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बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के श्रोताओं की संख्या बढ़ी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के श्रोताओं की संख्या 16 करोड़ तीस लाख प्रति सप्ताह पहुँच गई है. इससे पहले वर्ल्ड सर्विस के श्रोताओं की सबसे ज़्यादा संख्या- 15 करोड़ तीस लाख वर्ष 2001 में दर्ज की गई थी. श्रोताओं की संख्या में सबसे ज़्यादा बढ़ोत्तरी नेपाल, भारत, नाइजीरिया, इंडोनेशिया और कीनिया में हुई है. जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश में श्रोताओं की संख्या में ज़बरदस्त गिरावट आई है. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के निदेशक नाइजल चैपमैन ने कहा, "प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भी श्रोताओं की बढ़ती संख्या एक बहुत बड़ी उपलब्धि है." उन्होंने कहा कि एक भरोसेमंद प्रसारक होने के चलते लोगों ने बीबीसी का रुख़ किया, ख़ासकर ऐसे इलाक़ों में जहाँ किसी न किसी तरह का संघर्ष चल रहा है. पिछले साल बीबीसी ने बुल्गारियाई, क्रोएशियाई और थाई समेत दस भाषाओं में अपनी सेवा बंद कर दी थी. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस तीस से ज़्यादा भाषाओं में अपना प्रसारण करती है. तकनीक के नज़रिए से इसमें काफ़ी बदलाव हो रहे हैं. पुराने ट्रांसमिटरों की जगह एफ़एम स्टेशनों से प्रसारण किया जा रहा है. सर्वेक्षण के अनुसार अंग्रेज़ी प्रसारण सुनने वालों की संख्या में तीस लाख की बढ़ोत्तरी हुई है और अब ये चार करोड़ प्रति हफ़्ता के आसपास है. पाकिस्तान और बांग्लादेश में श्रोताओं की संख्या में गिरावट के पीछे बीबीसी ने एफ़एम फ़्रिकूएंसी की कमी को कारण बताया है. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने पिछले साल अपना अरबी टीवी चैनल शुरू करने की घोषणा की थी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'इराक़ और सूनामी सबसे बड़ी घटनाएँ'30 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना बीबीसी वर्ल्ड सर्विस लाएगी अरबी चैनल25 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में बड़े परिवर्तन25 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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