BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 16 फ़रवरी, 2005 को 09:10 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
पत्नी बिरह ने दिलाया पुरस्कार

डॉक्टर सलीम हुसैन
सलीम हुसैन पेश से रसायन विज्ञान के शिक्षक हैं
पत्नी के वियोग में लिखी गई कविता ने सात समुंदर पार इतना दर्द पैदा किया कि कविता को ईनाम भी मिल गया.

'केप्ट अपार्ट' इस कविता में डॉक्टर सलीम हुसैन के दिल का दर्द झलकता है जो उनके पत्नी प्रेम की देन था, इस दर्द की तड़पन में उन्होंने कविता ही लिख डाली.

ऐसा लगा कि कविता की पीड़ा सात समंदर पार भी सुनाई दी. अमरीका की इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ़ पोयट्स ने सलीम हुसैन के इस दर्द को समझा और उन्हें इस कविता के लिए साल 2005 के "पोयट ऑफ़ द इयर" पुरस्कार के लिए चुन लिया.

भारत की पीतल नगरी के रूप में मशहूर मुरादाबाद के निवासी डॉक्टर सलीम हुसैन रसायन विज्ञान के शिक्षक हैं उन्हें बीस हज़ार डॉलर का यह पुरस्कार फ़रवरी के अंतिम सप्ताह में अमरीका के फ्लोरिडा में वॉल्ट डिज़नी रिसोर्ट में प्रदान किया जाएगा.

इस कविता की रचना भी एक दिसचस्प घटना है.

कविता का जन्म
 क़रीब दस साल पहले उनका निकाह हुआ था लेकिन उनकी बीवी की विदाई नहीं होने की वजह से उन्होंने जुदाई का दर्द महसूस किया जिसने शब्दों का रूप ले लिया और इस कविता का जन्म हुआ.
डॉक्टर सलीम हुसैन

सलीम हुसैन बताते हैं, "क़रीब दस साल पहले उनका निकाह हुआ था लेकिन उनकी बीवी की विदाई नहीं होने की वजह से उन्होंने जुदाई का दर्द महसूस किया जिसने शब्दों का रूप ले लिया और इस कविता का जन्म हुआ."

सलीम हुसैन कहते हैं कि कविता के एक-एक शब्द का उनकी भावनाओं से गहरा संबंध है.

दर्द से कविता

शायद दर्द की इसी गहराई की वजह से उनकी कविता को दुनिया भर से आमंत्रित की गईं क़रीब 51 लाख प्रविष्टियों में से पुरस्कार के लिए चुना गया.

सलीम हुसैन बताते हैं कि यह प्रतियोगिता ग़ैरपेशेवर कवियों के लिए थी और इसके लिए इंटरनेट के ज़रिए ही प्रविष्टियाँ आमंत्रित की गई थीं.

डॉक्टर सलीम हुसैन
सलीम हुसैन के नाना भी शायर थे

इस प्रतियोगिता में कुल पुरस्कार राशि 74 हज़ॉर डॉलर की है जिसमें सबसे बड़ा ईनाम बीस हज़ार डॉलर का है. डॉक्टर सलीम हुसैन को बीस हज़ार डॉलर मिलेंगे और बाक़ी ईनाम राशि अन्य 35 कवियों में बाँटी जाएगी.

डॉक्टर सलीम हुसैन इस पुरस्कार को लेकर काफ़ी उत्साहित हैं और मानते हैं कि इससे उनकी लेखनी को नया आयाम मिलेगा.

सलीम हुसैन वैसे तो विज्ञान शिक्षा की पृष्ठभूमि में रहे हैं लेकिन कविता लेखन उनका शौक होने के अलावा उन्हें ख़ून में भी मिला है क्योंकि उनके नाना मोहम्मद ज़फ़र अश्क उर्फ़ अश्क संभली भी एक मशहूर शायर थे.

सलीम हुसैन बताते हैं कि सबसे पहले 1983 में कविता लिखी थी और तब से अनेक कविताएँ लिख चुके हैं. वह बताते हैं कि विश्व शांति पर उनके गीत 'ओ फ्रेंड्स! वी आर ऑल वन, फ्रॉम द सेम सीड इन...!' को न्यूयॉर्क में 1990 में आयोजित वर्ल्ड पीस प्रेयर सोसायटी के कार्यक्रम में पढ़ा गया था.

रसायन विज्ञान में पीएच डी की उपाधि प्राप्त सलीम हुसैन बच्चों के लिए भी कविताएँ लिखते हैं और उनका एक कविता संग्रह 'फ़ीलिंग्स' नाम से प्रकाशित हो चुका है.

डॉक्टर सलीम हुसैन का मानना है, "कविता अभिव्यक्ति का सबसे बेहतर और प्रभावशाली माध्यम है और कविता को सामाजिक जागरूरकता के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है."

कविता - 'Kept Apart'

Here I think and think of her
All time as a mad
There my wife moans
Tossing lone and sad
O exchange of rings
Then two halves kept apart
Now wait and wait for distance date
O restless heart
Livelong nights, sleepless bed
Visions and dreams haunt
Her changing faces, nupital fuss
And unfulfilled want

Life hastens days
But thoughts make them go slow
Flowers bloom, I care not
Evening come and go
Here I think and think of her
All time as a mad
There my wife moans
Tossing lone and sad.

इससे जुड़ी ख़बरें
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>