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सोमवार, 08 मार्च, 2004 को 17:27 GMT तक के समाचार
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जन्नत...जो मर्द के पहलू में नहीं

पूजा भट्ट
महिला अधिकारों की हिमायती हैं पूजा
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हिंदी फ़िल्म अभिनेत्री निर्माता और निर्देशक पूजा भट्ट ने बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत की.

पूजा आपको क्या लगता है कि महिलाओं की स्थिति में पिछले सालों में कोई सुधार आया है?

मुझे लगता है हमने कुछ इतनी तरक़्क़ी नहीं की है. जब मैं अपनी दादी या नानी को देखती हूँ या उस पीढ़ी की औरतों को देखती हूँ तो मुझे लगता है कि उन्होंने बहुत कुछ किया था और वो भी चुपचाप किया था.

आज जब हम कुछ बोलते हैं या करते हैं तो चाहते हैं कि हमें किसी महिलावादी पत्रिका के कवर पर छापा जाए. आज औरतें अपने आपको कहीं भूल सी गई हैं क्योंकि महिला आज़ादी का मतलब ये नहीं होता कि आप पुरुषों के साथ वही करें जो आप नहीं चाहते कि वो आपके साथ करें. बहुत आवश्यक है कि औरत और मर्द दोनों एक-दूसरे की इज़्ज़त करे और दोनों के बीच खुली बातचीत हो.

मुंबई जैसे शहर में रहने वाली औरत का समाज में जो स्थान है, क्या आपको लगता है कि उनकी स्थिति गाँव में रहने वाली औरतों से बेहतर है?

नहीं. बिल्कुल अच्छी नहीं है, चाहे आप बोर्डरूम में काम करते हों, फ़िल्म निर्देशक हो या एक्टर हो या गाँव में रहने वाली औरत, आप उतना ही हिंसा या दर्द का शिकार हो सकती हैं.

मैं ख़ुद एक साल पहले कुछ ऐसे ही हालात का शिकार थी. मेरे एक अल्कोहलिक व्यक्ति के साथ संबंध थे और वो मुझे मारता था. लोग मुझे यही कहते थे कि अगर ये तुम्हारे साथ हो सकता है तो हमारा क्या होगा, क्योंकि मैं एक मज़बूत औरत मानी जाती हूँ जो खुल कर अपने ख़याल रखती हूँ. अगर मैं अपने नाम को बचाने के लिए चुप रहती तो ये सही नहीं होता, उन तमाम औरतों के लिए जिनके साथ हर रोज़ ये हो रहा है. औरतों के अधिकारों की बात हम सिर्फ आठ मार्च को करते हैं, फिर भूल जाते हैं.

जो औरतें हिंदी फ़िल्मों में काम करती हैं, उनके साथ कैसा बर्ताव किया जाता है?

किसी के साथ ख़राब बर्ताव नहीं किया जाता लेकिन आप वैसी ही फ़िल्में बनाओगे जैसे आप ख़ुद हैं. फ़िल्म इंडस्ट्री काफी सीमित है, बाहर की दुनिया से ज़्यादा मेलजोल नहीं है, अपनी अलग ही दुनिया में रहते हैं ये लोग.

 हर दिन अपने औरत होने का जश्न मनाओ. याद रखो- जन्नत एक और है जो मर्द के पहलू में नहीं.

ऐसे में अगर बाहर की दुनिया से जानकारी नहीं लेंगे, अगर रोज़ कुछ सीखेंगे नहीं, तो फ़िल्मों में भी कोई नई बात नहीं आने वाली है.

बहुत ज़रूरी है कि अगर आप अपनी कला को बेहतर बनाना चाहते हैं तो पहले अपने आप को बेहतर बनाएँ.

ये जो इतने सारे फ़िल्म स्टार राजनीति में हिस्सा ले रहे हैं, किसी न किसी पार्टी से जुड़ रहे हैं. इसके बारे में आपका क्या ख़याल है?

मुझसे भी पूछा गया था कि क्या आप इस पार्टी या उस पार्टी के लिए प्रचार करेंगी तो मैंने यही कहा कि मैं एक कलाकार हूँ और मैं बाहर से ज़्यादा काम कर सकती हूँ. अगर मैं किसी एक राजनीतिक पार्टी से जुड़ जाउंगी तो उसके बाद मैं जो भी करुंगी लोगों को यही लगेगा कि मैं किसी फ़ायदे के लालच से कर रही हूँ. लेकिन ये मेरा निजी ख़याल है. अच्छी बात है कि लोग राजनीति में इतनी रुचि ले रहे हैं लेकिन मुझे इस सब में थोड़ा शक होता है, क्योंकि चुनाव के पहले नेता फ़िल्म स्टारों को पार्टी में लेते हैं लेकिन तीन महीने बाद ये फ़िल्म स्टार राजनीति में नज़र नहीं आते.

महिला दिवस के दिन कोई संदेश?

मैं यही कहना चाहूँगी कि आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये हमें याद दिलाता है कि अपने अधिकारों के लिए लड़ो. लेकिन ये जंग केवल एक दिन तक सीमित न होने दो. हर दिन अपने औरत होने का जश्न मनाओ. याद रखो- जन्नत एक और है जो मर्द के पहलू में नहीं. (ये लाईन कैफ़ी साहब ने लिखी थी मेरी फ़िल्म तमन्ना के एक गाने में.)

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