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बड़े रंगीले थे छठे दलाई लामा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दलाई लामा - ये नाम सुनते ही आपके मन में बौद्ध धर्मगुरू का ध्यान आएगा और याद आएँगे पूजा-पाठ करते दलाई लामा. लेकिन छठे दलाई लामा की बात ही निराली थी - वे रंगीले थे, जमकर दारू पीते थे और उन्हें वेश्यालयों के चक्कर लगाने में भी बड़ा आनंद मिलता था. अब उन्हीं दलाई लामा की लिखी हुई कुछ कामुक कविताओं का नया अनुवाद सामने आया है जिससे उनके रंगीन व्यक्तित्व पर और रोशनी पड़ती है. सांग्यांग ग्यात्सो 1697 में छठे दलाई लामा बने, तिब्बत में रहनेवाले गेलुग बौद्ध संप्रदाय के धर्मगुरू. लेकिन उनके इरादे कुछ और थे, उन्होंने आम आदमियों जैसे कपड़े पहनने शुरू कर दिए. साथ ही रातों को वे अपना नाम भी बदल डालते थे, यानी रात को सांग्यांग ग्यात्सो बन जाते थे नोर्सांग वांगपो, उद्देश्य ये था कि वेश्याओं के पास जाने में परेशानी ना हो. कविताएँ अंग्रेज़ भाषाविद् पॉल विलियम्स ने छठे दलाई लामा की कई कविताओं को प्रकाशित करवाया है जिनमें वे विभिन्न महिलाओं के साथ अपने संबंधों का ब्यौरा देते हैं. विलियम्स कहते हैं,"उन्हें जो भी कहा गया, उसे उन्होंने नहीं किया. वे उन समारोहों में भी नहीं जाते थे जहाँ उन्हें जाना चाहिए था". दलाई लामा रात भर शराबख़ानों में रहते थे जिनमें कुछ सफेद तो कुछ पीले होते थे. माना जाता है कि पीले शराबख़ाने वो शराबख़ाने थे जहाँ दलाई लामा का प्यार परवान चढ़ा करता था. लेकिन उनकी इस हरकतों से ना केवल राजनीतिक संकट खड़ा हुआ बल्कि बौद्ध मतावलंबियों की इस आस्था को भी चोट पहुँची कि वे पाँचवें दलाई लामा के अवतार हैं. उनकी इस लापरवाही का असर ये हुआ कि मंगोलिया की ओर से आक्रमणकारियों ने दो बार चढ़ाई कर दी जिसके बाद चीन को तिब्बत में हस्तक्षेप करना पड़ा. विलियम्स कहते हैं,"इसी समय के बाद से चीन ये दावा कर रहा है कि तिब्बत उसका अंग है". सांग्यांग ग्यात्सो की 24 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई. लेकिन ऐसा संदेह प्रकट किया जाता है कि शायद उनकी हत्या कर दी गई हो. |
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