए हुए हैं और अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं.

एक पाठक तो लगातार मेरे मोबाइल पर लंबे-लंबे एसएमएस भेज कर सुझाव दे रहे हैं कि पत्रिका में और क्या हो सकता है.

मुझे वह ज़माना याद आता है जब मैं सिर्फ़ एक पाठिका हुआ करती थी.

उन दिनों संपादक एक ऐसी शख़्सियत हुआ करता था जो कहीं दूर, पाठकों की पहुँच से बाहर हो.

लैपटॉप
एक ईमेल भर की दूरी है पाठक और संपादक के बीच

मेरे लिए कन्हैया लाल नंदन, कमलेश्वर, राजेंद्र यादव, धर्मवीर भारती, रघुवीर सहाय और मनोहरश्याम जोशी आदि बस कुछ नाम भर थे.

क्षमा कीजिएगा, मेरी बातों से अगर यह आभास हो रहा हो कि मैं इन दिग्गजों की बराबरी करने की धृष्टता कर रही हूँ.

ऐसा क़तई नहीं है. मेरे यह लिखने का आशय सिर्फ़ यह है कि आज संवाद कितना सहज और सरल हो गया है.

आज पाठक का संपादक से सीधा वास्ता है. वह अपनी बात सीधे संपादक तक पहुँचा सकता है.

अपनी नाराज़गी व्यक्त कर सकता है. अपनी महत्ता का आभास करा सकता है.

और संपादक के लिए कितना सहज हो गया है फ़ैसले लेना. ऐसे फ़ैसले जो सीधे उसके पाठक की रुचि पर आधारित हों.

नई तकनालाजी ने सब कुछ कितना आसान कर दिया है.

(बीबीसी पत्रिका को संवारने-निखारने में अपना योगदान दीजिए अपने सुझाव भेज कर. पता है hindi.letters@bbc.co.uk)

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